Monsoon Skincare Tips: मानसून के मौसम में स्किन केयर करनी बेहद जरूरी है. अगर सही तरीके से केयर नहीं की जाए तो कई तरह की समस्या बढ़ जाती है. इसलिए कुछ सावधानियां अपनानी बहुत जरूरी है. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
बारिश के मौसम में पिंपल्स की समस्या आमतौर पर देखने को मिलती है. ये समस्या खासकर ऑयली और सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को ज्यादा परेशान करती है. उन्हें पिंपल्स, एक्ने और स्किन की चिपचिपाहट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में वह कुछ जरूरी बातों का ध्यान रख सकते हैं. क्या है वह बातें जिन्हें फॉलो करने से आप पिंपल्स की समस्या को रोक सकते हैं.
किन जरूरी बातों का रखें ध्यान
चेहरे सफाई जरूरी
चेहरे की सफाई पिंपल्स की समस्या को कम करने में मदद करता है. वहीं मानसून के मौसम में चेहरे की साफ-सफाई बेहद जरूरी है. कम-से-कम दिन में दो बार फेसवॉश की मदद से चेहरे को साफ करें. चेहरे साफ करने से स्किन का एक्सट्रा ऑयल हटाने में मदद करते हैं.
चेहरे को बार-बार न छुएं
पिंपल्स की समस्या में चेहरे को छूने से बचना चाहिए. कई बार हम जाने-अनजाने में चेहरे पर हाथ लगा लेते हैं. ऐसा करना पिंपल्स की समस्या को बढ़ा सकता है. हाथों में मौजूद बैक्टीरिया स्किन तक पहुंचकर पिंपल्स की समस्या बढ़ा सकते हैं. इसलिए हाथों को साफ रखें और बिना किसी कारण चेहरे को छूने से बचें.
सही मॉइश्चराइजर का करें इस्तेमाल
मानसून के मौसम में ऑयली स्किन वाले लोगों को लाइटवेट (हल्के), जेल-बेस्ड (Gel-based) या ऑयल-फ्री (Oil-free), नॉन-कॉमेडोजेनिक (जो पोर्स बंद न करे), और वॉटर-बेस्ड मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें. ये मॉइस्चराइजर स्किन को भारीपन से बचाते हैं और पोर्स बंद नहीं होने देते.
मेकअप रिमूवल
ऑयली और सेंसिटिव स्किन वाले मानसून में माइक्रेलर वॉटर (Micellar Water) या लाइटवेट क्लींजिंग मिल्क का इस्तेमाल करें. ये स्किन को नुकसान पहुंचाए बिना साफ करते हैं. ऐसे प्रोडक्ट चुनें जो ऑयल-फ्री, नॉन-कॉमेडोजेनिक (Non-comedogenic) और अल्कोहल-फ्री (Alcohol-free) हों.
पिंपल्स को फोड़ने की गलती न करें
अगर आपके चेहरे पर पिंपल्स की समस्या हो गई है तो आप इन्हें फोड़ने की गलती बिल्कुल भी ना करें. ऐसा करने से इंफेक्शन ओर बढ़ सकता है. वहीं दाग-धब्बों की समस्या हो सकती है.
इसलिए मानसून में होते पिंपल्स?
मानसून में नमी (humidity) और पसीने के कारण स्किन का एक्सट्रा ऑयल (सीबम) धूल-मिट्टी के साथ मिलकर रोमछिद्रों (pores) को बंद कर देता है. इस नमी वाले वातावरण में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे पिंपल्स, रेडनेस और खुजली की समस्या बढ़ जाती है.
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FAQs
सवाल: क्या सही मॉइश्चराइजर लगाने से पिंपल्स का खतरा कम हो सकता है?
जवाब:सही मॉइश्चराइजर त्वचा का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है. इससे अतिरिक्त तेल बनने की संभावना कम हो सकती है, जिससे कुछ लोगों में पिंपल्स का जोखिम भी घट सकता है.
सवाल: मानसून में किस तरह का मॉइश्चराइजर लगाना चाहिए?
जवाब: ऑयली या पिंपल्स वाली त्वचा के लिए हल्का, ऑयल-फ्री और नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइजर बेहतर माना जाता है.
सवाल: क्या मानसून में मॉइश्चराइजर लगाना जरूरी है?
जवाब: हां, बारिश के मौसम में भी त्वचा को नमी की जरूरत होती है। सही मॉइश्चराइजर त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है.
(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

