Increasing Rate of C-Section Births in India: भारत में बच्चों की डिलिवरी को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ने नई आंकड़े जारी किए हैं. नए आंकड़े बताते हैं कि अस्पताल में उन महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है जो सी-सेक्शन की मदद से डिलिवरी करा रही हैं. वहीं इस रिपोर्ट में खास बात है कि प्राईवेट अस्पताल में सर्जरी की मदद से ज्यादा डिलिवरी की जा रही है.
बता दें कि सिजेरियन डिलीवरी यानि C-Section Delivery भी कही जाती है. इसमें बच्चे का जन्म नेचुरल तरीके से न होकर पेट और गर्भाशय को काटकर कराया जाता है. आम बोलचाल की भाषा में इसे ऑपरेशन कहा जाता है.
सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में हो रही सिजेरियन डिलिवरी
रिपोर्ट कहती है कि सरकारी हो या फिर प्राइवेट, दोनों अस्पताल में सी-सेक्शन डिलिवरी कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ गई है. रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट संस्थानों में 54.1 फीसदी डिलिवरी सिजेरियन ऑपरेशन से हुए, जबकि इससे पहले हुए सर्वे में यह आंकड़ा 47.4 फीसदी था. वहीं सरकारी संस्थानों में 16.9 फीसदी डिलिवरी ऑपरेशन की मदद से हुए. पिछली रिपोर्ट में यह आंकड़ा 14.3 फीसदी था. इन आंकड़ों से पता चलता है कि तीन साल में ये सिजेरियन डिलिवरी में 6 प्रतिशत का उछाल आया है.
सिजेरियन डिलिवरी में बंगाल आगे
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे NFHS बताते हैं कि प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन डिलिवरी के मामले बढ़े हैं. अगर ये आंकड़े राज्योंवार समझें तो पहले राज्य में पश्चिम बंगाल का प्राइवेट अस्पताल आता है. ये आंकड़ा सबसे ज्यादा 87.7 प्रतिशत है. इसके बाद तेलंगाना में ये आकंड़े 84 प्रतिशत हैं और आंध्र प्रदेश में 66 प्रतिशत हैं. वहीं असम में 81.4 प्रतिशत और ओडिशा में 76.8 प्रतिशत है. रिपोर्ट कहती है राज्य हो या फिर केंद्र शासित प्रदेश हर जगह प्राइवेट अस्पतालों में आधे से ज्यादा प्रसव ऑपरेशन से ही हो रहे हैं.
ऑपरेशन डिलिवरी पर WHO
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में सिजेरियन डिलीवरी की दर 10% से 15% के बीच होनी चाहिए. इस मानक की तुलना में पश्चिम बंगाल और देश के कई अन्य राज्यों में यह दर काफी ज्यादा है. यह एक चिंता का विषय है. सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल 27.2 प्रतिशत डिलिवरी सिजेरियन ऑपरेशन से हुए, जबकि 2019-21 में यह आंकड़ा 21.5 फीसदी था.
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