Screen Time For Babies: आजकल पेरेंट्स अपने बच्चों को सुलाने के लिए खिलाने के लिए यहां तक की उन्हें बिजी रखने के लिए मोबाइल फोन थमा देते हैं. हालांकि ये आदत काफी खराब है. इसपर एक रिसर्च हुई और जानकारी सामने आई कि हर 10 में से 1 बच्चा स्क्रीन देखते हुए सोता है.
जानकारी के लिए बता दें कि ये रिसर्च एस्टन यूनिवर्सिटी और अन्य ब्रिटिश यूनिवर्सिटी द्वारा की गई है. उन्हीं की रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है. अब ऐसे में वो पेरेंट्स भी इस रिसर्च पर विश्वास करेंगे जो अपने बच्चों को बिजी रखने के लिए मोबाइल फोन थमा देते हैं.
शाम का खेलना हुआ बंद
पहले के समय में लोग बच्चों का स्क्रीन टाइम कम रखते थे. लेकिन आज के समय में बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी अधिक हो चुका है. नतीजा बच्चे शाम को दोस्तों के साथ भी खेलने बाहर नहीं निकलते. जिससे उनकी पर्सनालिटी पर भी गहरा असर पड़ रहा है. रिसर्च में भी जानकारी आई कि ये आदत बच्चों की हेल्थ के लिए सही नहीं है.
डिजिटल जुड़ाव की ओर बढ़ रहे बच्चे
वहीं ये आदत ये दर्शाता है कि बच्चे धीरे-धीरे डिजिटल जुड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं. रिसर्च में जिंदगी के शुरुआती ‘1001 महत्वपूर्ण दिनों’ (गर्भावस्था से दो साल की उम्र तक) का विशेष महत्व बताया गया है, जो कि शिशु के मानसिक-शारीरिक विकास के लिए जरूरी है. वहीं रिसर्चर्स के अनुसार बच्चों का माइंड दुनिया के साथ अपने एक्सपीरिएंस बातचीत के आधार पर हरेक सेकंड दस लाख नए कनेक्शन बनाता है.
बच्चों के विकास में बन रहा बाधा
दरअसल जब बच्चे स्क्रीन के साथ अधिक जुड़ते हैं, तो ये उनके डेवलपमेंट में असर डालता है. वहीं स्क्रीन में अधिक समय बिताने से बच्चों को मोटापा, मायोपिया यानी पास के विजन में कमजोरी, नींद की कमी, बिहेवियर चेंज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. रिसर्च में भी ये कंफर्म हुआ है कि स्क्रीन में अधिक समय बिताने से कई तरह के फिजिकल चैलेंज और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
मोटापा क्यों बढ़ता है
स्क्रीन टाइम से मोटापे का क्या लेना देना? अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो बता दें कि ये गलत है. क्योंकि जब अधिक समय तक स्क्रीन में लगे रहा जाे तो बच्चे एक ही जगह बैठे रहते हैं. उसी जगह बैठे रहना. जिससे उनके खेल-कूद में काफी कमी आती है. यही कारण बनता है वजन बढ़ने का और मोटापे का.
आंखों की समस्याएं कर सकती परेशान
क्योंकि ज्यादा देर तक गैजेट्स देखना आंखों पर स्ट्रेस डालता है. तेज रोशनी हमारी आंखों को चुभती है. ऐसे में जब बच्चा कंटीन्यूस बिना पलकें झपकाएं लगातार मोबाइल देखते हैं तो उनकी आंखों पर अधिक प्रेशर पड़ता है. नतीजा आंखों की समस्या पर असर पड़ता है. इसका रिजल्ट होता है माटोपिया यानी पास की नजर कमजोर होना आंखों में सूखेपन की समस्या हो सकती है.
स्लीप साइकल में बदलाव होना
इस तरह की आदतें बच्चों की स्लीप साइकल पर काफी अफेक्ट डालती है. क्योंकि अधिक स्क्रीन टाइम देखकर सोने से नींद डिसटर्ब होती है. दरअसल स्क्रीन से ब्लू लाइट निकलती हैं यही ब्लू लाइट हमारी नींद के हार्मोन मेलाटोनिन के बनने को रोकती है. नतीजा बच्चों को सोने में काफी तकलीफ होती है.
सीखने में देरी की समस्या
अधिक समय तक स्क्रीन के आगे रहने से कई समस्या होने लग सकती है. इसमें कोई भी लैंगुएज सीखना भी शामिल है. दरअसल लगातार स्क्रीन के सामने रहना किसी से कॉन्टैक्ट न करना. ये सब आदते इंसानों से दूर करती जाती है. जिससी सीखने और समझने की एबिलीटी काफी कम होती जाती है. जिसके कारण बच्चों के मानसिक विकास और उनके डेवलपमेंट में काफी कमी देखी जाती है. ऐसे बच्चे जब बाहर खेल कूद के लिए जाते हैं तो उन्हें उस खेल को सीखने या फिर किसी भी नई चीज को सीखने में देरी होती है. फोकस की कमी होती है.
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