CPS Doctor Association Protest: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति खड़ी हो गई है. एक तरफ देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहीं दूसरी तरफ 2,000 से अधिक प्रशिक्षित पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर अपने करियर की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं. ये सभी डॉक्टर College of Physicians & Surgeons (CPS) से जुड़े हैं और अपनी मांगों को लेकर अब सड़कों पर शांतिपूर्ण विरोध करने को मजबूर हैं.
दरअसल देशभर के इन डॉक्टरों ने सरकारी और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पतालों में अपनी कठिन और लंबी रेजिडेंसी ट्रेनिंग पूरी की है. उन्होंने NEET-PG काउंसलिंग के जरिए पूरी पारदर्शिता और मेरिट के आधार पर अपनी सीट हासिल की थी. लेकिन आज स्थिति यह है कि एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनकी अंतिम परीक्षाएं आयोजित नहीं हो पाई हैं. आखिरी परीक्षा अक्टूबर 2024 में हुई थी, जिसके बाद 24 मार्च 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले के चलते CPS परीक्षाओं पर रोक लग गई. यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है (SLP (C) Nos. 13079–13081 of 2025), लेकिन लगातार तारीखें पड़ने के कारण डॉक्टरों का इंतजार लंबा होता जा रहा है.
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प्रदर्शन की जानकारी
अपनी आवाज उठाने के लिए ये डॉक्टर राजधानी दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं:
2 अप्रैल 2026: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नई दिल्ली – सुबह 11 बजे
3 अप्रैल 2026: जंतर मंतर, नई दिल्ली – सुबह 10 बजे
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
यह सिर्फ डॉक्टरों का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा हुआ है.
- स्वास्थ्य सेवाओं पर असर:जब देश को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सख्त जरूरत है, तब 2,000 से ज्यादा प्रशिक्षित डॉक्टर काम करने के बजाय खाली बैठे हैं.
- मानसिक और आर्थिक दबाव: इन डॉक्टरों पर मानसिक तनाव और आर्थिक संकट लगातार बढ़ रहा है. न उन्हें डिग्री मिल रही है, न रजिस्ट्रेशन—जिससे उनका करियर पूरी तरह रुका हुआ है.
- सिस्टम पर भरोसा कम होना: लगातार देरी और प्रशासनिक उदासीनता से युवा डॉक्टरों का सिस्टम पर भरोसा कमजोर हो रहा है, जो भविष्य के लिए एक गंभीर संकेत है.
डॉक्टरों की मुख्य मांगें
ये डॉक्टर किसी तरह की विशेष छूट नहीं, बल्कि अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं:
- लंबित CPS परीक्षाएं तुरंत आयोजित की जाएं
- परीक्षा पास करने के बाद डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया स्पष्ट और आसान हो
- NMC और स्वास्थ्य मंत्रालय इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप कर समाधान निकालें
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