ICMR Report on Junk Food: कुछ बच्चे कोल्ड-ड्रिंक, पिज्जा, बर्गर इन सभी का सेवन बहुत अधिक करते हैं. अगर आप भी उन्हीं में से है तो ये रिपोर्ट आपके काम की होने वाली है. दरअसल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी (ICMR) के राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) ने एक नई रिपोर्ट पेश की है.
ये रिपोर्ट काफी चौंकाने वाली है. रिपोर्ट बताती है कि भारत में जंक फूड, कोल्ड-ड्रिंक/जूस के सेवन से बच्चों की सेहत खराब हो रही है. ये बच्चों के सबसे अधिक दुश्मन है. चौंकाने वाली रिपोर्ट है कि 5 से 19 साल के करीब 4.1 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जिनमें वजन अधिक है यानी वो मोटापे का शिकार हैं.
प्री-डायबिटीज का शिकार
रिपोर्ट चौंकाने वाली और खराब इसलिए भी है क्योंकि 10% प्री-डायबिटीज के शिकार हैं. 1% किशोरों को डायबिटीज हो चुकी है. 5% किशोर हाई ब्लड प्रेशर (BP) से जूझ रहे हैं. आसान शब्दों में कहें तो आज हर तीसरा बच्चा किसी न किसी बीमारी का शिकार हो चुका है.
क्या होता है HFSS?
आपको बता दें कि जंक फूड को साइंटिफिक भाषा में HFSS यानी हाई फैट, शुगर एंड सॉल्ट कहा जाता है. ये ऐसे खाने होते हैं जिसमें फैट, चीनी, नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. इनमें चिप्स, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच-फ्राइज, मोमो, कोल्ड-ड्रिंक और पैकेट बंद स्नैक्स शामिल होता है. इनमें कैलोरी भी ज्यादा होती है. जो लोग इनका रोजाना सेवन करते हैं उनका वजन तेजी से बढ़ता है. बढ़ता हुआ वजन आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई बीपी और कैंसर जैसी बीमारी की वजह बनता है.
अनहेल्दी खाने की बिक्री बढ़ी
रिपोर्ट कहती है कि भारत में तेजी से अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड के मामले बढ़ते जा रहे हैं. साल 2006 में बाजार जो 0.9 अरब डॉलर का था वो साल 2019 में बढ़ा और सीधे 37.9 अरब तक पहुंच गया. यानी 2009 से 2023 के बीच ऐसे अनहेल्दी खाने की बिक्री में 150 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.
बच्चे करते हैं जिद्द
हालांकि बच्चे ऐसा नहीं है कि खुद जाकर जंक फूड का सेवन करने लगते हैं. इसके पीछे टीवी, मोबाइल, क्रिकेट-मैच और सोशल मीडिया इनका कारण है. यहां कई विज्ञापन दिखाएं जाते हैं. रिपोर्ट कहते हैं कि टीवी चैनलों पर दिखाए जाने वाले 90 प्रतिशत फूड्स जंक फूड्स ही होते हैं. क्रिकेट मैचों के दौरान 80% से ज्यादा एड्स स्वीट ड्रिंक और अनहेल्दी खान-पान के होते हैं. 92.6% माता-पिता का मानना है कि स्कूल-कॉलेज के आसपास जंक फूड बहुत आसानी से मिल जाता है.
क्या कर रही है सरकार?
सवाल ये कि क्या सरकार कुछ कर रही है? दरअसल ICMR ने सरकार को इसके खिलाफ कुछ कदम उठाने के सुझाव दिए हैं. जैसे हेल्थ टैक्स यानी सिगरेट, शराब की तरह अधिक फैट, चीनी और नमक वाले खाने पर भारी टैक्स लगाया जाए. जिससे कि खाने की चीजें महंगी हो जाएं और लोग पौष्टिक खाना ही चुनें. इंग्रीडियंड्स को बढ़ा करना. ये भी सुझाव दिया गया है कि पैकेट पर ये साफ और कड़े शब्दों में लिखा जाए कि इस प्रोडक्ट में कितनी चीनी, फैट या फिर नमक है. स्कूलों के पास रोक दरअसल स्कूल-कॉलेज के पास जंक फूड की बिक्री, विज्ञापन पर सख्त रोक लगाई जाए.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

