Remove Glasses & Improve Eye Sight: आज के समय में चश्मा लगना बेहद आम बात हो गई है. बच्चों से लेकर युवाओं तक बड़ी संख्या में लोग मायोपिया (दूर की नजर कमजोर होना) और अन्य दृष्टि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में कई लोग चश्मे से छुटकारा पाने के लिए लेसिक सर्जरी का विकल्प चुनना चाहते हैं.
लेकिन क्या हर व्यक्ति लेसिक करा सकता है? क्या बच्चों का चश्मा हटाया जा सकता है? और कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? इन सभी सवालों के जवाब दिए फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के नेत्र रोग विभाग के प्रमुख (HOD Ophthalmology) डॉ. संजीव गुप्ता ने.
क्या हर व्यक्ति लेसिक सर्जरी करा सकता है?
डॉ. गुप्ता के अनुसार लेसिक सर्जरी केवल उन लोगों के लिए उपयुक्त होती है जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक हो और जिनका चश्मे का नंबर कम से कम एक साल से स्थिर हो. अगर किसी व्यक्ति का नंबर लगातार बढ़ रहा है, तो उसे लेसिक कराने के लिए इंतजार करना चाहिए. उन्होंने बताया कि चश्मे का नंबर माइनस (मायोपिया), प्लस (हाइपरमेट्रोपिया) या एस्टिग्मैटिज्म हो सकता है. ऐसे लोगों के लिए लेसिक एक प्रभावी विकल्प हो सकता है.
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बच्चों का चश्मा क्यों नहीं हटाया जाता?
विशेषज्ञों का कहना है कि 18-19 साल की उम्र तक शरीर और आंखों का विकास जारी रहता है. ऐसे में कम उम्र में लेसिक कराने पर भविष्य में नंबर दोबारा बदल सकता है. इसी वजह से बच्चों और किशोरों में लेसिक सर्जरी नहीं की जाती.
लेसिक से पहले कौन-कौन से टेस्ट जरूरी होते हैं?
लेसिक कराने से पहले मरीज की आंखों की विस्तृत जांच की जाती है. इसमें शामिल हैं:
- आंखों का नंबर मापना
- आंखों का प्रेशर जांचना
- रेटिना (आंख के पीछे का पर्दा) की जांच
- कॉर्नियल टोपोग्राफी
- कॉर्निया की मोटाई (पैकीमेट्री) जांचना
डॉक्टरों के मुताबिक यदि कॉर्निया बहुत पतला हो तो लेसिक नहीं की जाती क्योंकि इससे भविष्य में जटिलताएं हो सकती हैं.
लेसिक सर्जरी कैसे की जाती है?
लेसिक एक डे-केयर प्रक्रिया है. इसमें मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती. आंख में सिर्फ एनेस्थेटिक ड्रॉप्स डाली जाती हैं और पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है. मरीज उसी दिन घर जा सकता है.
लेसिक की नई तकनीकें भी उपलब्ध
समय के साथ लेसिक तकनीक में भी बदलाव आया है. अब पारंपरिक लेसिक के अलावा कई आधुनिक विकल्प मौजूद हैं:
- फेम्टो लेसिक
- कंटूरा लेसिक
- स्माइल (SMILE)
- स्माइल प्रो (AI Assisted Technology)
डॉक्टरों के अनुसार नई तकनीकें अधिक सटीक और कस्टमाइज्ड रिजल्ट देने में मदद करती हैं.
बच्चों में बढ़ रहा है चश्मे का खतरा
कोविड महामारी के बाद बच्चों में मायोपिया के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है. इसका बड़ा कारण बढ़ता स्क्रीन टाइम और कम होती आउटडोर गतिविधियां हैं. डॉ. गुप्ता का कहना है कि बच्चों को मोबाइल, लैपटॉप और टीवी पर ज्यादा समय बिताने के बजाय आउटडोर खेलों में शामिल होना चाहिए. इससे आंखों को दूर देखने का अभ्यास मिलता है और मायोपिया बढ़ने का खतरा कम हो सकता है.
क्या आई एक्सरसाइज से चश्मा उतर सकता है?
डॉक्टरों ने साफ किया कि आई एक्सरसाइज से चश्मे का नंबर कम नहीं होता. यह एक मिथक है. हालांकि कुछ विशेष मामलों में, जहां आंखों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं, वहां डॉक्टर एक्सरसाइज की सलाह दे सकते हैं.
कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
कई लोग चश्मे की जगह कॉन्टैक्ट लेंस पहनना पसंद करते हैं. लेकिन इनके इस्तेमाल में लापरवाही आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकती है.
जरूरी सावधानियां:
- लेंस लगाने से पहले हाथ अच्छी तरह साफ करें.
- लेंस को नियमित रूप से साफ करें.
- लेंस सॉल्यूशन समय-समय पर बदलें.
- आंखों में संक्रमण होने पर लेंस न पहनें.
- कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर कभी न सोएं.
- लेंस पहनते समय आंखों को ज्यादा न रगड़ें.
क्या कलर वाले कॉन्टैक्ट लेंस सुरक्षित हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार कलर कॉन्टैक्ट लेंस भी सुरक्षित होते हैं, बशर्ते उनका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए.
लेसिक सर्जरी की कीमत कितनी होती है?
लेसिक की लागत तकनीक और अस्पताल के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. सामान्य तौर पर इसकी कीमत दोनों आंखों के लिए लगभग 40 हजार रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक हो सकती है.
40 साल के बाद क्या चश्मा हटाया जा सकता है?
अगर व्यक्ति की दूर की नजर कमजोर है और आंखें अन्यथा स्वस्थ हैं, तो 40 वर्ष के बाद भी लेसिक कराई जा सकती है. हालांकि 40 साल के बाद आने वाले पढ़ने के चश्मे (Presbyopia) का अभी पूरी तरह सफल इलाज उपलब्ध नहीं है. इस क्षेत्र में लगातार रिसर्च जारी है.
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