Hormonal Changes and Depression: महिलाओं में डिप्रेशन पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुना पाया जाता है. ये बात एक स्टडी में निकलकर सामने आई है. आमतौर पर डिप्रेशन को स्ट्रेस से जोड़कर या फिर उदासी से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन हर बार इसे स्ट्रेस से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, खासकर महिलाओं में इसका संबंध अन्य कारणों से भी होता है.
येल विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ साइकियाट्री द्वारा आयोजित ग्रैंड राउंड्स लेक्चर में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की प्रोफेसर और ब्रिघम एंड विमेन्स हॉस्पिटल की विशेषज्ञ डॉ. हेडिन जोफी ने महिलाओं में डिप्रेशन के कारणों और इलाज पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि महिलाओं के जीवन में हार्मोनल बदलाव, जैसे प्यूबर्टी, गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद का समय और मेनोपॉज, मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं. ये सभी डिप्रेशन के अहम कारण होते हैं.
क्या कहती रिसर्च रिपोर्ट?
- एक्सपर्ट के अनुसार महिलाओं में, प्री मेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में उतार-चढ़ाव होता है, जो मूड स्विंगको कंट्रोल करने वाले सेरोटोनिन और डोपामिन पर असर डालते हैं. इसके अलावा स्ट्रेस, सोशल प्रेशर दबाव और नींद की कमी भी डिप्रेशन के जोखिम को बढ़ा सकते हैं.
- वहीं रिसर्च में ये बात भी सामने आई है कि मेनोपॉज हर महिला में डिप्रेशन का सीधा कारण नहीं बनता, बल्कि जिन महिलाओं को पहले से डिप्रेशन की समस्या रही है, उनमें इसका जोखिम अधिक बढ़ सकता है.
- एक्सपर्ट कहते हैं कि मेनोपॉज के दौरान गर्मी लगना, रात में पसीना आना और नींद में परेशानी होने जैसे लक्षण दिमाग को प्रभावित करते हैं, जो मूड स्विंग का कारण बनते हैं. ऐसे मामलों में समय पर स्क्रीनिंग, सही इलाज, थैरेपी और जरूरत पड़ने पर हार्मोन थेरेपी या एंटीडिप्रेसेंट दवाएं मददगार हो सकती हैं.
- एक्सपर्ट ने सलाह दी कि अच्छी नींद की आदतें, कैफीन और स्क्रीन टाइम कम करके और स्ट्रेस मैनेज से मेंटल हेल्थ को इंप्रूव किया जा सकता है. दरअसल येल विश्वविद्यालय ने ये स्टडी महिलाओं के मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के उद्येश्य से की है.
मेनोपॉज़ हर महिला में डिप्रेशन का सीधा कारण नहीं
दरअसल, 2024 में डॉ. जॉफ़े और उनकी टीम ने इस मिथक पर भी रिसर्च की, क्या रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) के कारण महिलाओं में डिप्रेशन बढ़ सकता है? पहले कई शोधों में कहा गया था कि मेनोपॉज़ के दौरान डिप्रेशन का खतरा दो से चार गुना तक बढ़ सकता है. लेकिन लंबे समय तक महिलाओं पर किए गए अध्ययन में यह बात सामने निकलकरस आई कि गंभीर डिप्रेशन का खतरा मुख्य रूप से उन महिलाओं में ज्यादा देखा गया, जिन्हें पहले भी डिप्रेशन की समस्या रह चुकी थी. यानी मेनोपॉज़ हर महिला में डिप्रेशन का सीधा कारण नहीं बनता.
डिप्रेशन के प्रमुख लक्षण
- लंबे समय तक उदासी रहना
- निराशा या हताशा महसूस होना
- पसंदीदा कामों में रुचि कम होना
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- मानसिक और शारीरिक थकान
- नींद से जुड़ी समस्याएं
- मूड में बार-बार बदलाव
- तनाव और भावनात्मक दबाव बढ़ना
- बेचैनी या घबराहट महसूस होना
- ऊर्जा की कमी महसूस होना
डिप्रेशन से बचाव के तरीके
- अच्छी और पूरी नींद लेना
- तनाव को नियंत्रित करना
- स्क्रीन टाइम कम करना
- नियमित दिनचर्या अपनाना
- मानसिक स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच कराना
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या थैरेपिस्ट से सलाह लेना
- हॉट फ्लैशेस और नींद की समस्या का इलाज कराना
- संतुलित जीवनशैली और स्वस्थ खानपान अपनाना
- परिवार और दोस्तों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना
- नियमित हल्की एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधि करना
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