Urine Test Detect Autism: ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंट कंडिशन है. इसके शुरुआती संकेत बचपन से ही दिखाई देना शुरू हो जाते हैं. लेकिन कई बार कुछ मामलों में इसकी पहचान देर से हो पाती है. इसे ही देखते हुए पिछले काफी समय से साइंटिस्ट लगातार आसान तरीकों की खोज रहे हैं. जिसकी मदद से ऑटिज्म को जल्दी पहचाना जा सके. इसपर एक स्टडी रिपोर्ट सामने आई है.
ये स्टडी रिपोर्ट Molecular Psychiatry जर्नल में भी पब्लिश हो चुकी है. इस स्टडी में ये दावा है कि अब यूरिन टेस्ट की मदद से 2 साल के बच्चे की उम्र में ऑटिज्म के संभावित संकेतों की आसानी से पहचान की जा सकती है. ये टेस्ट इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि ऑटिज्म की पहचान शुरुआत में ही काफी अहम मानी जाती है. क्योंकि अगर समय रहते पता लगा लिया जाए तो बच्चों को एक्सपर्ट्स की गायडेंस मिल सकती है.
अभी कैसे की जाती है पहचान?
सवाल आता है कि इस तरह का टेस्ट अगर अभी मौजूद नहीं है तो अभी कैसे पहचान की जा सकती है, इसका जवाब है कि ऑटिज्म की पहचान मुख्य तौर पर बिहेवियर और विकास से जुड़े संकेतों के आधार पर की जाती है. जिसके कारण पहचान करने में काफी समय लग सकता है. ऐसे में अगर आसान या फिर कोई सरल या फिर कम खर्चे वाला टेस्ट मिल जाए तो शुरुआती स्क्रीनिंग में काफी मदद मिल सकती है. ये कई परिवारों के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है. अब इस टेस्ट को लेकर रिसर्चर्स का मानना है कि ये नई तकनीक ऑटिज्म की पहचान को और आसान बनाने की दिशा में एक शानदार कदम साबित हो सकता है.
दो तरह के बच्चों का सैंपल्स का किया एनालिसिस
इस स्टडी रिपोर्ट में ये जानकारी मिली कि रिसर्चर्स ने ऑटिज्म वाले और बिना ऑटिज्म वाले बच्चों के यूरिन सैंपल्स की जांच की. इस रिजलट्स में सामने आया कि ऑटिज्म से जुड़े कुछ खास जैविक संकेत दोनों समूहों में अलग-अलग स्तर पर मौजूद थे. इन्हीं के आधार पर रिसर्चर्स ने ऑटिज्म से जुड़े संभावित संकेतों की पहचान करने की कोशिश की.
रिसर्च के दौरान ये पाया गया कि ये टेस्ट ऑटिज्म वाले बच्चों की पहचान करने में काफी बेहतरीन और एग्जैक्ट रिजल्ट मिलने में मदद मिल सकती है. रिसर्चर्स का कहना है कि ये तकनीक आने वाले भविष्य में शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए काफी उपयोगी मानी जा सकती है. हालांकि ये भी स्पष्ट किया गया कि अभी इस विषय पर रिसर्च की जरूरत है.
कैसे होगा पेशाब से टेस्ट?
इस टेस्ट में यूरिन का इस्तेमाल क्यों किया जाता है, तो इसका जवाब है कि हमारे यूरिन में कुछ खास तरह के कैमिकल्स मौजूद होते हैं, ये उन खास संकेतों की जांच करने में मदद करते हैं. शरीर में रहने वाले माइक्रोब्स की एक्टिवीटी से जुड़े हो सकते हैं. रिसर्चर्स ने इनकी जांच कर ऐसे पैटर्न तलाशने की कोशिश की, जो ऑटिज्म से संबंध दिखा सकते हैं. रिसर्च के मुताबिक ये प्रोसेस आसान और कम मुश्किल हो सकता है. क्योंकि इसमें सिर्फ यूरिन की ही जरूरत पड़ती है.
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