Sehat Ki Khabar: नमस्कार फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट्स में आपका स्वागत है. सिर्फ प्रोडक्ट पर हेल्दी लिख देना ही काफी नहीं होगा. FSSAI ने कड़े आदेश दिए हैं. आप कैसे पहचान सकते हैं कि प्रोडक्ट असली है या नहीं इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में. जन्म से टेढ़ी हड्डी का इलाज हो पाएगा संभव, एम्स ने शानदार रिसर्च की. इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में. रील स्क्रॉलिंग करते-करते मेमोरी लॉस का शिकार हो रहे हैं. क्यों हो रहा है ऐसा इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के तीसरे और आखिरी सेगमेंट में चलिए शुरू करते हैं.
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प्रोडक्ट हेल्दी है या नहीं कैसे पहचानें?
आपने कई प्रोडक्ट पर हेल्दी, ऑर्गेनिक, वीगन, जीरो मैदा, ऑल नैचुरल इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल होता हुआ देखा होगा. ऐसे शब्द जब लिखे जाते हैं, तो ग्राहक प्रोडक्ट्स आसानी से खरीद सकते हैं. क्योंकि ये शब्द हेल्थ से जुड़े होते हैं. FSSAI ने जो कंपनियां ऐसा दावा कर रही हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और भ्रामक दावों को फैलानी वाली कंपनियों को नोटिस जारी किया है. हालांकि ग्राहक ऐसे शब्दों को देखकर प्रोडक्ट खरीद भी रहे हैं. सोशल मीडिया पर FSSAI ने जारी की थी.
प्रोडक्ट खरीदने के लिए किन बातों का रखें ख्याल?
सबसे पहला काम आपको करना है
- -इनग्रीडिएंट्स चेक करें.
- -पाम ऑयल
- -आर्टिफिशियल स्वीटनर
- सुक्रालोज़
- -नेचर आइडेंटिकल फ्लेवर्स
ऐसे शब्द दिखें तो समझें कि ये प्रोसेस्ड फूड है..यानी हेल्दी नहीं है ये आपकी हेल्थ के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. इसलिए प्रोडक्ट लिस्ट को जरूर चेक करें. प्रोडक्ट पर इनग्रीडिएंट की लिस्ट लंबी है तो उसे न खरीदें क्योंकि अक्सर छोटी लिस्ट वाले प्रोडक्ट ही आपके लिए हेल्दी हो सकते हैं.
टेढ़ी रीढ़ की हड्डी का होगा इलाज
कुछ बच्चों की रीढ़ की हड्डी जन्म से ही टेढ़ी होती है और वो ऐसे ही जन्म लेते हैं. इसे कंजेनिटल स्कोलियोसिस कहा जाता है. फिलहाल इसका सही इलाज नहीं था. लेकिन अब इसका इलाज संभव हो पाएगा. दरअसल बेहतर ट्रीटमेंट के लिए एम्स ने एक रिसर्च की है. इस रिसर्च में इस मुश्किल सर्जरी का इलाज निकाल दिया है. जानकारी है डॉक्टर्स इस कंडिशन को ठीक करने के लिए Hi-POAD तकनीक का सहारा लेंगे. इसी तकनीक की मदद से इस समस्या को ठीक किया जा सकता है, जो व्यक्ति इसका शिकार है उनके लिए ये ट्रीटमेंट किसी राहत से कम नहीं.
रील स्क्रॉलिंग बन रही मेमोरी लॉस का कारण
लोग घंटो रील स्क्रॉल करते रहते हैं, जो वाकयी में आदत बिगाड़ने वाला काम तो है उसके साथ ही इससे मेमोरी लॉस का कारण बनता है. दरअसल हमारा माइंड किसी चीज को याद करने के लिए तीन स्टेज जैसे एन्कोडिंग, कन्सोलिडेशन, रिट्रीवल के जरिए प्रोसेस करता है. हमारा माइंड तीन स्टेज से गुजरते हुए मेमोरी को याद रखता है. इसमें पहला होता है एन्कोडिंग, कन्सालिडेशन और रिट्रीवल जो प्रमुख है. हमारा माइंड इन्हीं तीनों के जरिए कोई जानकारी कंज्यूम करता है उसे याद रखता है. जब कभी जरूरत पढ़े तो उसे वापस लाने का काम कर पाता है. इस तरह से माइंड मेमोरी को याद रखने में सफल हो पाता है. लेकिन इसमें सबसे जरूरी है हमारी नींद.
अब बात आई कि आखिर मेमोरी लॉस का कारण घंटो रील स्क्रॉल करना, शॉर्ट फॉर्मेट कैसे हो गया? तो इसका जवाब है कि जब हम घंटो भर रील्स या फिर शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करते रहते हैं तो ये तीन प्रोसेस बिगड़ने लगते हैं. दिमाग एन्कोड नहीं कर पाता क्योंंकि एक ही दम से आप इतना सारा कॉन्टेंट कंज्यूम कर लेते हैं. जिसके कारण जानकारी ओवरलोड हो जाती है.
इसका नतीजा ये होता है कि 15 से 30 सेकंड की रील्स देखने के बाद हमारा माइंड उसे प्रोसेस नहीं कर पाता तो हमारा फोकस भटकता है. फोकस करने में परेशानी होती है, जो शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस का कारण बन जाता है. क्योंकि जब हम हर 10 से 15 सेकंड में रील चेंज करते हैं, तो डोपामाइन जो हमें खुशी का एहसास करवाने वाला हार्मोन होता है वो थक जाता है. क्योंकि वो बार-बार रिलीज होता है. हर बार नया चेहरा, नई जानकारी मिलती जाती है. इसलिए ऐसी समस्या पैदा हो सकती है.
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