West Bengal Mid-Day Meal: पश्चिम बंगाल में इन दिनों अंडों पर राजनीति शुरू हो चुकी है. दरअसल बंगाल में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने मिड-डे-मील से अंडों को हटाने का बड़ा फैसला लिया है. साफ शब्दों में कहा जाए तो अब मिड-डे मील से अंडे गायब कर दिए गए हैं. बच्चे अब स्कूल में अंडों का सेवन नहीं कर पाएंगे.
हालांकि अंडों में प्रोटीन का अच्छा सोर्स मौजूद होता है. यही कारण है कि इसपर विवाद जारी है जुबानी रार चालू है कि आखिर मिड-डे-मील में बच्चों को अंडा देना चाहिए या फिर नहीं. वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बंगाल की शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने मिड-डे मील का जिम्मा इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) को दे दिया है और इस्कॉन ने मेन्यू से अंडा हटाकर पूरा मेन्यू वेजिटेरियन कर दिया है.
अंडा माना जाता है प्रोटीन का अच्छा सोर्स
बहस इसलिए की जा रही है, क्योंकि अंडों को प्रोटीन का काफी अच्छा सोर्स माना जाता है. लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि दाल, पनीर, टोफू या फिर सोयाबीन इत्यादी से प्रोटीन मिल सकता है. इसलिए इसे न भी शामिल किया जाए तो फर्क नहीं. लेकिन एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अंडा जो है उसे किसी भी चीज से आप रिप्लेस नहीं कर सकते हैं. जैसे पनीर, दूध या फिर किसी अन्य चीज से इसे नहीं रिप्लेस कर सकते हैं. अंडे का सेवन बच्चे के दिमाग के लिए भी काफी अहम माना जाता है.
दरअसल अंडे को रिप्लेस करके आप अगर प्रोटीन खिलाना शुरू करेंगे तो वो सही तरीका नहीं होगा. क्योंकि आपको अंडे के बराबर का ही प्रोटीन यानी उतनी ही मात्रा में प्रोटीन का सेवन करवाना होगा. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हर किसी के लिए वो संभव नहीं है. यही वजह थी कि स्कूलों में बच्चों को हफ्ते में दो बार अंडा दिया जाता था. जिससे कि उन्हें प्रोटीन मिल जाता था.
सरकार ने क्या कहा?
इसपर सरकार का भी संदेश सामने आया है. सरकार का कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण के लिए एक ऑप्शनल मॉडल पर काम कर रही है. साथ ही इस्कॉन काफी अच्छा खाना बनाता है. लेकिन अगर इससे कोई आपत्ति है तो हरे कृष्णा कहने की जरूरत नहीं कोई जबरदस्ती नहीं करेगा. साथ ही सभी को अच्छा खाना मिलेगा. सरकार का कहना है कि हम जो वादा करते हैं, सोच समझकर करते हैं साथ ही उसे अच्छे से निभाते भी हैं.
वेजिटेरियन डायट में नहीं प्रोटीन?
अब ऐसा नहीं है कि वेजिटेरियन डायट में प्रोटीन का सोर्स नहीं होता. सोया में भी अच्छा सोर्स होता है. क्योंकि ये कुछ उन प्लांट फूड्स में से एक हैं जिसमें सभी नौ जरूरी अमीनो एसिड मौजूद होते हैं. जिससे प्रोटीन का कम्प्लीट सोर्स बनाता है. पनीर हाई-क्वालिटी डेयरी प्रोटीन देता है, जबकि दालें भारतीय घरों में न्यूट्रिशनल चीज़ों में से एक हैं. लेकिन कम्प्लीट प्रोटीन होने का मतलब यह नहीं है कि सोया न्यूट्रिशन के मामले में अंडे जैसा है. प्लांट प्रोटीन आमतौर पर एनिमल प्रोटीन की तुलना में कम पचते हैं, जिसका मतलब है कि शरीर अमीनो एसिड को उतने अच्छे से एब्जॉर्ब और इस्तेमाल नहीं कर सकता. इससे भी ज़रूरी बात यह है कि अंडे न्यूट्रिएंट्स का एक ऐसा पैकेज देते हैं जो प्रोटीन से कहीं ज़्यादा होता है.
अंडा क्यों जरूरी है?
क्या आप जानते हैं कि एक अंडे में विटामिन B12, विटामिन डी, आयोडीन और आसानी से मिलने वाला आयरन मौजूद होता है. ये माइंड के डेवलपमेंट, याददाश्त और नर्वस सिस्टम के काम करने के लिए बहुत ही जरूरी न्यूट्रिएंट माना जाता है. लेकिन सोया और दालों में ये न्यूट्रिएंट्स या तो नहीं होते या बहुत कम मात्रा में होते हैं.
इसका मतलब है कि अंडे की जगह सोयाबीन या पनीर लेना कोई आसान तरीका नहीं है. एक जैसा न्यूट्रिशनल प्रोफ़ाइल पाने के लिए, खाने में कई तरह की चीज़ें मिलानी पड़ती हैं और कुछ मामलों में, फोर्टिफाइड चीज़ों पर निर्भर रहना पड़ता है. जो हेल्दी एडल्ट अलग-अलग तरह की डाइट लेते हैं, उनके लिए इस तरह की डाइट शायद मुश्किल न हो. लेकिन जो बच्चे अपने रोज़ के न्यूट्रिशन के एक बड़े हिस्से के लिए स्कूल के एक ही खाने पर निर्भर रहते हैं, उनके लिए हर न्यूट्रिएंट मायने रखता है.
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