Night Shift Risk Type 2 Diabetes: कुछ लोगों को रात में काम करना पंसद होता है. दिन के उजाले में उनसे काम हो नहीं पाता. जिसके चलते वो ऑफिस में भी नाइट शिफ्ट की डिमांड करते हैं. तमाम ऐसे ऑफिस आपने देखें होंगे जो एंप्लॉय को नाइट शिफ्ट करने की इजाजत देते हैं. जिन्हें ऐसी शिफ्ट पंसद है, उनके लिए भी और जिन्हें नहीं भी पसंद है उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपकी सेहत पर इसका क्या असर पड़ रहा है.
नाइट शिफ्ट करने वालों को ये ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें कई तरह की प्रॉब्लम हो सकती है. हालांकि ऐसा भ्रम भी लोगों के बीच में है कि अगर आप नाइट शिफ्ट करेंगे तो टाइप-2 डायबिटीज हो सकती है. ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि क्या ये सच है? क्या सच में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. आज इसपर डिटेल में जानेंगे.
नाइट शिफ्ट करने से बढ़ेगा टाइप-2 डायबिटीज?
ये तो सभी जानते हैं कि जो लोग नाइट शिफ्ट करते हैं उन्हें कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं. जैसे मोटापा, मेटाबॉलिज्म पर इफेक्ट होना, हार्ट प्रॉब्लम इतना ही नहीं कई अन्य समस्याएं होती है. लेकिन ये जानना जरूरी है कि क्या नाइट शिफ्ट करने से डायबिटीज का खतरा बढ़ता है तो इसपर एक्सपर्ट्स का भी जवाब है हां. एक्सपर्ट्स का कहना है कि रात में काम करने से टाइप-2 डायबिटीज का रिस्क बढ़ जाता है. अब ये भी जानना है कि ऐसा क्यों होता है, तो इसका जवाब है कि नाइट शिफ्ट जब हम करते हैं, तो हमारी बॉडी में मौजूद नैचुरल सर्कैडियम रिदम डिस्टर्ब होता है. जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी कम होती है और ब्लड शुगर बढ़ता है. यानी ये साफ है कि नाइट शिफ्ट करने से टाइप-2 डायबिटीज का रिस्क भी बढ़ जाता है.
क्या होता है सर्केडियम रिदम?
जान लेते हैं कि आखिर सर्कैडियन रिदम क्या होता है? तो बता दें कि ये एक बायोलॉजिकल क्लॉक होता है. जो हमें एनर्जी देने और एक्टिव रखने में हमारी मदद करता है. यही क्लॉक हमें बताती है कि रात हो गई तो रेस्ट करना है और सोना है. लेकिन जब हम रात में काम करते हैं, तो ये नैचुरल क्लॉक उल्टी दिशा में काम करने लगती है. इसलिए अगर हेल्दी रहना है तो हमारे सर्कैडियन रिदम का भी सही काम करना जरूरी है.
हार्मोन का बैलंस बिगड़ सकता है
अब नाइट शिफ्ट करने से हार्मोन इंबैलंस की समस्या भी हो सकती है. यानी जो हमारे शरीर में मेन हार्मोन जैसे मेलाटोनिन और कोर्टिसोल होते हैं उनका बैलंस बिगाड़ देता है. इतना ही नहीं ये सीधे तौर पर ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को भी इफेक्ट डालता है. जाहिर है ऐसे में इंसुलिन रेजिस्टेंस पर असर पड़ता है, जो कि टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ा देता है.
खराब लाइफस्टाइल का शिकार
जब हम नाइट शिफ्ट करते हैं, तो हमारे दोस्त दूर होते जाते हैं. साथ ही हम फिजिकली काफी एक्टिव नहीं होते. कई बार नाइट शिफ्ट वाले लोग खुद को एक्टिव रखने और जगाने के लिए स्मोकिंग करने लग जाते हैं. अनहेल्दी स्नैकिंग करते हैं, एक्सरसाइज में कमी आ जाती है. ये भी टाइप-2 डायबिटीज के कारण बन सकते हैं.
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