Sehat Ki Khabar Fit Rahe India: नमस्कार फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट्स में आपका स्वागत है. PCOS का अब नाम बदल दिया गया है. क्या है इस नाम बदलने के पीछे का कारण इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में. फेफड़ों की किन बीमारी में जा सकती जान जानेंगे सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में. महंगे प्रोडक्ट्स से क्या स्किन में आता है ग्लो जानेंगे सेहत की खबर के तीसरे और आखिरी सेगमेंट में.
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पहले सेगमेंट में जानेंगे क्यों बदला गया PCOS का नाम?
अब से महिलाओं को होने वाली गंभीर बीमारी को PCOS के नाम से नहीं बल्कि PMOS के नाम से जाना जाएगा. इस बीमारी के नाम में बड़ा बदलाव किया गया है. महिलाओं की हेल्थ से जुड़ी एक ऐसी Condition जिसका सामना आज के समय में लाखों लड़कियों और महिलाओं कर रही हैं. बात करें नाम बदलने के कारण की तो इसपर एक्सपर्ट्स का कहना है कि PMOS में सिर्फ M यानी मेटाबॉलिक को जोड़ा गया है.
डॉक्टर्स और रिसर्चर्स का कहना है कि PCOS नाम इस बीमारी को पूरी तरह एक्सप्लेन नहीं कर पाती. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) को सुनकर मरीज को ऐसा लगता था कि ये एक ऐसी बीमारी है जिसमें ओवरी में सिस्ट बनते हैं. लेकिन ऐसा नहीं होता यानी हर मरीज के साथ ऐसा नहीं होता है. इस बीमारी में महिलाओं के शरीर में हार्मोनल और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां ज्यादा अहम होती हैं.
हर महिला में सिस्ट नहीं बनते हैं, लेकिन पुराने नाम से ऐसा लगता था कि ओवरी में सिस्ट होंगे ही. इसलिए अब नया नाम पीएमओएस रखा गया है. इसमें मेटाबॉलिक इसलिए जोड़ा गया है क्योंकि इस बीमारी में महिलाओं के शरीर में मेटॉबॉलिक गड़बड़ी होना एक बड़ी समस्या है. लेकिन फिर भी उन्हें इस बीमारी के Symptoms दिखाई देते हैं. यानी इस Condition का Connection सिर्फ Ovary तक सीमित नहीं… बल्कि पूरे Metabolism और Hormonal Balance से जुड़ा होता है.
दूसरे सेगमेंट में जानेंगे फेफड़ों से संबंधित परेशानी के बारे में
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया. इसके बाद से एक बार फिर से लंग्स से जुड़ी बीमारियों की गूंज सुनाई दे रही है. दरअसल प्रतीक यादव का निधन फेफड़ों से जुड़ी बीमारी के कारण हुआ. जबकि वो काफी बड़े फिटनेस फ्रीक थे. इसी कारण से फेफड़ों से जुड़ी बीमारी चर्चा में आ गई है.
डॉक्टर्स का मानना है कि फेफड़ों से संबंधित कई बीमारियां होती हैं जो शुरुआत में तो मामूली लगती है, लेकिन समय रहते अगर इसका इलाज न मिले तो ये जानलेवा भी साबित हो सकती है. फेफड़ों की जुड़ी बीमारियों में शामिल है क्रॉनिक ऑब्सट्रिक्टिव पलमोनेरी डिजीज यानी COPD, पलमोनेरी फ्राइब्रोसिस, सीवियर अस्थमा, न्यूमोनिया, ट्यूबरक्लोसिस, लंग कैंसर, पलमोनरी हाइपरटेंशन. ये सभी फेफड़ों की बीमारी में शामिल हो सकते हैं. वहीं इन बीमारियों के शुरुआती संकेत होते हैं सांस फूलना, लगातार खांसी आना, सीने में दर्द होना, बलगम आना, थकान और कमजोरी आना, वजन कम होना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना. लोग इन्हें काफी सामान्य लक्षण समझकर या फिर मौसम का असर समझकर इग्नोर कर देते हैं. लेकिन इस तरह की लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है.
तीसरे सेगमेंट में जानेंगे डेली स्किन केयर रूटीन के बारे में
आपकी कुछ आदतें आपकी स्किन को हल्दी रख सकती है और आपकी यही आदते स्किन को नैचुरली ग्लो लाने में मदद करती है. यानी आपकी स्किन का खराब होना आपकी रोज की आदत पर निर्भर करता है. हालांकि ग्लो लाना हो तो लोग कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर लेते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स हेल्दी स्किन के लिए डेली रूटीन को सबसे बड़ा जिम्मेदार मानते हैं.
अगर आप रोजाना अपनी स्किन की सही तरीके से देखभाल करें तो कई तरह की परेशानी पिंपल्स, ड्रायनेस, डलनेस और प्रीमैच्योर एजिंग जैसी समस्याओं से काफी हद तक बच सकते हैं. डेली स्किन केयर रूटीन इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि हमारी स्किन रोजाना डस्ट, पॉल्यूशन, सनलाइट, पसीने के संपर्क में आती है. ऐसे में अगर स्किन को सही तरह से आप प्रोटेक्ट और क्लीन नहीं करते तो आपकी स्किन डैमेज भी हो सकती है.
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