Creatine for Depression: क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट, एक तरह का जिम सप्लीमेंट हैं. यह जिम जाने वाले और एलीट्स के बीच काफी लोकप्रिय हैं. लेकिन हाल ही में सप्लीमेंट रिसर्च में ये दावा किया गया कि ये सिर्फ मांसपेशियों को ताकत देने के काम नहीं आता बल्कि इसके सेवन से काफी हद तक डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है.
बता दें कि क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट मुख्य रूप से मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने, वर्कआउट के दौरान एनर्जी लेवल को बेहतर करने और तेजी से मसल्स बनाने (मांसपेशियों के विकास) के लिए इसका सेवन किया जाता है.
रिसर्च के अनुसार, अब ये सप्लीमेंट मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (Major Depressive Disorder-MDD) के इलाज में सहायक (Add-on Therapy) की भूमिका निभा सकता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे डिप्रेशन की दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.
रिसर्च में क्या मिला?
रिसर्च के दौरान 2 से 10 ग्राम सप्लीमेंट्स प्रतिभागियों को दिया गया. ये सप्लीमेंट्स उन्हें लगातार 4-8 हफ्तों तक दिया गया. रिसर्च में पाया गया कि कुछ मरीजों में क्रिएटिन लेने से डिप्रेशन के लक्षणों में अधिक सुधार हुआ और रिकवरी की संभावना भी बढ़ी. खासतौर पर महिलाओं में किए गए एक अध्ययन में, 5 ग्राम क्रिएटिन प्रतिदिन एंटीडिप्रेसेंट दवा के साथ लेने पर आठ सप्ताह बाद बेहतर परिणाम देखने को मिले.
कैसे काम करता है क्रिएटिन?
शोधकर्ताओं के अनुसार, क्रिएटिन मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऊर्जा उपलब्ध कराने और उसे बनाए रखने में मदद करता . डिप्रेशन से जुड़े कई मरीजों में ब्रेन एनर्जी मेटाबॉलिज्म और माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता प्रभावित पाई गई है. इसके अलावा क्रिएटिन डोपामिन और सेरोटोनिन जैसे मूड नियंत्रित करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है।
कैसे काम करता है सप्लीमेंट?
शोधकर्ताओं के अनुसार, क्रिएटिन मस्तिष्क की कोशिकाओं को एनर्जी देने में मदद करत है. डिप्रेशन से जुड़े कई मरीजों में ब्रेन एनर्जी मेटाबॉलिज्म और माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता प्रभावित पाई गई है. इसके अलावा क्रिएटिन डोपामिन और सेरोटोनिन जैसे मूड कंट्रोल करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है.
इस बात का रखें ध्यान
हालांकि, विशेषज्ञ इसे सटीक इलाज नहीं बताते. उनका कहना है कि डिप्रेशन संबंधी समस्याएं न हो इसके लिए जरूरी है कि अपनी लाइफस्टाइल पर खासतौर पर ध्यान दिया जाए. एक्सरसाइज, भरपूर नींद, बैलेंस्ड डाइट, स्ट्रेस कंट्रोल करना जैसे तरीको को अपनाकर डिप्रेशन पर कंट्रोल किया जा सकता है. इसलिए केवल सप्लीमेंट पर निर्भर न रहे.
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