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इस देश में स्कूल और ऑफिस में सोते हैं लोग! हेल्थ के लिए मैजिक से कम नहीं

Students Sleep Break: कई बार क्लास में सोने का मन करता है. क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां लोग काम के वक्त सोते हैं.

Students Sleep Break: कुछ बच्चों को स्कूल में कितनी नींद आती है. कई बार क्लास में सोने का मन करता है. क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां स्कूलों में बच्चों को सोने की इजाजत मिलती है. जी हां यहां कुछ बच्चे लंच के बाद नैप यानी थोड़े समय के लिए सोते हैं. लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है ये एक बड़ा सवाल है. इससे क्या फायदा मिलता है. आइए जानते हैं.

जानकारी के मुताबिक बच्चों को ऐसी परमिशन इसलिए दी जाती है क्योंकि इससे फोकस बढ़ता है. माइंड फ्रेश रहता है. पढ़ाई में अच्छा परफॉर्म करने में मदद मिलती है. इसी कारण लंच के बाद बच्चों को नैप लेने की इजाजत दी जाती है. अब जान लेते हैं कि आखिर वो कौन से देश हैं जहां ऐसी परमिशन दी जाती है, तो इस देश का नाम है जापान.

दिमाग और बॉडी के लिए जरूरी

दरअसल जापान में शरीर और माइंड के लिए नींद को काफी जरूरी माना जाता है. इसी कारण से स्कूल, कॉलेज यहां तक की ऑफिस में भी कुछ देर आराम ानी नैप लेने की फैसेलिटी दी जाती है. जानकारी के मुताबिक स्कूलों में बच्चों को लंच के बाद 20 से 40 मिनट तक आराम करने की फैसेलिटी दी जाती है. हालांकि इसपर एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंच के बाद अगर थोड़ी देर के लिए सो लिया जाए. थोड़ी देर के लिए नींद पूरी कर ली जाए तो इससे फोकस को बढ़ाने में काफी मदद मिलती है. बच्चे थका-थका नहीं महसूस करते. साथ ही दोबारा से क्लास में एक्टिव महसूस करने लगते हैं. इसे लेकर जापान में कई स्कूल का ऐसा मानना है कि ऐसा करने से पढ़ाई प्रेशर नहीं लगती और बच्चे नई चीजें सीख लेते हैं.

डेस्क को बेड की तरह इस्तेमाल करते हैं

सिर्फ जापान ही नहीं बल्कि चीन में भी ऐसी सुविधा मिलती है. जहां दोपहर के समय में बच्चे आराम करने के लिए अपनी डेस्क को ही बेड की तरह इस्तेमाल करते हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आ चुकी हैं. इन्हीं वीडियो में देखा गया है, कि बच्चों को आराम के लिए तकिया यहां तक की चादर भी दी जाती है. ताकि आराम से सो पाएं. वहीं खाने के लिए भी बच्चों को अधिक समय दिया जाता है. चीन के कुछ ऐसे स्कूल हैं जहां खाने के लिए बच्चों को 1 घंटे का समय दिया जाता है. ऐसा करने से बच्चों की मेंटल हेल्थ में सुधार होता है.

सो जाए तो नहीं पड़ती डांट

ये तो सभी जानते हैं कि स्कूल में अगर क्लास के समय कोई बच्चा सो जाए तो टीचर से कितनी डांट पड़ती है. लेकिन जापान में ऐसा नहीं होता. यानी अगर गलती से कोई बच्चा क्लास के समय में सो जाए तो उसे डांट नहीं पड़ती. ये समझा जाता है कि बच्चा अधिक मेहनत कर रहा है, इसलिए उसे आराम की जरूरत है. यही कारण है कि जापान का एजुकेशन सिस्टम सिर्फ बुक्स तक सीमित नहीं रहता. वहां बच्चे कम उम्र में डिसिप्लिन, इंडीपेंडेंस और जिम्मेदारी सिखाई जाती है. इसका सीधा सा मतलब है कि बच्चे अपने कई काम खुद करते हैं जिससे उनमें कॉनफीडेंस बढ़ता है और काम के प्रति डिसिप्लिन भी बढ़ता है.

अगर बात की जाए भारत की तो फिलहाल भारत के किसी भी स्कूल में ऐसा सिस्टम लागू नहीं है. लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर इस तरह छोटे बच्चों को थोड़ी ही देर के लिए आराम की सुविधा दी जाए तो ये आराम उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. साथ ही सही तरीके से इस सुविधा को अगर लागू कर दिया जाए तो इससे बच्चों के मेंटल हेल्थ और पढ़ाई भी काफी हद तक बेहतर हो सकती है.

यह भी पढ़ें: अब कुत्ते सूंघकर करेंगे कैंसर की पहचान! इस खास प्रोजेक्ट पर हो रहा काम

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं. )

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sarthak arora Senior Sub Editor
अपनी उंगलियों से खबरों को खटाखट लिखना, और लिखने से पहले पढ़ना और समझना. इस तरह पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव पाया. कार्य जारी है और इसी तरह लिखना, पढ़ना और सीखना निरंतर जारी रहेगा.
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