FSSAI Action on Energy Drinks: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने बुधवार को छह एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स को नोटिस जारी किया है. दरअसल ये ब्रैंड्स एनर्जी ड्रिंक्स के तौर पर मार्केट में गलत और गुमराह करते हुए अपने प्रोडक्ट्स को बेच रहे थे. जानकारी के अनुसार जिन छह ब्रांड्स के नाम सामने आए हैं उनमें रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, पेप्सिको का एड्रेनालाईन रश एनर्जी ड्रिंक, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का कैम्पा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट, स्टिंग एनर्जी ड्रिंक, हेल एनर्जी और कोका-कोला-बैक्ड मॉन्स्टर एनर्जी ड्रिंक का नाम शामिल हैं.
इसे लेकर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया गया है. जिसमें फूड रेगुलेचर की ओर से जानकारी है कि जिन ड्रिंक्स को एनर्जी ड्रिंक होने का दावा करके ये ब्रांड्स ब्रांडिंग कर रहे हैं और उनके प्रमोशनल दावों को देखते हुए ये नोटिस उन्हें जारी किया गया है.
ऐसे प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग की
FSSAI ने “एनर्जी ड्रिंक्स” या इसी तरह के बेवरेज के तौर पर क्लासिफाइड प्रोडक्ट्स के लिए कोई खास स्टैंडर्ड नोटिफाई नहीं किया है. इसने आरोप लगाया कि ब्रांड्स ने ऐसी नोटिफाइड कैटेगरी न होने के बावजूद ब्रांडिंग और लेबलिंग पर “एनर्जी ड्रिंक” जैसे डिस्क्रिप्टर का इस्तेमाल करके अपने प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग की. डिपार्ट्मेंट ने ये साफ किया कि ये उसके रेगुलेशंस के तहत फूड कैटेगरी सिस्टम क्लासिफिकेशन के मकसद से है, न कि प्रोडक्ट के नाम या लेबलिंग के लिए.
शरीर और दिमाग को देता है एनर्जी
अब कुछ ब्रांड्स अपने प्रोडक्ट्स को ये कहकर बेच देते हैं कि इसे पीने से एनर्जी मिलती है. दिमाग फ्रेश होता है दिमाग को भी एनर्जी मिलती है. लेकिन फूड रेगुलेटर ने ऐसे ही प्रोडक्ट्स पर आपत्ति जताई है, और कहा कि ये शरीर में एनर्जी देता, फोकस बढ़ाता, एनर्जी लेवल बढ़ाता है, कमजोरी में मदद करता है. इस तरह के क्लेम करना फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 और उनसे जुड़े नियमों के तहत फूड प्रोडक्ट्स के लिए बिल्कुल भी मंजूर नहीं है. यानी इसकी परमिशन ही नहीं है. फिर भी इस तरह से इन्हें बेचा जा रहा है. हालांकि फिलहाल ब्रांड्स की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
डिपार्टमेंट ने की सख्त कार्रवाई
हालांकि ये पहली बार नहीं है कि जब फूड डिपार्टमेंट ने इस तरह की कार्रवाई की हो. हाल के कुछ महीनों में ही FSSAI ने ऐसे गलत ब्रांडिंग, गुमराह करने वाले विज्ञापनों और फूड सेफ्टी के नियमों का पालन न करने और उनका उल्लंघन करने वाले क्लेम पर कार्रवाई काफी तेज कर दी है. उधर कंज्यूमर्स की ओर से भी लगातार शिकायते मिलने के बाद भी कार्रवाई तेज की गई है.
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