Gene Therapy India: केंद्र सरकार ने सेल या फिर स्टेम सेल से तैयार हुए प्रोडक्ट्स जैसे जीन थेराप्यूटिक प्रोडक्ट्स और ज़ेनोग्राफ्ट्स को सेंट्रली लाइसेंस अप्रूविंग फ्रेमवर्क के तहत लाने के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव किया है. इसे लेकर गुरुवार को एक बयान सामने आया है. जिसमें कहा गया कि सरकार के इस कदम से एडवांस्ड और उभरती हुई मेडिकल टेक्नोलॉजी की रेगुलेटरी निगरानी मज़बूत होगी.
साथ ही ये कदम उन जरूरी दवाओं और बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स की रेंज को बढ़ाएगा. जिनपर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत केंद्र और राज्य अथॉरिटीज़ की जॉइंट रेगुलेटरी निगरानी होती है, जिसमें पहले से ही वैक्सीन, बड़े वॉल्यूम वाले पैरेंटरल और r-DNA बेस्ड दवाएं शामिल हैं.
क्या है इस बदलाव का मकसद?
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इस बदलाव का मकसद तेज़ी से बदल रही मेडिकल टेक्नोलॉजी के लिए देश भर में रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स में एक जैसा होना पक्का करना है. मंत्रालय ने कहा कि यह बदलाव नई टेक्नोलॉजी के लिए रेगुलेटरी सख्ती बढ़ाएगा और साइंटिफिक तरक्की और दुनिया की सबसे अच्छी प्रैक्टिस के हिसाब से भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मज़बूत करेगा.
जीन थेराप्यूटिक प्रोडक्ट्स?
अब जान लेते हैं जीन थेराप्यूटिक प्रोडक्ट्स क्या होते हैं. बता दें कि इनमें जीन रिप्लेसमेंट, जीन एडिटिंग प्रोडक्ट्स शामिल होते हैं. जिनका इस्तेमाल जेनेटिक डिसऑर्डर, साथ ही कई तरह के कैंसर के इलाज में किया जाता है. वहीं ज़ेनोग्राफ्ट्स जानवरों के टिशू से बने प्रोडक्ट्स हैं, जैसे हार्ट वाल्व, जिन्हें इंसानों में ट्रांसप्लांट किया जा सकता है और जिनका इस्तेमाल कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स में किया जाता है
मरीजों को क्या फायदा होगा?
सरकार के इस फैसले के बाद इन आधुनिक इलाजों की मंजूरी और निगरानी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगे. इससे पूरे देश में एक जैसे नियम लागू होंगे, रेगुलेटरी सिस्टम मजबूत होगा और मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्ता वाले इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी.
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