Sehat Ki Khabar: नमस्कार फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट्स में आपका स्वागत है. बाजार में बिक रहा खराब दूध, इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में. यूरिन टेस्ट से चलेगा ऑटिज्म का पता. जानेंगे सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में. टूटे हुए दांत उगाए जाएंगे वापस. कैसे बात करेंगे सेहत की खबर के तीसरे और आखिरी सेगमेंट में.
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बाजार में बिक रहा खराब दूध
बाजार में खराब दूध बिक रहा है. जो हमारी डेली लाइफ का अहम हिस्सा है. जानकारी है कि इनमें डिटर्जेंट, यूरिया और कई कैमिकल्स को मिलाया जा रहा है. आप घर बैठे ही इसका पांच मिनट में ही पता लगा सकते हैं. FSSAI ने इसपर जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की है. इसके लिए आपके घर में कुछ खास तरीकों का सामान होना चाहिए, जैसे टेस्ट ट्यूब, आधा छोटा चम्मच सोयाबीन या फिर अरहर दाल का पाउडर और लाल लिटमस पेपर. सबसे पहले टेस्ट ट्यूब लें इसमें एक चम्मच दूध डालें. फिर छोटा चम्मच सोयाबीन या अरहर दाल का पाउडर डालें उसे अच्छे से मिक्स कर लें. ट्यूब को पांच मिनट के लिए छोड़ दें. अगर दूध में डाले गए लिटमस पेपर का रंग बदला तो समझ जाइए इसमें कुछ मिला हुआ है. यानी ये मिलावटी दूध है.
यूरिन से होगी ऑटिज्म की पहचान
अब जल्द ही यूरिन सैंपल की मदद से ऑटिज्म की पहचान करने में मदद मिलेगी. इसपर एक स्टडी किपोर्ट सामने आई है. इस टेस्ट को लेकर रिसर्चर्स का मानना है कि ये नई तकनीक ऑटिज्म की पहचान को और आसान बनाने की दिशा में एक शानदार कदम साबित हो सकता है. जानकारी के मुताबिक दो तरह के बच्चों पर स्टडी हुई पहले वो जो इस बीमारी का शिकार थे और जो इस बीमारी का शिकार नहीं थे. उनके यूरिन सैंपल्स की जांच की. इस रिजलट्स में सामने आया कि ऑटिज्म से जुड़े कुछ खास जैविक संकेत दोनों समूहों में अलग-अलग स्तर पर मौजूद थे. इन्हीं के आधार पर रिसर्चर्स ने ऑटिज्म से जुड़े संभावित संकेतों की पहचान करने की कोशिश की. जो बच्चे ऑटिज्म का शिकार थे उनके रिजल्ट्स काफी बेहतर मिले. इसलिए रिसर्चर्स का मानना है कि ये तकनीक आगे चलकर काफी उपयोगी मानी जा सकती है.
दुबारा उग जाएंगे दांत
अब तक दांत टूट जाने के बाद नकली दांत या फिर नकली तरीका ही बचता है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. दरअसल जापान एक ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है. जिसकी मदद से दोबारा दांत उगाए जा सकते हैं. दरअसल हमारे जबड़े में दातों की एक एक्ट्रा या फिर थर्ड जनरेशन के दांतों की संरचनाएं होती है. इसे सामान्य रूप से इनएक्टिव रका जाता है. लेकिन जापान जो दवाई बना रहा है वो इसे एक्टिव करेगी ताकि एक बार फिर से दातों को डेवलप किया जा सकता है.
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