BIOPSF 2026 Event: नई दिल्ली में हाल ही में एक दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इस कार्यक्रम का नाम था BIOPSF 2026. जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में कई एक्सपर्ट्स, साइंटिस्ट, किसानों से जुड़े एक्सपर्ट्स, स्टार्टअप्स और सरकारी रिप्रेजेंटेटिव ने भी हिस्सा लिया. कार्यक्रम में बायो आधारित खेती पर खूब चर्चा भी हुई. जिसका मकसद था कि इस खेती के जरिए किसान अधिक सेफ, सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल बना सके.
पहले समझ लेते हैं कि बायो-इकोनॉमी क्या होता है? इसका मतलब होता है कि ऐसे कृषि उत्पाद को तैयार करना जो नैचुरल चीजों जैसे पैधे, माइक्रोग्रामिनिज्म यानी सूक्ष्म जीवाणु से तैयार हों और जिनमें किसी तरह के कैमिकल्स का इस्तेमाल न किया गया हो. इससे क्या फायदा होगा? तो फायदा है कि ये इससे खेती में कम पॉल्यूषण पैदा होगा, मिट्टी भी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी.
आम लोगों और किसानों के लिए क्या फायदा है?
- कम जहरीले कीटनाशक: अब धीरे-धीरे ऐसे कीटनाशक और खाद विकसित हो रहे हैं जो प्राकृतिक होंगे, जिससे भोजन ज्यादा सुरक्षित होगा.
- खेती की लागत कम हो सकती है: बायो-फर्टिलाइजर और बायो-पेस्टिसाइड से किसान को महंगे केमिकल पर कम खर्च करना पड़ेगा.
- मिट्टी की सेहत बेहतर होगी: लगातार केमिकल से मिट्टी खराब होती है, लेकिन जैविक इनपुट से जमीन की उर्वरता बनी रहेगी.
- फसल की क्वालिटी सुधरेगी: फसलें ज्यादा प्राकृतिक और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होंगी.
भारत की कैसी है तैयारी?
अब इसमें भारत की तैयारी भी काफी मजबूत मानी जा रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के पास तीन ऐसी बड़ी ताकत हैं जैसे मजबूत साइंटिफिक रिसर्च, नैचुरल रिसोर्सेस और जैव विविधता की बहुत बड़ी संपदा, और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप सेक्टर है. जिसकी मदद से आने वाले समय में भारत बायो-इकोनॉमी और जैव आधारित खेती के क्षेत्र में दुनिया में एक स्ट्रांग मजबूत स्थिती बना सकती है.
आजकल नए इनोवेशन पर खास ध्यान दिया जा रहा है, जैसे प्राकृतिक कीटनाशक, जैविक खाद और पौधों की वृद्धि बढ़ाने वाले प्राकृतिक उत्पाद. हालांकि इन तकनीकों को और प्रभावी बनाने के लिए बेहतर रिसर्च और आधुनिक तकनीक की जरूरत है. इस काम में स्टार्टअप्स और वैज्ञानिक मिलकर अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिससे नई तकनीकें तेजी से किसानों तक पहुंच सकें.
भारत का लक्ष्य है
भारत का लक्ष्य है कि 2047 तक देश एक विकसित राष्ट्र बने, और इसमें बायो-इकोनॉमी बड़ी भूमिका निभा सकती है क्योंकि यह खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाएगी, किसानों की लागत कम करेगी, रोजगार बढ़ाएगी और आय में सुधार करेगी. कुल मिलाकर यह बदलाव सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के जीवन को भी बेहतर बना सकता है—खाना ज्यादा सुरक्षित होगा, खेती सस्ती और स्मार्ट बनेगी, और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचेगा.
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FAQs
Q1. बायो-इकोनॉमी क्या होती है?
बायो-इकोनॉमी प्राकृतिक संसाधनों और जैविक तकनीकों पर आधारित आर्थिक व्यवस्था है, जिसमें पर्यावरण अनुकूल उत्पाद विकसित किए जाते हैं.
Q2. बायो-पेस्टिसाइड क्या हैं?
बायो-पेस्टिसाइड प्राकृतिक स्रोतों जैसे पौधों और सूक्ष्मजीवों से बने कीटनाशक होते हैं, जो रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में कम नुकसानदायक माने जाते हैं.
Q3. किसानों को बायो-आधारित खेती से क्या लाभ होगा?
इससे खेती की लागत कम हो सकती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर रह सकती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है.

