Can Diabetes Cause Sleep Problems: भारत में डायबिटीज की समस्या काफी आम होती जा रही है. कई लोग इसकी चपेट में है. साल 1990 के वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ओर से जारी आंकड़े ये बताते हैं कि दुनियाभर में उस 20 करोड़ लोग इस समस्या से परेशान थे. लेकिन जैसे-जैसे साल आगे बढ़ते जा रहे हैं, ठीक वैसे भी ये बीमारी तेजी से बढ़ती जा रही है.
आंकड़ों के अनुसार साल 2022 तक ये संख्या बढ़ी और 83 करोड़ तक पहुंची. आप इन आंकड़ों से ये अंदाजा लगा सकते हैं कि स्थिति कितनी ही गंभीर और चिंताजनक है. वहीं इससे भी ज्यादा चौंकाने और चिंता वाली बात ये है कि जो लोग डायबिटीज की समस्या से पीड़ित हैं उनमें से आधे लोगों को न तो सही दवाएं तक नहीं उपलब्ध हो पा रही.
कई समस्याओं का करना पड़ सकता सामना
क्योंकि आंकड़ें बेहद चौंकाने और डराने वाले हैं. इसलिए इसपर गंभीरता बरतनी चाहिए. लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं, जो इसे सीरिसली नहीं लेते. लिहाजा कई और समस्सयाओं का सामना करना पड़ता है. वहीं जानते हैं कि जो इसे इग्नोर करते हैं, उन्हें कौन सी समस्याएं है जो परेशान कर सकती हैं.
बता दें कि अगर आप डायबिटीज से ग्रसित हैं, और इसे इग्नोर कर रहे हैं, तो आगे चलकर ये किडनी फेलियर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और यहां तक की कई बार बॉडी पार्ट्स तक काटने तक की नौबत आ सकती है. लेकिन लोग इसे सीरियसली नहीं लेते. अब जान लेते हैं कि डायबिटीज के कौन से लक्षण हैं, जिनकी पहचान कर आप ये जान सकते हैं, कि डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए और ट्रीटमेंट जल्स से जल्द शुरू करना चाहिए.
डायबिटीज के क्या हैं लक्षण? | Symptoms of diabetes
अब सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर जो लोग इस समस्या से परेशान हैं, उनमें किन तरह के लक्षण दिखाई देते हैं? Symptoms of diabetes तो बता दें कि आमतौर पर इसे लक्षणों में अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखना आप बिल्कुल स्वस्थ हैं फिर भी वजन में कमी आना, ये सभी डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of diabetes) हो सकते हैं. क्योंकि ये काफी आम है, लोगों को लगता है कि ठीक हो जाएगा. इसलिए इसे इग्नोर कर दिया जाता है. इनमें सबसे आम समस्या एक और है जिसे लोग काफी इग्नोर करते हैं, वो आपकी स्लीप साइकल से जुड़ी है.
स्लीप साइकल पर इफेक्ट | Can Diabetes Cause Sleep Problems
एक रिपोर्ट के अनुसार जब हमारे ब्लड शुगर लेवल में लगातार कुछ बदलाव जैसे उतार-चढ़ाव होता है, तो ये हमारी नींद पर काफी असर डालता है. हमारी स्लीप साइकल बिगड़ जाती है. इसका कारण जब शरीर में शुगर का लेवल बहुत अधिक कम हो जाता है, तो ये हमारी नींद को डिस्टर्ब करता है. जिसके कारण स्लीप साइकल खराब हो जाती है. ये सिर्फ आपकी नींद नहीं बल्कि कई मुश्किल आपके लिए खड़ी कर सकता है. जैसे नर्व्स डैमेज, पैरों में दर्द. ये सब समस्याएं आपको परेशान कर सकते हैं. इसलिए पर्याप्त और अच्छी क्वालिटी की नींद हमारी बॉडी और सेहत दोनों के लिए बेहद जरूरी होती है. अक्सर नींद के इस खराब पैटर्न को डायबिटीज के पेशंट में देखा गया है.
बार-बार यूरिन आने की समस्या
क्योंकि ये समस्या काफी जटिल है. जो आपके लिए कई समस्याएं खड़ी कर सकता है. खातौर पर नींद को लेकर. जब हमारा ब्लड लेवल कम होता है या फिर बढ़ भी जाता है. अक्सर ये पैटर्न रात के समय में देखा जाता है. इसे हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है. क्योंकि ये रात के समय में भी होता है तो इससे स्लीप साइकल काफी प्रभावित होता है.
अक्सर ये समस्या टाइप-1 डायबिटीज वाले लोगों में अधिक देखी जाती है. अब जो लोग दवाएं लेते हैं, तो रात के समय में आपका ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे कर सकता है. जब ऐसा होता है जो आपको अधिक नींत या फिर थकान महसूस होता है. इस कारण नींद का पैटर्न भी बिगड़ सकता है. आपका अगर ब्लड शुगर बहुत ही ज्यादा बढ़ जाए तो आपकी नींद काफी प्रभावित हो सकती है. क्योंकि रात के समय में आप बार-बार उठ रहे हैं, और आपकी नींद बिगड़ रही है इसके कारण यूरिन आने की जरूरत पड़ सकती है. इसी कारण भी नींद टूटती है. इसके अलावा ज्यादा प्यास लगना और सिरदर्द भी नींद आने में परेशानी पैदा कर सकते हैं.
नींद की समस्या को बढ़ा सकती डायबिटीज
वहीं कई रिसर्च्स ऐसा बताती हैं कि नींद से संबंधित समस्याएं डायबिटीज के खतरे को और भी बढ़ा सकते हैं. दरअसल साल 2022 में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल ने एक रिसर्च किया. जिसमें ये पाया गया कि जो लोगों को सोने में परेशानी होती हैं, उनमें ब्लड शुगर का लेवल काफी ज्यादा पाया गया है. हालांकि अगर आप स्लीप क्वालिटी को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो कुछ आदतें आप अपना सकते हैं. जैसे दिन में फिजीकली एक्टिव रहें. सोने से पहले कम से कम एक घंटे तक आराम करें, अपने बिस्तर को काफी आरामदायक यानी अपने कंफर्ट के हिसाब से तैयार करें. अगर सोने से पहले आपका स्क्रीन टाइम ज्यादा है, तो अपने स्क्रीन टाइम को सोने से पहले कम करें.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


