Sehat Ki Khabar Fit Rahe India: नमस्कार फिट रहे इंडिया की लेटेस्ट अपडेट में आपका स्वागत है. 25 के बाद महिलाओं के लिए कुछ जरूरी टेस्ट हैं जिन्हें उन्हें करवा लेना चाहिए. इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के पहले सेगमेंट में. शरीर क्यों पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता. ऐसा किस कंडिशन के कारण होता और क्यों ये जानेंगे सेहत की खबर के दूसरे सेगमेंट में. हंतावायरस पर WHO ने जारी किया बड़ा अलर्ट. क्या है वो अलर्ट इसपर बात करेंगे सेहत की खबर के तीसरे और आखिरी सेगमेंट में चलिए शुरू करते हैं.
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पहले सेगमेंट में जानेंगे महिलाओं को करवा लेने चाहिए ये टेस्ट
आजकल महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ओवेरियन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. आज वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे के रूप में मनाया जा रहा है. ऐसे में इसके प्रति जाग्रुक रहना बहुत जरूरी हो जाता है. पहले के समय में कैंसर के मामले 40 से 50 साल की उम्र के बाद ही देखे जाते थे. लेकिन अब खराब लाइफस्टाइल के कारण कम उम्र वाली महिलाएं जैसे 25 से 30 साल के उम्र की महिला भी इसका शिकार हो रही हैं. युवतियां इसका शिकार हो रही हैं. कई अधिक केस इसके सामने आ रहे हैं.
हालांकि अगर समय रहते कैंसर को डिटेक्ट कर लिया जाए तो इसका इलाज कर पाना संभव होता है. साथ ही मरीज की जिंदगी भी बचाई जा सकती है. महिलाओं में कैंसर को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि 25 साल की उम्र के बाद उन्हें अपनी हेल्थ को लेकर और भी अधिक अलर्ट हो जाना चाहिए. नियमित हेल्थ चेकअप करवाने चाहिए. कुछ जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट करवा लेने चाहिए. जिससे कि कैंसर का खतरा समय रहते पता लगाया जा सके. आपको बता दें कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से और अधिक पाए जाते हैं. फिर आता है सर्वाइकल कैंसर यानी बच्चेदानी का कैंसर और ओवेरियन कैंसर के मामले भी बढ़ रहे हैं. इसलिए 25 की उम्र के बाद कुछ टेस्ट करवाना जरूरी हो जाता है.
डॉक्टरों के अनुसार महिलाओं को 25 साल की उम्र के बाद अपनी हेल्थ को लेकर ज्यादा जागरूक हो जाना चाहिए. इस उम्र से नियमित हेल्थ चेकअप और कुछ जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने चाहिए ताकि कैंसर का खतरा समय रहते पता चल सके. ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाता है. इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर यानी बच्चेदानी के मुंह का कैंसर और ओवेरियन कैंसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं.
दूसरे सेगमेंट में जानेंगे क्या होता है थैलेसीमिया?
हर साल 8 मई को वर्ल्ड थैलेसीमिया डे के रूप में मनाया जाता है. ये एक जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है. यानी माता-पिता के जरिए ही ये बच्चे में ट्रांसफर होता है. ये एक ऐसी कंडिशन होती है जहां बॉडी में पर्पाप्त मात्रा में ब्लड नहीं बन पाता. खून की कमी होने लगती है. हीमोग्लोबीन हमारे खून का वो अहम हिस्सा होता है जो शरीर के हर ऑर्गन्स तक ऑक्सीजन पहुंचाने में बॉडी की मदद करता है. लेकिन अगर इसकी कमी होने लगे तो शरीर में रेड ब्लड सेल्स तेजी से खत्म होने लगती है. नतीजा मरीज एनीमीया का शिकार हो जाते हैं. गंभीर मामलों की अगर बात की जाए तो थैलेसीमिया वाले मरीजों को अपनी लाइफ में बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए इसका समय रहते इलाज मिलना बहुत जरूरी होता है. नहीं तो स्थिती और भी गंभीर हो सकती है.
तीसरे सेगमेंट में जानेंगे हंतावायरस पर WHO के अलर्ट के बारे में
हाल ही में अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर हंतावायरस फैलने से 3 लोगों की मौत हुई थी. इस मामले ने हड़कंप मचा दिया है. अब दुनियाभर में इस वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है. क्योंकि लोग इसे कोविड 19 से जोड़ते हुए देख रहे हैं. लोगों का मानना है कि ये कोई नई महामारी का ही हिस्सा है. लेकिन WHO का कहना है कि ऐसा नहीं है फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये वायरस गंभीर नहीं है. साथ ही ये कोरोना की तरह तेजी से नहीं फैलता.
विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार हंतावायरस खासतौर पर चूहों से और दूसरे रोडेंट्स यानी कृतंक जानवरों से फैलने वाला है. यानी ये एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता. जब कोई इंसान संक्रमित चूहों के मल, पेशाब, लार या फिर गंदगी से धूल के कॉन्टैक्ट में आता है तो उसे भी इसका संक्रमण हो सकता है. यानी ये वायरस कोरोना की तरह एक इंसान से दूसरे में नहीं फैलता है. इसलिए इसे कोविड 19 जैसा समझना अभी सही नहीं है.
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