Green Urea Production a Reality in INDIA: भारत सरकार ग्रीन यूरिया (Green Urea) के प्रोडक्शन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. इस कड़ी में उर्वरक विभाग (Department of Fertilizers – DoF) ने भारत में ग्रीन यूरिया प्लांट लगाने के लिए प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (Pre-EOI) बैठक आयोजित की. इस बैठक में सरकारी और प्राइवेट क्षेत्री की कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया. इसका उद्देश्य देश में स्वच्छ, टिकाऊ और कार्बन-न्यूट्रल उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा देना है.
सरकार का उद्देश्य है कि ग्रीन यूरिया प्रोडक्शन के क्षेत्र में सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र साथ मिलकर काम करें. बैठक की अध्यक्षता उर्वरक विभाग के संयुक्त सचिव और पीडीआईएल (PDIL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. के.के. पाठक ने की. बैठक में आंध्र प्रदेश के पुडिमडाका स्थित 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट को मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया.
क्या है ग्रीन यूरिया?
हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर तकनीक (Carbon Capture) की मदद से ग्रीन यूरिया बनाई जाती है. इसमें जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) का उपयोग कम होता है. वहीं इसे बनाने के लिए सौर, पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का उपयोग किया जाता है. बता दें कि ग्रीन यूरिया पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है. सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में उर्वरक उत्पादन को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जाए.
सरकार देगी आर्थिक सहायता
ग्रीन यूरिया परियोजना को सफल बनाने के लिए सरकार के साथ कई विभाग मिलकर काम करेंगे. वहीं सरकार की ओर से ग्रीन यूरिया बनाने के लिए आर्थिक सहायता के लिए भी प्रावधान किया गया है. नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने हरित ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने के लिए 19,744 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है और उर्वरक विभाग (DoF) ने ग्रीन अमोनिया को देश की उर्वरक उत्पादन प्रणाली में शामिल करने के लिए नीति और बाजार व्यवस्था विकसित करेगा.
सरकार ग्रीन यूरिया को क्यों दे रही बढ़ावा?
यूरिया एक नाइट्रोजन युक्त रासायनिक उर्वरक है, जिसका उपयोग फसलों की बढ़वार और अच्छी पैदावार के लिए किया जाता है. जब किसान यूरिया खेत में डालते हैं तो पौधों को नाइट्रोजन मिलती है, जिससे पत्तियां हरी-भरी होती हैं, पौधों की वृद्धि तेज होती है और उत्पादन बढ़ता है. भारत में गेहूं, धान, मक्का, गन्ना और कई अन्य फसलों में यूरिया का बड़ी मात्रा में प्रयोग किया जाता है.
ग्रीन यूरिया ज्यादा फायदेमंद क्यों?
- ग्रीन यूरिया का सबसे बड़ा फायदा खेती से ज्यादा पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है.
- ग्रीन यूरिया के प्रोडक्शन में कार्बन उत्सर्जन कम होता है.
- वहीं जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटती है.
- इसके उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है.
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटती है.
- नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ता है.
- ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है.
- भारत के नेट-जीरो 2070 लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलती है.
- यदि देश में बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होता है, तो यूरिया आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है.
किसानों और देश को क्या होगा फायदा?
- यूरिया आयात पर निर्भरता कम होगी.
- स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल उर्वरक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी.
- ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को गति मिलेगी.
- किसानों के लिए भविष्य में टिकाऊ उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित होगी.
- भारत आत्मनिर्भर और हरित उर्वरक उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाएगा.
1 करोड़ टन यूरिया का आयात करता है भारत
भारत अभी भी हर वर्ष लगभग 1 करोड़ टन यूरिया का आयात करता है. वहीं देश के कई यूरिया प्लांट 30 साल से अधिक पुराने हो चुके हैं. ऐसे में नए ग्रीन यूरिया प्लांट न केवल आयात पर निर्भरता कम करेंगे बल्कि ऊर्जा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत करेंगे. भारत ने 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है. यानी देश चाहता है कि भविष्य में जितनी ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में जाएं, उतनी ही मात्रा को कम या संतुलित भी किया जाए. इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन यूरिया को बढ़ावा दे रही है.
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