Yoga for Thyroid: आजकल थायरॉइड की समस्या काफी आम हो गई है. खासतौर पर हाइपोथायरॉइडिज्म में वजन बढ़ना, थकान, तनाव, बालों का झड़ना और मेटाबॉलिज्म धीमा होना जैसी परेशानियां देखने को मिलती हैं. ऐसे में योग शरीर और मन दोनों को बेहतर तरीके से संतुलित करने में मदद कर सकता है.
योग एक्सपर्ट सुचि मोहन के अनुसार, अगर थायरॉइड की समस्या शुरुआती स्तर पर है तो नियमित योग अभ्यास से इसे काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है. योग शरीर के हार्मोन बैलेंस, तनाव कम करने और मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद करता है.
योग से कितने समय में दिखता है असर?
थायरॉइड में योग का असर तुरंत नहीं बल्कि धीरे-धीरे दिखाई देता है. नियमित अभ्यास के करीब 3 महीने बाद कई लोगों में सुधार देखने को मिल सकता है. हालांकि यह व्यक्ति की स्थिति, TSH लेवल और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है. योग को दवाओं का विकल्प नहीं मानना चाहिए. अगर आपकी दवा चल रही है तो डॉक्टर की सलाह के बिना उसे बंद न करें.
यहां देखें पूरा VIDEO:
थायरॉइड के लिए कौन से योगासन फायदेमंद हैं?
- नेक मूवमेंट (गर्दन के व्यायाम)
थायरॉइड के लिए गर्दन की सही मूवमेंट काफी जरूरी मानी जाती है. आजकल लंबे समय तक मोबाइल देखने और बैठकर काम करने की वजह से गर्दन में अकड़न आम हो गई है.
कैसे करें:
- कमर सीधी करके बैठें.
- सांस लेते हुए गर्दन को धीरे-धीरे पीछे ले जाएं.
- सांस छोड़ते हुए ठुड्डी को आगे की तरफ लाएं.
- गर्दन को दाएं-बाएं भी धीरे-धीरे घुमाएं.
ध्यान रखें:
- कंधों को ऊपर न उठाएं.
- सिर्फ गर्दन को मूव करें.
- जितना आराम से हो उतना ही करें.
- उज्जायी प्राणायाम
उज्जायी प्राणायाम को थायरॉइड के लिए काफी उपयोगी माना जाता है क्योंकि इसमें गले के हिस्से पर हल्का दबाव और नियंत्रण आता है.
कैसे करें:
- आराम से बैठ जाएं.
- गहरी और धीमी सांस लें.
- सांस लेते और छोड़ते समय गले को थोड़ा संकुचित रखें.
- इससे हल्की समुद्र की लहर जैसी आवाज आती है.
शुरुआत में:
- 10–15 राउंड करें.
- धीरे-धीरे समय बढ़ा सकते हैं.
- अनुलोम-विलोम सही तरीके से करें
कई लोग अनुलोम-विलोम गलत तरीके से करते हैं.
सही तरीका:
- हमेशा दाएं हाथ से शुरुआत करें.
- बाएं नथुने से सांस अंदर लें.
- दाएं नथुने से सांस बाहर छोड़ें.
- फिर दाएं से सांस लें और बाएं से छोड़ें.
- एक राउंड पूरा होने पर बाएं नथुने से सांस छोड़कर खत्म करें.
ध्यान रखें:
- सांस धीरे और गहरी होनी चाहिए.
- जितना समय सांस लेने में लगाएं, कोशिश करें उतना ही समय सांस छोड़ने में लगे.
- थायरॉइड के लिए अन्य योगासन
सूर्य नमस्कार
सूर्य नमस्कार शरीर के मेटाबॉलिज्म को एक्टिव करने में मदद करता है. इसमें गर्दन, रीढ़ और पूरे शरीर की मूवमेंट होती है.
सर्वांगासन
यह एक एडवांस आसन है. इसे शुरुआत में किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही करें.
सावधानी:
गर्दन दर्द, सर्वाइकल या कुछ हृदय संबंधी समस्याओं में इसे करने से बचें.
हलासन
यह गर्दन और रीढ़ की स्ट्रेचिंग में मदद करता है.
मत्स्यासन
यह गर्दन और छाती के हिस्से को खोलने में मदद करता है और तनाव कम करने में सहायक हो सकता है.
सेतु बंधासन
यह आसान आसनों में से एक है और गर्दन व रीढ़ की स्ट्रेचिंग में मदद करता है.
थायरॉइड के लिए योग प्रोटोकॉल
एक आसान रूटीन इस तरह रखा जा सकता है:
- नेक मूवमेंट
- शोल्डर रोटेशन
- सूर्य नमस्कार
- सेतु बंधासन
- सर्वांगासन/हलासन (अगर उपयुक्त हो)
- मत्स्यासन
- शवासन
- अनुलोम-विलोम
- उज्जायी प्राणायाम
- भ्रामरी प्राणायाम
पूरे अभ्यास में लगभग 40–45 मिनट लग सकते हैं. अगर समय कम हो तो 20 मिनट का छोटा रूटीन भी किया जा सकता है.
भ्रामरी प्राणायाम क्यों जरूरी है?
भ्रामरी तनाव कम करने और मन को शांत करने में मदद करता है. तनाव हार्मोन बैलेंस को प्रभावित कर सकता है, इसलिए थायरॉइड मैनेजमेंट में रिलैक्सेशन भी जरूरी है.
योग करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
- शुरुआत धीरे-धीरे करें.
- परफेक्शन के पीछे न भागें.
- शरीर जितना साथ दे उतना ही करें.
- दर्द होने पर जबरदस्ती न करें.
- सही ट्रेनर से योग सीखना बेहतर है.
योग कोई एक दिन का इलाज नहीं है. नियमित अभ्यास, सही खानपान और धैर्य के साथ यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं.)

