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आंतों में कोलन कैंसर का कारण क्या है? साइंटिस्ट ने किया चौंकाने वाला खुलासा

How Gut Bacteria Cause Colon Cancer: दुनियाभर में कैंसर के मामले तेजी से फैलती जा रही है. जो बेहद चिंताजनक और चौंकाने वाली बात है.

How Gut Bacteria Cause Colon Cancer: दुनियाभर में कैंसर के मामले तेजी से फैलती जा रही है. जो बेहद चिंताजनक और चौंकाने वाली बात है. इसपर जल्द काबू पाना जरूरी है. वहीं अमेरिका के साइंटिस्ट ने एक रिसर्टच की जिसमें खुलासा हुआ कि हमारी आंत यानी इंटेस्टाइन में रहने वाले कुछ बैक्टीरिया कोलन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं. जर्नल साइंस में इसपर एक रिपोर्ट भी जारी की जा चुकी है.

वहीं जारी हुई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि ये बैक्टीरिया हमारे शरीर में किस तरह नुकसान पहुंचाता है. यहां तक की हमारे डीएनए को भी काफी नुकसान पहुंचाता है. कैसे आज हम आपसे इसी पर बात करने वाले हैं. इसे जानकर आप अलर्ट हो सकते हैं. साथ ही कैंसर के खतरे को कम करने में मदद पा सकते हैं. आइए डिटेल में जानते हैं.

बैक्टीरिया बनाते ये टॉक्सिन्स

वहीं हमारे आंत में मौजूद कुछ बैक्टिरीया टॉक्सिन्स डेवलप करते हैं. इन्हें कोलिबैक्टिन कहा जाता है. ये आखिर बनते कैसे हैं? तो इसे बनाने वाला खास तरह के E. coli बैक्टीरिया है. जो इस तरह के टॉक्सिन्स को प्रड्यूस करता है. हालांकि आमतौर पर ये बैक्टीरिया हमारे गट माइक्रोबायोम का हिस्सा होते हैं और डाइजेशन में मदद करते हैं. लेकिन कुछ मामले हैं जिनमें स्थिती काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है. हालांकि ऐसा नहीं है कि साइंटिस्ट को इससे पहले जानकारी नहीं थी. इससे पहले तक भी साइंटिस्ट इस टॉक्सिन्स के बारे में जानते थे. लेकिन इसका इसका संबंध कोलोरेक्टल कैंसर से हो सकता है. लेकिन इस टॉक्सिन का स्टडी करना आसान नहीं था, क्योंकि यह बहुत अस्थिर होता है और जल्दी टूट जाता है.

डीएनए को कैसे पहुंचाता है नुकसान

वहीं हाल ही में हुई नई स्टडी रिसर्च के अनुसार तकनीकों की मदद जैसे मास स्पेक्ट्रोमेट्री और न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस की मदद से इस टॉक्सिन्स को डिटेल में समझा है. साइंटिस्ट ने पाया कि कोलिबैक्टिन डीएनए रैंडम तीरके से नहीं बल्कि हमारे खास हिस्सों पर निशाना बनाता है. रिसर्च के अनुसार ये टॉक्सिन्स डीएनए ते उन हिस्सों पर असर करता है. यानी जहां एडेनिन और थाइमिन अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं उन्हीं जगहों पर ये टॉक्सिन्स असर करते हैं. कोलिबैक्टिन डीएनए की दोनों स्ट्रैंड्स को आपस में जोड़ देता है, जिसे वैज्ञानिक “इंटरस्ट्रैंड क्रॉस-लिंक” कहते हैं. इससे डीएनए सही तरह से कॉपी या रिपेयर नहीं हो पाता, जो कैंसर का कारण बन सकता है.

DNA में यहां आकर चिपकता है टॉक्सिन

वहीं इस रिसर्च रिपोर्ट में ये सामने आया कि ये टॉक्सिन हमारे डीएनए के माइनर ग्रूव नाम के हिस्से में जाकर चिपकता है. क्योंकि इसकी कैमिकल बवावट ऐसी होती है, यानी यह बिल्कुल सही जगह फिट होकर ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है. साइंटिस्ट इसे लॉक एंड की जैसे मैकेनिज्म जैसा बताया है. यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कोलोरेक्टल कैंसर के मरीजों में एक जैसे डीएनए बदलाव क्यों दिखाई देते हैं.

टेस्ट विकसित करने में मिलेगी मदद

अब इस रिसर्च रिपोर्ट के बाद ये सामने आया कि भविष्य में इस जानकारी की मदद से टेस्ट को डेवलप करने में मदद मिल सकती है. जिसे की आंत में मौजूद बैक्टीरिया की पहचान करने में मदद मिलेगी. इसी के साथ इलाज संभव हो पाएगा. ये इस टॉक्सिन को बनने से रोक पाएंगे और डीएनए से जुड़ने से पहले ही खत्म कर देंगे. इतना ही नहीं डाइट, प्रोबायोटिक्स या फिर अन्य तरीकों से गट माइक्रोबायोम को कंट्रोल कर उसके जोखिम करने को कम करने में मदद मिल सकती है.

यह भी पढ़ें: सुरक्षित हाथों में बच्चों की जिंदगियां! मृत्यु दर में आई गिरावट; UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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