Deepinder Goyal Entropy Biomarker: जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल एक बार फिर से सुर्खियां बटौर रहे हैं. इस चर्चा की वजह टेंपल है. जो उन्हीं की हेल्थ स्टार्टअप कंपनी है. इसका एक डिवाइस जिसे वो अक्सर लगाकर घूमते नजर आते हैं. वहीं अब टेंपल कंपनी ने ही नया बायोमार्कर की खोज की है.
इस बायोमार्कर का नाम रखा गया है एनट्रोपी. उनका कहना है कि यह बायोमार्कर शरीर के “जिंदा रहने की कीमत” को माप सकता है. इस बात की जानकारी खुद दीपिंदर ने सोशल मीडिया एक्स पर शेयर की है. जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. उनका कहना है कि ये बताएगा कि शरीर को एनर्जी बनाने में कितनी मेहनत करनी पड़ रही है. ये सभी जानकारी सिर की कनपटी यानी कान के ऊपरी हिस्से से ही मापा जा सकता है. इसे इसलिए बनाया गया है ताकि यह पता चल सके कि शरीर किस एक्टिविटी के समय कितनी एनर्जी खर्च कर रहा है.
एक्सपर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
अब दीपिंदर के इस दावों पर कई डॉक्टर्स और हेल्थ एक्लपर्ट ने साइंटिफिक रिलायबिलीटी पर सवाल उठाए हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतने बड़े क्लेम को किसी भी तरह से स्वीकारने से पहले इसके पीछे ठोस रिसर्च और क्लीनिकल सबूत का होना बहुत ही जरूरी है.
क्या है Entropy बायोमार्कर?
दीपिंदर गोयल के अनुसार, Entropy एक ऐसा संकेतक है जो यह बताने की कोशिश करता है कि शरीर अपनी सामान्य गतिविधियों और जीवन को बनाए रखने के लिए कितनी ऊर्जा और जैविक दबाव (Physiological Stress) झेल रहा है. कंपनी का दावा है कि इससे व्यक्ति की हेल्थ और एजिंग (बढ़ती उम्र) को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.
डॉक्टरों को क्यों हो रही है चिंता?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नए बायोमार्कर को वैज्ञानिक मान्यता मिलने से पहले उसे कई चरणों की जांच और स्वतंत्र रिसर्च से गुजरना पड़ता है. अभी तक Temple की ओर से ऐसी कोई पीयर-रिव्यूड (Peer Reviewed) रिसर्च सार्वजनिक नहीं की गई है, जो इस दावे को पूरी तरह साबित कर सके. कुछ डॉक्टरों का मानना है कि स्वास्थ्य से जुड़े दावों को लोगों तक पहुंचाने से पहले उनके पीछे पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण होना जरूरी है, ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति न बने.
पहले भी विवादों में रहा है Temple डिवाइस
यह पहली बार नहीं है जब Temple डिवाइस चर्चा में आया हो। इससे पहले भी जब दीपिंदर गोयल एक पॉडकास्ट में इस डिवाइस को पहनकर नजर आए थे, तब कई डॉक्टरों ने इसकी कार्यप्रणाली और दावों पर सवाल उठाए थे. उस समय भी विशेषज्ञों ने कहा था कि डिवाइस की उपयोगिता साबित करने के लिए पर्याप्त क्लीनिकल डेटा उपलब्ध नहीं है.
दीपिंदर गोयल का क्या कहना है?
दीपिंदर गोयल पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि Temple अभी एक एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट है और इस पर काम जारी है. उनका कहना है कि डिवाइस और उससे जुड़े डेटा पर अभी रिसर्च चल रही है और भविष्य में अधिक वैज्ञानिक जानकारी साझा की जाएगी.
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नई तकनीक और रिसर्च का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन किसी भी हेल्थ डिवाइस या बायोमार्कर को अपनाने से पहले उसकी वैज्ञानिक जांच और स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है. जब तक पर्याप्त सबूत सामने नहीं आते, तब तक ऐसे दावों को सावधानी के साथ देखने की जरूरत है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

