Cadbury Gems Ingredients: आपने अपनी लाइफ में कभी न कभी तो कैडबरी जेम्स (Cadbury Gems) खाई होगी. अक्सर लोग इसे बच्चों के हाथों में थमा देते हैं. बच्चे भी चॉकलेट का स्वाद समझकर इन्हें खा लेते हैं. बिना ये जाने कि आखिर उसमें किस तरह के इंग्रीडियंडट्स को शामिल किया गया है.
शायद आपने भी इन्हें गौर नहीं किया. लेकिन ये स्वास्थ्य के लिहाज से कितने खतरनाक हो सकते हैं. इसमें कुछ ऐसे इंग्रीडियंडट्स शामिल है जो आपके बच्चे की सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसमें टाइटेनियम डायोक्साइड शामिल है, ज आपके डीएने को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसे लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. जिसमें इंग्रीडियएंट्स को लेकर बड़ा क्लेम किया जा रहा है.
यूरोप में बैन है ये प्रोडक्ट?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में क्लेम किया गया कि जेम्स में कलर मिलाया जाता है जिसे INS 171 कहा जाता है आप इसे टाइटेनियम डायोक्साइड के नाम से भी जान सकते हैं. ये एक ऐसा सब्स्टैंस है जो आपके DNA को नुकसान पहुंचा सकता है. वीडियो में क्लेम किया गया कि इस कलर को यूरोप में बैन किया गया है. लेकिन भारत में लाखों बच्चे इसका सेवन करते हैं.
फिर आता है इसमें मौजूद कलर 102 जिसे टार्ट्राजिन भी कहा जाता है. ये फूड कलर कई बड़े देशों में बैन तो नहीं है, लेकिन इसमें ब्रिटेन में इसपर सख्त बैन है. इसे पेट्रोलियम से निकलने वाले कैमिकल से तैयार किया जाता है. इसलिए बच्चों के खाने में इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है. अगर बच्चे इनका इनटेक करें तो कई प्रॉब्लम हो सकती है जिसमें ADHD भी शामिल है. बच्चे चिड़चिड़ेपन का शिकार हो सकते हैं, फोकस में कमी हो सकती है. इसी वजह से यूरोपीय संघ (EU) में ऐसे फूड्स पर चेतावनी लिखना जरूरी है.
इन देशों में भी बैन
अब आता है कलर 133 जिसे ब्रीलियंट ब्लू कहा जाता है. ये कलर बच्चों को एलर्जी, स्किन रिएक्शन जैसी समस्याएं पैदा करता है. इतना ही नहीं ये कई देशों में जैसे फ्रांस, जर्मनी, स्वीदजरलैंड में बैन है. इसके बाद आता है 124, 127 जैसे कलर आते हैं, ये रेडिश पिंक कलर होता है जिससे आस्थमा जैसी समस्या होती है. ये नॉर्थ अमेरिका के कई देशों में बैन है. फिर आता है कलर 132 भी बैन है. लेकिन इनका इस्तेमाल हो रहा है.
क्या नहीं करना चाहिए सेवन?
क्योंकि लाखों बच्चे इसका सेवन करते हैं. इसलिए ये सवाल आना लाजमी है कि क्या इनका सेवन हेल्थ के लिए सेफ नहीं है, क्योंकि कई दावे सोशल मीडिया पर किए जाने लगे थे. इसपर एक फैक्ट चेक रिपोर्ट भी सामने आई. ये रिपोर्ट फैक्ट Crescendo द्वारा की गई है. रिपोर्ट इन दावों को मिसलीडिंग बताती है. अंत में रिजल्ट सामने आया कि ये दावा गुमराह करने वाला है. जो वीडियो में कलर्स को लेकर दावा किया जा रहा है वो हानिकारक तो हैं. लेकिन बताए गए रंगों को तय लिमिट में इस्तेमाल करने पर सुरक्षित माना जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

