Risk of Myopia In Children: आजकल हर बच्चे के हाथ में आपको मोबाइल फोन दिखाई दे जाएगा. पेरंट्स ऐसा बच्चों को बिजी रखने के लिए करते हैं. ताकि उनके जरूरी काम निपट जाए. लेकिन इसके कारण छोटे बच्चों को कम उम्र में ही चश्मा लग जाता है. ऐसे में बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना काफी जरूरी हो जाता है क्योंकि फ्यूचर में ये समस्या गंभीर बीमारी का भी कारण बन सकती है.
इन गंभीर बीमारी में मायोपिया नाम की बीमारी भी शामिल है. मायोपिया यानी दूर की चीजें धुंधली दिखना जैसी समस्या हो सकती है. लेकिन अब इसे लेकर हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बड़ा अलर्ट जारी किया है. दरअसलऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी यानी All India Ophthalmological Society (AIOS) ने बच्चों में इस बीमारी को रोकने के लिए और इसके इलाज को लेकर इंस्ट्रक्शनंस जारी किए हैं.
ये चीजें डाल रही आंंखों पर गंभीर असर
AIOS की साइंटिफिक कमेटी की चेयरमैन डॉक्टर नम्रता शर्मा ने बच्चों में बढ़ती हुई इस समस्या पर चिंता जताई और कहा कि मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन के बढ़ते हुए इस्तेमाल ने बच्चों की आंखों पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है. दरअसल आजकल पढ़ाई भी मोबाइल या लैपटॉप के जरिए ऑनलाइन की जा रही है. इसलिए बच्चें इन गैजेट्स पर अधिक निर्भर हो चुके हैं. नतीजा गेमिंग करना वीडियो देखने में अधिक समय बिता देना. इस तरह की प्रॉब्लम्स होती है. इसका असर आंखों पर अधिक पड़ता है.
रिपोर्ट्स बताती है कि शहरों में स्कूल जानें वाले बच्चों में मायोपिया की समस्या तेजी से बढ़ रही है. आंकड़ों की बात करें तो भारत के शहरी इलाकों में लगभग 14 प्रतिशत बच्चे इस समस्या का शिकार हैं. ऐसा नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्र में इसका प्रभाव नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. हालांकि इसे लेकर 13 शहर और 12 राज्यों के स्कूलों में स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी चलाए गए हैं. इन कार्यक्रम के जरिए एक लाख से अधिक बच्चों का टेस्ट किया गया. नतीजों में पता चला कि 13.6 प्रतिशत बच्चों में मायोपिया की समस्या पाई गई. वहीं 27 प्रतिशत को आंख की अन्य समस्या पाई गई.
मायोपिया क्या होता है?
अब जान लेते हैं कि आखिर ये मायोपिया क्या होता है, तो बता दें कि ये एक ऐसी कंडिशन होती है जिसमें पास की चीजें तो साफ दिखाई देती है लेकिन दूर का सभी धुंधला दिखाई देता है. आसान शब्दों में कहें तो पास की नजर ठीक होती है और दूर की खराब. लेकिन इसके कुछ स्टेज है जैसे शुरुआत में ये केवल चश्मे तक ही सीमित रहती है. लेकिन अगर आपने ध्यान नहीं दिया तो ये आंखों की गंभीर में भी बदल सकती है. हालांकि AIOS ने इसे लेकर एक खास अभियान शुरू किया जिसमें बच्चों में इस बीमारी की जल्दी पहचान और आंखों को सुरक्षित रखने का संदेश जारी किया. वहीं एक्सपर्ट्स ऐसा मानते हैं कि अगर मायोपिया का ट्रीटमेंट न किया जाए तो ये आगे चलकर
- रेटिना डिटैचमेंट
- ग्लूकोमा, मोतियाबिंद
- परमानेंट विजन लॉस का कारण बन सकता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बच्चों को ये नहीं समझ आता कि उनकी नजर कमजोर हो रही है. इसलिए उनके पेरंट्स को और शिक्षकों को ध्यान रखना चाहिए. हालांकि इसपर AIOS की ओर से गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं.
AIOS ने जारी की गाइडलाइंस
AIOS की गाइडलाइंस के अनुसार आप कुछ सुझाव को मानते हुए बच्चों की आंखों को सुरक्षित रख सकते हैं. जैसे हर साल बच्चों की आंखों की जांच करवाना, मोबाइल स्क्रीन टाइमिंग को लीमिट करना, पढ़ाई करते समय पर्याप्त रोशनी रखना, किताब और स्क्रीन से दूरी सही से बनाए रखना, बाहर बच्चों को कुछ देर खेलने के लिए भेजना. अंत में 20-20-20 नियम अपनाना. आनी हर 20 बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट की दूरी पर देखना. ये तरीका आंखों की मसल्स को एक्सरसाइज करवाने में काफी कारगर हैं. इससे नजरें भी जल्दी कमजोर नहीं होती.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

