Lipoprotein a and Heart Disease: कई बार कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट नॉर्मल आ जाने के बाद लोग निश्चिंत हो जाते हैं. उन्हें ये भरोसा हो जाता है कि रिपोर्ट नॉर्मल आई हैं अब उन्हें किसी तरह की बीमारी नहीं होगी. लेकिन एक रिसर्च सामने आई जिसमें खुलासा हुआ है नॉर्मल रिपोर्ट सामने आने के बाद भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता है. बताया गया कि अब भी आप हार्ट डिजीज या फिर स्ट्रोक की चपेट में आ सकते हैं.
दरअसल जारी हुई रिपोर्ट में जानकारी मिली की हमारे ब्लड में एक ऐसा फैट होता है. इस फैट को लिपोप्रोटीन (a) या फिर Lp(a) कहा जाता है. यही फैट हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकता है. वहीं ये रिसर्च नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा की गई तीन बड़ी स्टीज के बाद सामने आई. वहीं इसके रिजल्ट्स SCAI यानी साइंटिफीक सेशंस 2026 में भी पेश किए गए हैं.
20 हजार लोगों पर की गई स्टडी
वहीं ये स्टडी करीब 20 हजार लोगों पर की गई है. अब ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर ये Lp(a) है क्या? तो बता दें कि ये एक ऐसा कण है जो खून में पाया जाता है. ये LDL जो बैड कोलेस्ट्रॉल होता है उसकी तरह दिखाई देता है. Lp(a) में मौजूद एक्सेसिव प्रोटीन दिल और ब्लड वेसेल्स के लिए अधिक खतरनाक बनाता है. हालांकि एक्सपर्ट्स कहना है कि ये समस्या किसी को नहीं होती. क्योंकि ये समस्या अधिकतर उनमें देखी जाती है जिनका पहला कोई बैकग्राउंड रहा हो. यानी ये जेनेटिक प्रॉब्लम है. लेकिन इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते. इस कारण से लोग ये समझ नहीं पाते कि उनके शरीर में इसका लेवल काफी बढ़ा हुआ है.
30 प्रतिशत अधिक था स्ट्रोक का खतरा
अब बात करें रिसर्च की तो 40 साल से अधिक उम्र वाले लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए. उनके सैंपल्स पर रिसर्च की गई. इस रिसर्च में करीब 4 साल तक लोगों की हेल्थ को ट्रैक किया गया. जिसके बाद स्टडी में सामने आया कि जिन लोगों में Lp(a) का स्तर सबसे अधिक रहा उनमें हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी बीमारी का खतरा लगभग 30 प्रतिशत तक अधिक था. वहीं हार्ट से संबंधित बीमारी का खतरा करीब 50 प्रतिशत तक बढ गया, स्ट्रोक का खतरा 65 प्रतिशत तक अधिक पायाद गया. हालांकि रिसर्च में यह भी सामने आया कि हाई Lp(a) का सीधा संबंध हार्ट अटैक से उतना मजबूत नहीं दिखा, लेकिन स्ट्रोक और अन्य दिल की बीमारियों का खतरा जरूर बढ़ा.
पकाल के प्रोसेस के तेज करता है
वहीं रिसर्च में जानकारी मिली कि ये एक ऐसे कण हैं जो व्यक्ति के ब्लड वेसल्स में सूजन को बढ़ा देता है. नसों में प्लाक जमा होने के प्रोसेस को तेज करता है. नतीजा खून का फ्लो अफेक्ट होता है और दिल पर प्रेशर बढ़ने लगता है. अगर बात करें कि आखिर कैसे Lp(a) को चेक कर सकते हैं, तो इसके लिए आपको अधिक कुछ नहीं करना सिर्फ ब्लड टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है. टेस्ट रिपोर्ट में अगर किसी व्यक्ति का Lp(a) लेवल अधिक निकलता है तो उसे LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अपने लाइफस्टाइल पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है.
दिल को सेफ रखने में होगी मदद
वहीं अगर आप हेल्दी डाइट अपनाते हैं, रोजाना एक्सरसाइज करते हैं, स्मोकिंग से दूरी बनाते हैं, वजन को कंट्रोल रखते हैं तो दिल को सुरक्षित रखने में काफी मदद मिल सकती है. एक्सपर्ट्स का भी ऐसा मानना है कि फ्यूचर में Lp(a) को कम करने के लिए नई दवाएं भी मार्केट में आ सकती हैं. लेकिन फिलहाल समय रहते जांच या सही लाइफस्टाइल अपनाना सबसे बड़ा बचाव है.
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