Medicine QR Code Rule India: देशभर में दवाओं की क्वालिटी को बेहतर और उसकी सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कई कदम उठा रही है. इसी क्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इससे जुड़े नियमों में काफी बदलाव किया है. नए नियम कहते हैं कि अब कोई भी जरूरी दवाओं पर QR कोड लगाना जरूरी होगा. इससे दवाओं की असली पहचान कर पाना काफी आसान हो जाएगा.
दरअसल ये बदलाव का मुख्य उद्देश्य यही है कि मरीजों तक असली और सुरक्षित दवाओं को पहुंचाया जा सके. जिससे कि बाजार में नकली या फिर खराब क्वालिटी वाली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई जा सके. आइए जान लेते हैं कि आखिर किन दवाओं पर रोक लगाई जाएगी.
किन दवाओं पर लगेगा QR कोड?
पहले यह व्यवस्था देश के कुछ बड़े दवा ब्रांड्स तक सीमित थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है. नए नियमों के अनुसार अब इन दवाओं पर QR कोड लगाना जरूरी होगा:
- वैक्सीन (टीके)
- इन्फेक्शन यानी संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं जैसे एंटीबायोटिक
- कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं
- कुछ खास नशीली और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं
यानी आने वाले समय में इन दवाओं को खरीदने से पहले उनकी पहचान और जानकारी को आसानी से जांचा जा सकेगा.
QR कोड से क्या फायदा मिलेगा?
सवाल ये कि आखिर QR कोड लगाने का क्या फायदा होगा. इसका जवाब है कि दवा के पैकेट पर लगे QR कोड को जब मोबाइल से स्कैन किया जाएगा तो इससे दवा की पूरी जानकारी मोबाइल में ही सामने आ जाएगी. जानकारी में बताया जाएगा. दवा का नाम क्या है, किस कंपनी ने इसे तैयार किया है, दवा किस बैच की है, इसे किस तारीख यानी कब से बनाया गया है, इसकी एक्सपायरी डेट क्या है, जिस कंपनी ने दवा तैयार की उसके लाइसेंस नंबर या बैच नंबर क्या है. ये सभी जानकारी आपको स्कैन करने पर मिल जाएगी. सरल शब्दों में कहा जाए तो अब कोई भी दुकानदार आपको नकली दवा नहीं बेच पाएगा.
क्या होगा फायदा?
इन सबका क्या फायदा होगा? तो इसका जवाब है कि नकली दवाएं जो मार्केट में बिक रही हैं और जो हेल्थ के लिए खतरा बन रही है उनपर रोक लगाई जाएगी. इसपर रोक लगाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि नकली दवा में सही मात्रा में दवा नहीं होती या यूं कहा जाए कि वो पूरी तरह खराब हो सकती है. ऐसी दवाएं मरीज की बीमारी को ठीक करने के बजाय नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसी को QR कोड वाली व्यवस्था पूरी तरह खत्म कर देगी. सरकार नजर रखने की तैयारी में है. यानी दवा बनने से लेकर मेडिकल दुकान तक पहुंचने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा.
एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल पर भी नजर
सरकार का यह कदम एंटीबायोटिक दवाओं से जुड़ी एक बड़ी समस्या से निपटने में भी मदद करेगा. कई जगह लोग बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेते हैं या गलत दवा खरीद लेते हैं. इससे बैक्टीरिया पर दवाओं का असर कम होने लगता है, जिसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस कहा जाता है. QR कोड से असली दवा की पहचान और उसकी निगरानी बेहतर हो सकेगी.
मरीजों को क्या फायदा होगा?
इस नए नियम से आम लोगों को कई फायदे मिलेंगे:
- नकली दवा खरीदने का खतरा कम होगा
- दवा की सही जानकारी आसानी से मिलेगी
- दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ेगी
- इलाज ज्यादा सुरक्षित होगा
सरकार का यह कदम भारत की दवा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम बदलाव माना जा रहा है. आने वाले समय में QR कोड की मदद से मरीजों को यह भरोसा मिल सकेगा कि वे जो दवा ले रहे हैं, वह असली और सुरक्षित है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

