Filariasis Disease Diagnosis: मच्छर जिस जगह पर काटता है, शरीर के उस जगह के हिस्से पर खुजली, जलन और लाल रैशेज जैसा होना सामान्य बात है. लेकिन क्या आपने सुना है कि मच्छर के काटने पर उस हिस्से का हाथी की तरह फूल जाना? दरअसल इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक व्यक्ति का पांव हाथी की तरह फूल गया है. मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि व्यक्ति को मच्छर ने काटा था जिस कारण उसका पैर हाथी के पैर की तरह फूल चुका है.
दरअसल मानसून का मौसम आ चुका है, ऐसे में आपको मच्छर जनित बीमारियों के बारे में पता होना बहुत जरूरी है. ताकि समय रहते आप इन बीमारियों के लक्षणों की पहचान करके सही समय पर इलाज करा सकें. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि क्या है फाइलेरियासिस बीमारी? इस बीमारी के लक्षण और बचाव क्या हैं? कितनी खतरनाक हैं? इलाज क्या है?
क्या है खबर?
सोशल मीडिया की तस्वीर में दिख रहा व्यक्ति झारखंड के दुमका का रहने वाला है. उसे लगभग 10 साल से फाइलेरियासिस की बीमारी है. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इलाज सही तरीके से नहीं हो पा रहा. सोशल मीडिया पर युवक की बीमारी के फैलने के बाद राज्य सीएम हेमंत सोरेन ने युवक के इलाज के लिए हरसंभवा सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं. वहीं मामले की जानकारी मिलते ही दुमका DC ने तुंरत कार्रवाई करते हुए पीड़ित युवक की स्थिति का जायजा लिया.
फाइलेरियासिस क्या है? | What is filariasis?
फाइलेरियासिस (Filariasis), जिसे हाथीपांव (Elephantiasis) भी कहा जाता है. यह बीमारी फाइलेरियासिस परजीवी के कारण होती है. मच्छरों के जरिए यह इंसानों में फैलती है. जब फाइलेरियासिस से संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो उसको यह बीमारी हो जाती है. यह बीमारी शरीर की लसीका प्रणाली (Lymphatic System) को प्रभावित करती है, जिससे हाथ, पैर, स्तन या जननांगों में असामान्य सूजन पैदा करती है.
क्या होता है फाइलेरियासिस परजीवी?
फाइलेरियासिस परजीवी (Filariasis parasite) एक तरह के परजीवी कृमि (parasitic worm) होते हैं, जो इंसान के शरीर में रहकर बीमारी पैदा करते हैं. यह बीमारी फाइलेरियासिस (Filariasis) कहलाती है. इसका मुख्य कारण फाइलेरिया कृमि होते हैं, जैसे Wuchereria bancrofti और Brugia malayi. ये छोटे, धागे जैसे (thread-like) कीड़े होते हैं.
- ये परजीवी आमतौर पर मच्छर के काटने से इंसान के शरीर में पहुंचते हैं.
- शरीर में पहुंचने के बाद ये लसीका तंत्र (lymphatic system) में जाकर रहते हैं.
- धीरे-धीरे ये लसीका वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे हाथ-पैर या जननांगों में सूजन (lymphedema) हो सकती है. शुरुआत में कई लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन लंबे समय बाद हाथ-पैर का असामान्य रूप से बढ़ जाना (हाथीपांव/Elephantiasis) जैसी गंभीर समस्या हो सकती है.
फाइलेरियासिस के लक्षण | Symptoms of filariasis
- हाथ, पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में लगातार सूजन
- बुखार और ठंड लगना
- लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) में सूजन
- त्वचा का मोटा और सख्त होना
- दर्द और चलने-फिरने में परेशानी
- पुरुषों में अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसील)
फाइलेरियासिस से बचाव कैसे करें? | How can filariasis be prevented?
- मच्छरों के काटने से बचें.
- मच्छरदानी का उपयोग करें.
- पूरी बांह के कपड़े पहनें.
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें.
- मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें.
- सरकार द्वारा चलाए जाने वाले फाइलेरिया रोधी दवा अभियान में दी जाने वाली दवाएं समय पर लें. शुरुआती पहचान और इलाज से बीमारी की गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है.
फाइलेरियासिस बीमारी कितनी खतरनाक है?
फाइलेरियासिस आमतौर पर तुरंत जानलेवा बीमारी नहीं होती, लेकिन अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर और हमेशा रहने वाली समस्याएं पैदा कर सकती है. यह बीमारी लसीका तंत्र को नुकसान पहुंचाती है, जिससे हाथ, पैर या जननांगों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन हो सकती है. गंभीर मामलों में अंगों का आकार असामान्य रूप से बढ़ सकता है, जिसे हाथीपांव (Elephantiasis) कहा जाता है.
इस बीमारी के कारण व्यक्ति को चलने-फिरने में कठिनाई, बार-बार संक्रमण, दर्द और दैनिक कामकाज में परेशानी हो सकती है. साथ ही, यह मानसिक और सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है. इसलिए फाइलेरियासिस को हल्के में नहीं लेना चाहिए और इसके लक्षण दिखने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
फाइलेरियासिस की पहचान कैसे करें? | How to identify filariasis?
फाइलेरियासिस की शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए कई लोगों को लंबे समय तक पता नहीं चलता कि वे संक्रमित हैं. हालांकि, समय के साथ कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं, जैसे हाथ या पैर में बार-बार या लगातार सूजन, लिम्फ नोड्स (लसीका ग्रंथियों) में दर्द और सूजन, बार-बार बुखार आना, तथा पुरुषों में अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसील) होना। बीमारी बढ़ने पर प्रभावित अंगों की त्वचा मोटी और सख्त हो सकती है.
ध्यान रहे कि फाइलेरियासिस बीमारी केवल लक्षणों से नहीं पहचानी जा सकती है. इसके लिए डॉक्टर की सलाह, ब्लड टेस्ट करवाना जरूरी है. ऐसे में परजीवी संक्रमण का पता लगाया जाता है. अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से सूजन या ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें, तो उसे जल्द से जल्द डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

