How High Blood Sugar Affect Vision: आज के समय में डायबिटीज से वैश्विक बीमारी बन चुकी है. आंकड़ों के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वर्ष 2022 तक दुनिया में लगभग 83 करोड़ (830 million) लोग डायबिटीज से प्रभावित थे, जो इस बीमारी के बढ़ते खतरे को दर्शाता है. वहीं इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 53–54 करोड़ वयस्क लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, और भारत में यह संख्या करीब 10–11 करोड़ (100–110 मिलियन) तक पहुंच चुकी है, जिससे भारत को ‘डायबिटीज कैपिटल’ भी कहा जाता है.
बता दें कि शुगर इतनी घातक बीमारी है जिसमें आंखों की रोशनी तक चली जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लेवल आंखों की छोटी रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को नुकसान पहुंचता है. इससे रेटिना तक सही मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता, जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी, मैक्युलर एडिमा और कभी-कभी ग्लूकोमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं. समय के साथ यह स्थिति नजर कमजोर होने या गंभीर मामलों में अंधापन तक का कारण बन सकती है. इसलिए डायबिटीज को कंट्रोल रखना और नियमित आंखों की जांच कराना बहुत जरूरी है.
डायबिटीज के चलते आंखों को होती ये समस्याएं
डायबिटिक रेटिनोपैथी
डायबिटिक रेटिनोपैथी आंखों की समस्या है. ये डायबिटीज (मधुमेह) के कारण होती है. किसी व्यक्ति को जब लंबे समय तक शुगर की समस्या रहती है तो उसकी आंखों को परेशानी हो सकती है. बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लेवल आंखों की रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, जिससे नजर कमजोर हो सकती है. गंभीर मामलों में ये अंधापन बना सकती है. इसलिए डायबिटीज को कंट्रोल रखना इस बीमारी से बचाव के लिए बहुत जरूरी है.
डायबिटिक मैक्युलर एडिमा (DME)
डायबिटिक मैक्युलर एडिमा (DME) समस्या में आंख की रेटिना के बीच वाले हिस्से (मैक्युला) में सूजन आ जाती है, जिससे धुंधला दिखना या नजर कमजोर होना शुरू हो जाता है. समय पर इलाज न होने पर यह आंखों की रोशनी को गंभीर रूप से खराब कर सकती है.
मोतियाबिंद
अक्सर मोतियाबिंद बुजुर्गों को होने वाली बीमारी है. लेकिन अगर आप शुगर के मरीज हैं तो आपको सतर्क होने की जरूरत है. ये शुगर लेवल बढ़ने पर भी हो सकती है. बढ़ता शुगर लेवल आंखों के लेंस पर असर डालता है. जिससे धुंधलापन आने लगता है. नेचुरल लेंस खराब हो जाती है.
ग्लूकोमा
लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर आंखों की रक्त वाहिकाओं और ऑप्टिक नर्व को प्रभावित कर सकता है, जिससे आंखों का प्रेशर बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए डायबिटीज मरीजों को नियमित आंखों की जांच कराना जरूरी होता है ताकि ग्लूकोमा का समय पर पता चल सके. इस बीमारी में आंख के अंदर का प्रेशर (Intraocular Pressure) बढ़ जाता है और धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है. अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह स्थायी अंधापन का कारण बन सकता है।
इन लक्षणों से पहचानें डायबिटीज के मरीज की आंखों को हो रहा नुकसान
- धुंधला दिखाई देना
- नजर का बार-बार बदलना
- पढ़ने या फोकस करने में दिक्कत
- रात में कम दिखाई देना
- आंखों के सामने काले धब्बे (फ्लोटर्स) दिखना
- रोशनी में चकाचौंध लगना
- सिरदर्द या आंखों में दबाव महसूस होना
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FAQs
सवाल: किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
जवाब: आंखों के सामने काले धब्बे दिखना, रात में कम दिखाई देना या अचानक नजर कमजोर होना होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.
सवाल: डायबिटीज से आंखों को नुकसान होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
जवाब: धुंधला दिखाई देना, नजर का बार-बार बदलना और पढ़ने में कठिनाई इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.
सवाल: क्या डायबिटीज आंखों को नुकसान पहुंचाकर अंधापन का कारण बन सकती है?
जवाब: हां, लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचाकर गंभीर मामलों में अंधापन का कारण बन सकती है.
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