Indian Pharmacopoeia Conference: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) ने शुक्रवार को हैदराबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) में एक वैज्ञानिक सम्मेलन और इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन किया. यह कार्यक्रम NIPER Hyderabad, CDSCO और IDMA Telangana Chapter के सहयोग से आयोजित किया गया.
इस सम्मेलन का मुख्य विषय था “दवाओं की क्वालिटी सुनिश्चित करने में Indian Pharmacopoeia Reference Standards और Impurity Standards की भूमिका. IPC का मुख्य उद्देश्य देश में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और सही इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. इसी दिशा में यह सम्मेलन आयोजित किया गया ताकि दवाओं में मौजूद अशुद्धियों (Impurities) और उनके मरीजों की सेहत पर पड़ने वाले असर पर गंभीर चर्चा की जा सके.
मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने में मिलती मदद
कार्यक्रम का उद्घाटन NIPER Hyderabad के डायरेक्टर प्रो. शैलेन्द्र साराफ ने किया. उन्होंने कहा कि IPC और बड़े शैक्षणिक संस्थानों के बीच इस तरह का सहयोग फार्मास्युटिकल गुणवत्ता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इससे रेगुलेटरी एजेंसियों, इंडस्ट्री और वैज्ञानिकों के बीच बेहतर संवाद और ज्ञान का आदान-प्रदान होता है. IPC के सचिव एवं वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेलवन ने कहा कि दवाओं में मौजूद अशुद्धियों की सही पहचान और वैज्ञानिक मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है. इससे दवाओं के दुष्प्रभाव कम करने और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलती है. उन्होंने कहा कि IPC मजबूत गुणवत्ता मानकों के जरिए “विकसित भारत” के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है.
सम्मेलन में IPC, CDSCO, NIPER और फार्मा इंडस्ट्री के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. CDSCO हैदराबाद के Deputy Drugs Controller के. नरेंद्रन ने भी दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में मजबूत रेगुलेटरी सिस्टम और एक समान मानकों की जरूरत पर जोर दिया. इस सम्मेलन की खास बात यह रही कि पहली बार IPC ने रेगुलेटरी एक्सपर्ट्स, वैज्ञानिकों, फार्मा इंडस्ट्री और क्लीनिकल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को एक साथ मंच पर लाकर दवाओं में अशुद्धियों के मरीजों पर पड़ने वाले असर पर चर्चा कराई. इसमें यह भी बताया गया कि दवाओं की अशुद्धियां किस तरह Adverse Drug Reactions यानी दवाओं के नुकसानदायक प्रभावों से जुड़ी हो सकती हैं. ॉ
कई अहम विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल थे:
- Indian Pharmacopoeia 2026 में नए बदलाव
- दवाओं में अशुद्धियों की पहचान और नियंत्रण
- Regulatory Compliance
- Pharmaceutical Quality Assurance
- Risk Assessment
- वैश्विक स्तर पर उभरती चुनौतियां और दवा सुरक्षा
कार्यक्रम के अंत में IPC, CDSCO, State Licensing Authorities, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, डॉक्टरों और फार्मा इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के बीच खुली चर्चा हुई। इसमें दवाओं की गुणवत्ता, जांच की आधुनिक तकनीकों, रेगुलेटरी अपेक्षाओं और लागू करने में आने वाली चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया. देशभर से आए रेगुलेटर्स, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, रिसर्चर्स और फार्मा प्रोफेशनल्स की मौजूदगी ने यह दिखाया कि IPC दवाओं की गुणवत्ता मजबूत करने और लोगों की सेहत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय रूप से काम कर रहा है.
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