Dishwash Liquid Risk: आप घर में बर्तन धोने के लिए क्या इस्तेमाल करते हैं? सवाल अटपटा जरूर लगा होगा लेकिन काम का है. दरअसल रसोई में बर्तन धोने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डिशवॉश लिक्विड पर एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. हम बैखौफ तरीके से इसका इस्तेमाल तो कर रहे हैं, क्योंकि हमें लगता है कि झाग बन रहा है और बर्तन पर से चिकनाहट हट रही है. लेकिन ये सिर्फ हमें ही लगता है. ये आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.
आपने सही पढ़ा मुंबई स्थित एक ऑर्थोपेडिक सर्जन, और हेल्थ कोच न्यूट्रीबाइट वेलनेस के सह-संस्थापक डॉक्टर मनन वोरा ने एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में ही उन्होंने डिशवॉश लिक्विड को लेकर जानकारी पेश की है. उनका कहना है कि ये डिशवॉश असल में रसोई के सबसे टॉक्सिक और जहरीले प्रोडक्ट में से एक हो सकता है.
डिशवॉश में मौजूद होता ये कैमिकल
डॉक्टर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार डिशवॉश ब्रांड्स में आइसोथियाजोलिनोन्स नाम के कैमिकल्स मौजूद होते हैं. ये सिंथेटिक बायोसाइड्स और प्रिजर्वेटिव्स हैं. यानी इसका इस्तेमाल बैक्टीरिया को रोकने के लिए किया जाता है. हालांकि आप कहेंगे कि बैक्टीरिया तो निकल रहे हैं, फिर कैसा खतरा तो बता दें कि ये इंसानी शरीर के लिए नहीं बना और इंसानी शरीर पर इसका इफेक्ट काफी चिंताजनक है. वहीं साइंटिस्ट ने भी इसपर रिसर्च की है. उनकी रिसर्च के अनुसार ये केमिकल आपकी हेल्थ पर तीन तरीके से प्रभाव डालते हैं.
इसी से संबंधित जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में रिसर्च पब्लिश भी हुई. जिसके अनुसार ये केमिकल स्किन सेंसिटाइजर की तरह काम करते हैं. यानी अगर ये बार-बार आपके स्किन के कॉन्टैक्ट में आए तो इससे एलर्जी, खुजली या फिर कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. ये खासतौर पर उनके लिए भी काफी खतरा है जिनकी स्किन काफी सेंसिटीव है. ऐसे लोगों के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है.
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केमिकल दे सकता गहरा असर
वहीं यूरोपीय संघ यानी साइंटिफिक कमीटी ऑन कंज्यूमर सेफ्टी ने इसपर एक रिपोर्ट जारी की. जिसके अनुसार ये केमिकल हमारे शरीर के हार्मोनल सिस्टम को काफी अफेक्ट डाल सकते हैं. वहीं फिलहाल इसपर डीप रिसर्च जारी है, हालांकि शुरुआती नतीजे इसके हेल्थ के खतरे को जोखिम भरा बताते हैं. रिसर्च में हैरान करने वाली बात ये है कि आप नॉर्म पानी से बर्तन को धोने के बाद भी कई बार लिक्विड पूरी तरह से नहीं हटता. इसमें छोटे अंश प्लेट या फिर चम्मच पर रह ही जाते हैं. वहीं इसी को हम खाने के जरिए निगल लेते हैं, जो हमारे पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाता है. जिसे म्यूकोसल इंजरी कहते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


