Competitive Exam Stress Management: आज के समय में कॉलेज जाने वाले बच्चे, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में खास तरह का मेंटल स्ट्रेस देखा जाता है. जून-जूलाई के महीनों में कॉलेज एडमिशन शुरू हो जाते हैं. ऐसे में युवा पीढ़ी कॉलेज में दाखिल को लेकर एक अलग ही तरह के स्ट्रेस का सामना कर रही होती है. युवा पीढ़ी में कॉलेज में एडमिशन के प्रेशर के साथ-साथ बेहतर नौकरी और कॉम्पीटिशन के स्ट्रेस में घिरा रहता है. ऐसे में कई परिवार वाले समझ ही नहीं पाते कि उनका बच्चा मेंटल स्ट्रेस से गुजर रहा है.
पैरेंट्स को ये समझना जरूर है कि बच्चों के विकास के लिए मेंटल हेल्थ भी उतनी ही जरूरी है जितना शारीरिक विकास. दरअसल मानसिक रूप से स्ट्रॉग व्यक्ति हर जीवन की हर परिस्थितियों से निकल सकता है. वह जल्दी से हार नहीं मानता. इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ता है. मेंटल स्ट्रेंथ होने से डिप्रेशन, चिंता से बचने में मदद मिलती है. ऐसा व्यक्ति रिश्तों, काम और व्यक्तिगत जीवन में बेहतर संतुलन बना पाता है. ऐसे में ये बात उन बच्चों के लिए खास हो जाती है जो जीवन में नए अपनी नई दिशा बना रहे होते हैं.
छात्रों पर की गई रिसर्च
The International Journal of Indian Psychology की रिसर्च ने 17 से 19 साल के JEE, NEET और CLAT की तैयारी करने वाले छात्रों पर रिसर्च की गई, उन्होंने पाया कि कॉम्पीटिशन एग्जाम की तैयारी करने वाले छात्र मेंटल स्ट्रेस से गुजर रहे होते हैं.
शोध के अनुसार, कॉम्पीटिशन एग्जाम की तैयारी कर रहे छात्रों में स्ट्रेस का प्रमुख कारण एग्जाम का प्रेशर, पैरेंट्स की उम्मीद, दोस्तो से कॉम्पीटिशन और फ्यूचर को लेकर चिंता है. यह स्ट्रेस लगातार छात्रों में बेचैनी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा और उदासी बढ़ाता है. छात्रों में आत्मविश्वास की कमी होने लगती है. इस स्टडी में बताया गया है कि ज्यादा तनाव के कारण छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा में प्रदर्शन खराब होने लगता है.
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में तनाव प्रबंधन, माइंडफुलनेस और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए. साथ ही, पैरेंट्स को भी बच्चों पर दबाव डालने के बजाय उनका आत्मविश्वास बढ़ाना चाहिए. इससे छात्रों की मेंटल हेल्थ सही रहती है. वह कॉम्पीटिशन एग्जाम की तैयारी बेहतर तरीके से कर पाते हैं.
छात्रों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
छात्र पढ़ाई के बीच ब्रेक लें.
अगर सब्जेट मुश्किल है, तो उसे समझने के लिए ग्रुप स्टडी करें.
हर सब्जेक्ट के लिए समय तय करें.
शांत माहौल में पढ़ाइ करें.
रिविजन जरूर करें.
पढ़ाई के साथ म्यूजिक सुनें, खेलें या अपनी पसंदीदा एक्टिविटी करें.
एग्जाम से पहले खुद को शांत रखें.
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