Teeth Regrowth Medicine: दातों की चमक से चेहरा भी चमक उठता है. लेकिन डर रहता है कि अगर इनकी केयर न की तो ये टूट जाएंगे, जो एक न एक दिन तो होना ही है. हालांकि बाजार में कई तैयारियां है जैसे इम्प्लांट करवाना, ब्रिज या फिर नकली दांत यानी डेंचर लगवा लेना, तो खूबसूरती बनी रहती है. अब तक तो यही ऑप्शन हमारे पास रहते थे. लेकिन अब जापान ने एक कमाल कर दिखाया है.
जानकारी है कि जापान एक ऐसी दवा पर काम कर रहा है जो आने वाले समय में दातों को उगाने में मदद कर सकती है. यानी आपके टूटे हुए दातों को वापस लाने का चांस अब बढ़ गया है. वहीं ये जानकारी जैसे ही सामने आई चर्चा का विषय बन गई. इसपर खूब चर्चा होना शुरू हो गई है. लेकिन आखिर ये पॉसिबल कैसे होगा? आइए ये भी जान लेते हैं.
कैसे होगा पॉसिबल?
इसपर साइंटिस्ट मानते हैं कि इंसानों के जबड़े में दातों की एक एक्ट्रा या फिर थर्ड जनरेशन के दातों की संरचनाएं मौजूद हो सकती हैं, ये सामान्य रूप से निष्क्रिय रहती हैं. लेकिन इन दवा की मदद से इन्हें एक्टिव यानी सक्रिय करने की कोशिश की जाती है, ताकि नैचुरल रूप से नए दातों को डेवलप किया जा सके. अब आइए जान लेते हैं कि आखिर ये दवा कैसे काम करेगी?
जानकारी के मुताबिक ये फिलहाल एक्सपेरीमेंटल दवा है. जो USAG-1 नाम के प्रोटीन को ब्लॉक करती है. साइंटिस्ट का इसपर कहना है कि ये प्रोटीन हमारे दातों को बढ़ने से रोकने का काम करते हैं. अब ये दवा इसे रोकने का काम करेगी. यानी अगर ये प्रोटीन रुका तो शरीर में छिपे हुए दांत को दोबारा डेवलप करने में मदद हो सकती है. जानवरों पर किए गए परीक्षणों में इस तकनीक से नए दांत उगने के सकारात्मक परिणाम मिले हैं.
क्या इंसानों पर ट्रायल शुरू हुआ?
जापान की बायोटेक कंपनी Toregem BioPharma और शोधकर्ताओं की टीम इस दवा TRG-035 पर काम कर रही है. 2024 में इसके पहले मानव परीक्षण (Phase I Trial) शुरू किए गए थे. इस चरण का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि दवा इंसानों के लिए सुरक्षित है या नहीं. अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि इंसानों में इस दवा से नए दांत उग गए हैं, क्योंकि शुरुआती ट्रायल केवल सुरक्षा जांच के लिए थे. शोधकर्ताओं की प्राथमिकता उन बच्चों का इलाज करना है जो जन्म से कुछ स्थायी दांतों के बिना पैदा होते हैं. अगर आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो भविष्य में यह तकनीक उन लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकती है जिनके दांत उम्र बढ़ने, चोट या अन्य कारणों से गिर गए हैं.
2030 तक मिल सकता इलाज
फिलहाल यह तकनीक अभी रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल के दौर में है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं और नियामक मंजूरी मिल जाती है, तो यह उपचार 2030 के आसपास उपलब्ध हो सकता है. हालांकि अभी इसके प्रभाव और सफलता को लेकर और अध्ययन किए जाने बाकी हैं. अगर यह तकनीक सफल होती है, तो भविष्य में लोगों को नकली दांत, इम्प्लांट या डेंचर पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ सकता. शरीर के अपने दांत दोबारा उगाने की संभावना दंत चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है. हालांकि अभी इसे चमत्कारी इलाज मानना जल्दबाजी होगी, क्योंकि यह तकनीक अभी परीक्षण के शुरुआती चरणों में है.
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