Familial Lipoprotein Lipase Deficiency: जब किसी व्यक्ति के खून में अधिक फैट जमा हो जाए तो उसके शरीर का रंग भी बदल सकता है. अगर आप ये सुनकर चौंक गए हैं, तो लाजमी है. लेकिन खून में इतना ज्यादा फैट होना क्या मुमकिन है? तो इसका जवाब है हां. मुंबई से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है.
जानकारी है कि महज ढाई महीने की एक बच्ची जो दिल से जुड़ी समस्या के कारण अस्पताल में पहुंची थी. जब डॉक्टर ने उसकी जांच करने के लिए ब्लड सैंपल लिया तो चौंक गए. दरअसल महज ढाई महीने की बच्ची का खून सामान्य गुलाबी रंग के बजाए गाढ़ा दिखाई दिया जो डॉक्टर्स के लिए हैरानी की बात थी.
बच्ची के साथ ऐसा क्यों हुआ?
ये जानकारी पाकर जरूर मन में सवाल आया होगा कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? तो इसका जवाब है कि बच्ची के खून में ट्राइग्लिसराइड का लेवल लगभग 42 हजार mg/dl था. यानी नॉर्मल से करीब 300 गुना अधिक था. इसकी जांच की गई तो पता चला ये बच्ची फैमिलियल लाइपोप्रोटीन लाइपेज डेफिशिएंसी यानी (LPLP) नाम की बीमारी का शिकार है. ये काफी दुर्लभ बीमारी है. अब ये लाइपोप्रोटीन लाइपेज क्या होता है आइए जान लेते हैं.
क्या होता है लाइपोप्रोटीन लाइपेज?
दरअसल जो भी फैट वाला हम खाना खाते हैं उसे हमारी बॉडी एनर्जी में बदलने के लिए एक खास तरह के एंजाइम का इस्तेमाल करती है. इसी एंजाइम को कहा जाता है लाइपोप्रोटीन लाइपेज. रिपोर्ट्स कहती हैं कि यदि जन्म से ही ये एंजाइम ठीक तरह से काम न करे या फिर बिल्कुल भी न बन रहा हो तो खून के अंदर ट्राइग्लिसराइड तेजी से बढ़ जाते हैं. ऐसी कंडिशन जब होती है तो उसे कहा जाता है पारिवारिक लिपोप्रोटीन लाइपेज यानी फैमिलियल लिपोप्रोटीन लाइपेज डेफिशिएंसी. हालांकि ये एक दुर्लभ बीमारी है. दुनियाभर में लगभग 10 लाख में से किसी एक व्यक्ति को ये समस्या हो सकती है.
नॉर्मल नहीं था ब्लड
मुंबई में रहने वाली इस बच्चे को दिल के साइज में बढ़ोत्तरी होने के कारण अस्पताल में लाया गया था. वहीं उसके खून की जांच करवाई गई. डॉक्टरों देखा कि उसके ब्लड का रंग लाल रंग का नहीं थी. जब जांच रिपोर्ट सामने आई तो पता चला कि ट्राइग्लिसराइड 42,000 mg/dL था. सामान्य स्तर 150 mg/dL से कम माना जाता है. अब बच्ची के इलाज के दौरान उसे 16 दिनों तक मुंह से दूध नहीं पिलाया गया. डॉक्टरों की कोशिश थी कि उसे नसों के जरिए पोषण मिले.
अगर ट्राइग्लिसराइड बढ़े तो क्या होगा?
अब जान लेते हैं कि ट्राइग्लिसराइड अगर लेवल बढ़ा हुआ हो तो कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है.
- अग्न्याशय (पैंक्रियाज) में सूजन
- पेट में तेज दर्द
- उल्टी
- बार-बार बुखार
- लिवर और तिल्ली का बढ़ना
- त्वचा पर छोटे पीले दाने
- आंखों की रेटिना में बदलाव
- शिशुओं में कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब किसी दूसरी समस्या की जांच के दौरान खून का असामान्य रंग दिखाई देता है. वहीं ये बीमारी जेनेटिक बीमारी है. यानी अगर माता-पिता को ये बीमारी है तो इसका खतरा बच्चे में बढ़ जाता है.
क्या है इसका इलाज?
जानकारी के मुताबिक फिलहाल इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है. लेकिन डॉक्टर्स ट्राइग्लिसराइड को सेफ रखने के लिए कुछ सलाह देते हैं जैसे कम फैट वाला खाना खाएं, खास मेडिकल फॉर्मुला वाला दूध दें, रेगुलर ब्लड टेस्ट करवाएं, न्यूट्रिशिएंट की निगरानी. करने की सलाह देते हैं.
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