Valley Fever Symptoms: अमेरिका में भारतीय टेक प्रोफेशनल चिरंजीवी कोल्ला की मौत हो गई. उनकी मौत के बाद एक नई बीमारी की खूब चर्चा हो रही है. इस बीमारी का नाम है वैली फीवर. बताया गया कि उन्हें नॉर्मल वायरल और निमोनिया जैसे लक्षण महसूस हुए. लेकिन कुछ समय के बाद जानकारी मिली की ये वायरल फंगल इंफेक्शन उन्हें हुआ था.
इसपर अमेरिका की स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन यानी CDC के अनुसार वैली फीफर एक ऐसी बीमारी जिसका सीधा कनेक्शन फेफड़ों से जुड़ा होता है. ये फेफड़ों से जुड़ा फंगल इंफेक्शन है. अक्सर ये मिट्टी में मौजूद फंगस या फिर छोटे कणों से फैलता है. ऐसे छोटे कण जो सांस के जरिए हमारे शरीर में जा सकते हैं. आइए एक बार डिटेल में समझते हैं कि क्या होता है वैली फीवर
वैली फीवर क्या होता है?
आप इसे वैली फीवर के नाम से जरूर जान सकते हैं. लेकिन मेडिकल भाषा में इसे कोक्सीडियोइडोमाइक्रोसिस के नाम से जाना जाता है. दरअसल ये बीमारी कोक्सीडियोइड्स नाम के एक फंगस से फैलती है. खासतौर पर ये फंगस अमेरिका के कैलिफोर्निया, एरिजोना या फिर कुछ सूखे इलाकों की मिट्टी में ही पाया जाता है. क्योंकि सूखी मिट्टी में भी ये पाया जाता है ऐसे में जब तेज हवा, धूलभरी आंधी, खेती या फिर कंस्ट्रक्शन साइट की मिट्टी उड़ती है, तो उनमें मौजूद फंगस हवा के जरिए फैल जाते हैं और शरीर में घुस जाते हैं. एक बार शरीर में जाने के बाद संक्रमण बढ़ाते हैं.
आसानी से नहीं होती पहचान
सीडीसी के मुताबिक इस वैली फीवर की पहचान कर पाना मुश्किल होता है. इसके पीछे का कारण साफ है इसके लक्षण काफी नॉर्मल होते हैं. जैसे फ्लू होना, वायरल इंफेक्शन होना, निमोनिया जैसा लगता है. यही कारण है कि मरीज बीमारी नहीं पहचान पाते और अगर पहचान में आती भी है तो देर हो जाती है. इसके लक्षणों की अगर बात की जाए तो लगातार बुखार, सूखी या लगातार खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बहुत ज्यादा थकान, सिरदर्द, रात में पसीना आना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द. CDC का कहना है कि कुछ लोगों में लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है.
खुद ठीक हो जाती ये बीमारी?
अब ये जानना जरूरी है कि क्या ये बीमारी खुद ठीक हो जाती है? तो इसका जवाब है कि अधिकतर मामले बिना इलाज के ही ठीक हो जाते हैं. पर कुछ मामले ऐसे होते हैं जिसमें फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. दुर्लभ मामले में संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है. जैसे दिमाग, हड्डियों स्किन तक फैल सकता है. एक्पर्ट्स का मानना है कि जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, डायबिटीज का शिकार हैं, या फिर किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे हैं ऐसे संक्रमित लोगों को खतरा अधिक रहता है.
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