Parenting Tips: आज के समय में कई माता-पिता इस समस्या से जूझ रहे हैं कि उनका बच्चा उनकी बात नहीं सुनता, बार-बार चीज़ें पटकता है, मोबाइल छोड़ने से मना करता है या पहले से ज्यादा ज़िद्दी हो गया है. बदलती जीवनशैली और डिजिटल प्रभाव के चलते बच्चों के व्यवहार में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है. इस विषय पर फिट रहे इंडिया ने बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. एकता सोनी पुरी से खास बातचीत की.
जिद्द क्यों करते हैं बच्चें?
डॉ. के अनुसार, बच्चों में बढ़ती ज़िद और गुस्से के पीछे कई कारण हो सकते हैं. आजकल बच्चे अधिक समय मोबाइल, टीवी और डिजिटल स्क्रीन पर बिताते हैं, जिससे उनका ध्यान और धैर्य कम होता जा रहा है. इसके अलावा, माता-पिता के साथ कम समय बिताना और भावनात्मक जुड़ाव की कमी भी बच्चों के व्यवहार को प्रभावित करती है.
उन्होंने बताया कि अक्सर माता-पिता बच्चों की बात पूरी तरह सुनने के बजाय उन्हें डांटने या रोकने की कोशिश करते हैं, जिससे बच्चा खुद को समझा हुआ महसूस नहीं करता. यही कारण है कि वह गुस्से या ज़िद के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त करने लगता है.
डॉक्टर ने बताया बच्चों को समझाने का तरीका
डॉ. पुरी का कहना है कि बच्चों के साथ सही समय पर संवाद करना बेहद जरूरी है. माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों की भावनाओं को समझें, उनके साथ समय बिताएं और उन्हें बिना डर के अपनी बात कहने का अवसर दें. साथ ही, बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करना और उन्हें खेल-कूद या रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना भी जरूरी है. डॉक्टर का कहना है कि यदि समय रहते बच्चों के व्यवहार को समझकर सही दिशा दी जाए, तो न केवल उनकी ज़िद कम की जा सकती है, बल्कि माता-पिता और बच्चों के बीच मजबूत भावनात्मक संबंध भी विकसित किया जा सकता है.
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