Why Women Get Thyroid Problems: आज के समय में थायराइड की बीमारी तेजी से फैल रही है. कई बार तो ऐसा होता है कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि वह इस बीमारी से पीड़ित है. वहीं वह लंबे समय से इस बीमारी से पीड़ित रहता है. ऐसे में कई बार उसे सही समय पर लक्षण पता नहीं चल पाते ऐसे में बीमारी के डायग्नोसिस होने में देरी हो जाती है.
रिसर्च के अनुसार, महिलाओं में थायराइड रोग पुरुषों की तुलना में कई गुना अधिक पाए जाते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह हार्मोनल बदलाव, ऑटोइम्यून बीमारियों की अधिक संभावना और आनुवंशिक (जेनेटिक) कारण माने जाते हैं.
थायराइड एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो गर्दन के सामने स्थित होती है. इस ग्रंथि का मुख्य काम हार्मोन बनाना होता है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी, हार्ट बीट, शरीर के तापमान और वजन को कंट्रोल करने में खास भूमिका निभाता हैं. वहीं अगर थायराइड ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगे है, तो इसे थायराइड की समस्या कहा जाता है.
यह भी पढ़ें: थायराइड की समस्या से हो गए परेशान? डाइट से तुरंत हटाएं ये फूड्स, मिलेगा आराम
महिलाओं में थायराइड होने के बड़ा कारण
दरअसल महिलाओं में ये समस्या इसलिए ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि ये एक हार्मोनल बीमरी है. हार्मोन से जुड़ी है. वहीं महिलाएं अपने जीवन काल में कई बार हार्मोन के बदलाव से गुजरती है. जैसे, युवावस्था में प्यूबर्टी के समय, वहीं हर महीने पीरियड्स के दौरान, इसके अलावा प्रेग्रेंसी के दौरान और उसके बाद मेनोपॉज के समय. दरअसल इन सभी समय पर थायराइड ग्रंथि पर बहुत प्रभाव पड़ता है. इसलिए एक्सपर्ट महिलाओं को जीवन के इन उतार-चढ़ाव के दौरान नियमित जांच कराने की सलाह दी जाती है.
महिलाओं में थायराइड की समस्या होने के पीछे दूसरे बड़ा कारण हैं. जेनेटिक अगर किसी के घर में पहले किसी को थायराइज की समस्या रही है तो वह आगे की पीढ़ी को पेरशान कर सकती है. ऐसे में कुछ जेनेटिक कारण के कारण भी थायराइड की समस्या होती है.
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
- बहुत ज्यादा थकान
- दिल की धड़कन तेज होना
- वजन तेजी से बदलना
- हाथ कांपना
- बाल बहुत झड़ना
- सूजन या सांस में दिक्कत
यह भी पढ़ें: थायराइड कंट्रोल करने के नेचुरल तरीके, आज ही आजमाएं
थायराइड कितने प्रकार की होती है?
थायराइड बीमारी दो प्रकार की होती है. ( हाइपोथायरायडिज्म Hypothyroidism) , जब थायराइड हार्मोन कम बनता है, और (हाइपरथायरायडिज्म Hyperthyroidism ), जब हार्मोन अधिक बनता है.
हाइपोथायरायडिज्म लक्षण: तेजी से वजन बढ़ना, बहुत अधिक थकान होना, हमेशा ठंड लगना, कब्ज और बालों का झड़ना.
हाइपरथायरायडिज्म लक्षण: अचानक वजन कम होना, दिल की धड़कन का बढ़ना, घबराहट और चिंता, गर्मी सहन न होना और बार-बार दस्त होना.
कैसे करें बचाव?
आयोडीन युक्त आहार लें
आयोडीन युक्त आहार: थायराइड हार्मोन के प्रोडक्शन के लिए आयोडीन बहुत ज़रूरी है. इसलिए अपनी डाइट में खासतौर पर आयोडीन युक्त आहार शामिल करें. इसके साथ ही डाइट में खनिज और विटामिन जैसे आहार भी शामिल करें. शरीर में सेलेनियम (बादाम, सूरजमुखी के बीज) और जिंक (दालें, साबुत अनाज) की उचित मात्रा बनाए रखें. वहीं अगर आपको पहले से थायराइड की समस्या है, तो ब्रोकली, पत्तागोभी और फूलगोभी जैसी क्रूसिफेरस सब्जियों को खाने से बचें.
लाइफस्टाइल में करें बदलाव
एक्सपर्ट कहते हैं कि थायराइज स्ट्रेस के कारण भी होता है. इसलिए अपनी लाइफस्टाइल में योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियों को जरूर शामिल करें. ये स्ट्रेस मैनेज करने का सबसे सरल उपाय है. इसके अलावा आप हर दिन कम से कम 30 मिनट टहल भी सकते हैं. जिससे वजन कंट्रोल में रहे और मेटाबॉलिज्म सही से काम करे. बदलती लाइफस्टाइल में आज के समय में कई लोग धूम्रपान और शराब का सेवन भी करते हैं. ऐसे में इनके सेवन से भी बचना चाहिए.
नियमित जांच कराएं
अगर आपके परिवार में पहले से किसी को थायराइड है, तो वर्ष में एक बार थायराइड प्रोफाइल (TSH) की जांच ज़रूर करवाएं.
यह भी पढ़ें: ज़मीन पर बैठकर खाना खाने से शरीर में क्या होता है? जानें साइंस क्या कहती है और किन लोगों को नहीं करना चाहिए ऐसा
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

