Tetanus Injection: किसी को लोहे युक्त चीज़ों से चोट लग जाए तो कहा जाता है कि टिटनेस ना हो जाए तो इसके लिए टिटनेस का टीका तुंरत प्रभाव से लगवा लें. लेकिन क्या आपको पता है कि यही टीका जो जान बचाने के काम आता है. वहीं जान भी ले सकता है.
दरअसल नासिक से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां 17 साल बच्ची को टिटनेस का टीका लगाया गया तो कुछ मिनट के बाद ही उसने चक्कर आने की शिकायत की. उसके बाद वह सड़क पर गिर गई और जिला सिविल हॉस्पिटल पहुंचने पर उसे मृत घोषित किया गया. इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह का ट्रेंड चल रहा है. फिलहाल मामले में विस्तृत जांच की जा रही है. एक स्पेशल निगरानी टीम इस बात को पता लगाने में जुटी की कि क्या वाकई टिटनेस टीका के कारण बच्ची की मौत हुई या फिर इसके पीछे अन्य कोई कारण है.
क्या है टिटनेस?
बता दें कि टिटनेस की बीमारी ‘क्लोस्ट्रीडियम टेटानी’ (Clostridium tetani) नाम के बैक्टीरिया के कारण होता है. इसके जीवाणु मुख्य रूप से मिट्टी, धूल, और जंग लगे लोहे पर पाए जाते हैं.
क्या है पूरा मामला?
महाराष्ट्र के नासिक शहर में एक टीकाकरण शिविर में 17 साल की बच्ची को टिटनेस का टीका लगाया गया. जिसके बाद उसकी मौत ने टिटनेस टीका पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए. यह मामला खुटवडनगर क्षेत्र की है, जहां नगर निगम की ओर से नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा था. वह अपने पिता के साथ टीका लगवाने के लिए शिविर में पहुंची थी. यहां टीका लगवाने के कुछ मिनट बाद उसे चक्कर आया और वह सड़क पर गिर पड़ी. इसके बाद उसे तुरंत प्रभाव से अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
कब-कब लगवाया जाता है टिटनेस का टीका?
बच्चों को टिटनेस का इंजेक्शन जन्म से लेकर 15-16 साल की उम्र के बीच कई चरणों में लगाया जाता है. सामान्य चोट या दुर्घटना के समय दिए जाने वाले बूस्टर डोज के अलावा, नियमित टीकाकरण (रूटीन इम्यूनाइजेशन) के तहत इसका शेड्यूल इस प्रकार है.
बचपन का टीकाकरण: यह टीका मुख्य रूप से 2, 4 और 6 महीने की उम्र में लगाया जाता है (DPT या DTaP टीके के रूप में हैं.
बूस्टर डोज
- 15 से 18 महीने की उम्र में.
- 4 से 6 साल की उम्र में.
- 10 साल की उम्र में (Td या टिटनेस और डिप्थीरिया का टीका).
- 16 साल की उम्र में (Td बूस्टर).
चोट लगने पर टिटनेस इंजेक्शन (आपातकालीन स्थिति)
वहीं अगर किसी को भी कोई गहरी या गंदी चोट (जंग लगे लोहे से या मिट्टी में) लग जाती है, तो चोट लगने के 24 से 48 घंटे के भीतर टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना ज़रूरी होता है. लेकिन अगर बच्चे का नियमित टीकाकरण समय पर हुआ है, तो चोट लगने पर अलग से इंजेक्शन लगवाने की ज़रूरत नहीं पड़ती है. फिर भी, यदि आखिरी बूस्टर डोज को 5 साल से अधिक का समय बीत गया हो, तो डॉक्टर की सलाह पर टीका लगवाया जा सकता है.
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