Egg For Brain: कई बार छोटी-छोटी चीजें भूल जाना, सोचने में दिक्कत, बिहेवियर में समस्या होने लगती है. कुछ लोग इसे इग्नोर कर देते हैं. लेकिन इसे इग्नोर करना भारी पड़ सकता है. दरअसल इन सबका आम कारण है अल्जाइमर. अल्जाइमर के कारण व्यक्ति में इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. वहीं उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये बीमारी दिमाग की क्षमता को और भी कमजोर कर देती है.
हालांकि अल्जाइमर का इलाज नहीं है. इसे दवाओं से कंट्रोल तो किया जा सकता है लेकिन इसका कोई पक्का या फिर स्थायी इलाज नहीं है. अब अल्जाइमर पर एक रिसर्च सामने आई है. जानकारी के मुताबिक ये रिसर्च अमेरिका के कुछ रिसर्चर्स द्वारा की गई है. उन्होंने पाया कि अंडों का सेवन अल्जाइमर की बीमारी में एक पॉजिटीव साइन बनकर सामने आ सकता है. कैसे आइए जानते हैं.
88 लाख बुजुर्ग डिमेंशिया का शिकार
जानकारी के लिए बता दें कि नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन पर डिमेंशिया को लेकर एक रिपोर्ट जारी हुई है. इस रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में करीब 88 लाख बुजुर्ग लोग डिमेंशिया का शिकार हैं. बताया गया कि ये आंकड़ा 60 साल या फिर उससे अधिक उम्र वाले लोगों के साथ जुड़ा हुआ है. वहीं डिमेंशिया के कुल मामलों के 60 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के पीछे अल्जाइमर होता है. हालांकि ये महज सामान्य अनुमान है. लेकिन ये जानना जरूरी है कि आखिर अल्जाइमर में अंडे का क्या कनेक्शन है.
प्रमुख सोर्स में शामिल अंडा
अमेरिका के रिसर्चर्स ने डाइटरी फैक्टर्स पर रिसर्च किया. जिसमें रिसर्चर्स ने पाया कि हमारी ब्रेन हेल्थ को सपोर्ट करने के लिए अंडा डाइट का प्रमुख सोर्स में से एक है. यानी ये हमारे माइंड को हेल्दी बनाने के लिए पोषक तत्व देता है. रिसर्च में ये भी खुलासा हुआ कि अगर आप सीमित संख्या में अंडों का सेवन करते हैं, तो अल्जाइमर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है. ये रिसर्च साइंस डायरेक्ट में भी पब्लिश हुई है.
अंडा नहीं खाते तो हो जाएगा अल्जामर?
अगर आप अंडा नहीं खाते तो आपको अल्जाइमर होने का खतरा ज्यादा है. ऐसा हम नहीं कहते ऐसा रिसर्च में कहा गया है. बताया गया कि जो लोग हफ्ते में एक या फिर 2 से 4 बार ही अंडों का सेवन करते हैं उन्हें इस बीमारी का खतरा कम हो सकता है. उन लोगों में खतरा कम देखा जाता है जो हफ्ते में 5 या फिर उससे अधिक बार अंडे खाते हैं.
अल्जामर क्या है? What is Alzheimer
वहीं ये जानना जरूरी है कि आखिर अल्जाइमर क्या होता है, तो बता दें कि ये माइंड से जुड़ी एक बीमारी है. आसान भाषा में कहें तो ये एक ब्रेन डिसऑर्डर है जो धीरे-धीरे ही यादाश्त और हमारे सोचने की क्षमता को खत्म कर देता है. जब कोई व्यक्ति इस बीमारी का शिकार होता है तो उसे किसी व्यक्ति का नाम याद रखने, पता याद रखने इस तरह के आसान काम करने में काफी परेशानी होती है.
यह भी पढ़ें: अब भारत खुद बनाएगा सस्ती और एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है. इस तरह के कॉन्टेंट को देखने के लिए आप हमारे Youtube चैनल के साथ जुड़ सकते हैं. )

