Honsla Rakh Abhiyan: स्ट्रेस किसे नहीं होता? अगर आप अपने आपको लंबे समय तक काम के प्रेशर में झोंक दें. लगातार काम करते रहें तो कोई भी व्यक्ति मानसिक स्थिती का शिकार हो सकता है, फिर वो चाहे डॉक्टर ही क्यों न हो. दरअसल अधिक समय तक काम करना, काम का प्रेशर बढ़ना डॉक्टरों के लिए भी मुसिबत बन रहा है. बीते कुछ सालों में ये समस्या डॉक्टरों की हेल्थ के लिए भी चुनौती बनती जा रही है.
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि डॉक्टर लंबे समय तक ड्यूटी करते हैं. नतीजा डॉक्टरों की मेंटल हेल्थ पर काफी असर पड़ रहा है. जानकारी के मुताबिक देश में कई अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों को हफ्ते में 80 से 100 घंटे तक काम करना पड़ता है. कई डॉक्टोंरी की शिफ्ट इमरजेंसी डिपार्टमेंट में लगती है, नाइट में भी काम करना पड़ता है, कम रिसोर्सेस के साथ काम करना, मरीजों की बढ़ती हुई संख्या डॉक्टर की मेंटल हेल्थ को खराब कर रही है.
डॉक्टरों के लिए खास अभियान की हुई शुरुआत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले पर वरिष्ठ डॉक्टर पंकज सोलांकी ने एक खास अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान का नाम है #हौसला_रख अभियान. जानकारी के मुताबिक इस अभियान का मकसद डॉक्टरों की मेंटल हेल्थ पर खुलकर बातचीत शुरू करना है. वहीं इस अभियान को लेकर डॉक्टर सौलंकी का कहना है कि जिस तरह आम लोग मेंटल हेल्थ का शिकार होते हैं, वैसे डॉक्टर भी मानसिक तनाव, थकान का शिकार होते हैं.
उन्होंने कहा कि इस मुद्दें पर खुलकर कोई बात नहीं कर रहा. हालांकि डॉक्टर भी एक इंसान हैं. लेकिन लगातार काम का स्ट्रेस, नींद की कीम और मरीजों की जिम्मेदारी उनके मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर रही है. डॉक्टर पंकज का कहना है कि इस अभियान की मदद से डॉक्टर बिना झिझक के मदद ले सकेंगे. क्योंकि वो एक ऐसा एनवायरमेंट बनाना चाहते हैं जहां डॉक्टरों को अपने इमोशनंस को एक्सप्रेस करने में मुश्किल न हो और खुलकर बात कर सकें.
मरीजों पर भी पड़ सकता है
इस अभियान की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि इससे मरीजों के इलाज में भी राहत मिल सकती है. डॉक्टर पंकज का कहना है कि अगर इलाज करने वाला ही बीमार रहेगा वो ही स्ट्रेस में रहेगा तो इसका असर सीधे तौर पर मरीजों पर भी पड़ेगा. उनकी देखभाल पर पड़ेगा. क्योंकि स्ट्रेस और थकान के प्रेशर से डिसिजन लेने की पावर प्रभावित होती है. इसलिए उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य को सिर्फ डॉक्टरों की व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि हेल्थ सिस्टम के मुद्दे के रूप में देखने की जरूरत है. जल्द से जल्द इस समस्या के समाधान का रास्ता खोजना होगा.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

