Farts per day normal: दिन में गैस (फार्ट्स) निकलना एक बिल्कुल सामान्य प्रोसेस है, और अक्सर लोग इसे लेकर शर्म या चिंता महसूस करते हैं, जबकि यह हमारे पाचन तंत्र की सामान्य एक्टिवीटी का एक हिस्सा होता है. हाल ही में एक बड़े साइंटिफिक एनालिसीस में, जिसमें 6416 लोगों का डेटा शामिल था, यह समझने की कोशिश की गई कि एक सामान्य इंसान दिन में कितनी बार गैस पास करता है और इसमें उम्र और जेंडर का क्या असर होता है.
इस रिसर्च के अनुसार, एक एवरेज व्यक्ति दिन में लगभग 5 बार गैस पास करता है. हालांकि यह संख्या हर व्यक्ति में थोड़ी अलग हो सकती है, और इसका असली “नॉर्मल रेंज” लगभग 3 से 6 बार के बीच माना जाता है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति में इससे थोड़ा कम या ज्यादा गैस बनती है, तो वह ज्यादातर मामलों में सामान्य ही माना जाएगा, जब तक कोई अन्य परेशानी न हो.
पुरुषों को अधिक होती है गैस की समस्या?
जब इस डेटा को पुरुष और महिलाओं के हिसाब से देखा गया, तो पाया गया कि पुरुषों में गैस बनने की संख्या थोड़ी अधिक थी. पुरुषों में यह औसतन लगभग 5.2 बार प्रति दिन थी, जबकि महिलाओं में यह लगभग 4.8 बार रही. यह अंतर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर इसे महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि यह शरीर की बनावट, हार्मोन और पाचन प्रक्रिया में अंतर को दर्शाता है.
उम्र के अनुसार भी दिलचस्प पैटर्न सामने आया. 14 से 25 साल के युवाओं में गैस बनने की संख्या सबसे कम देखी गई, जो लगभग 4.4 बार प्रति दिन थी. वहीं 26 से 45 साल की उम्र के लोगों में यह सबसे अधिक यानी लगभग 5.2 बार तक पहुंच गई. इसके बाद 46 से 65 और 66 वर्ष से ऊपर के लोगों में यह संख्या थोड़ी कम हो गई. इसका कारण उम्र के साथ मेटाबॉलिज्म, खानपान और आंतों की गतिविधियों में होने वाले बदलाव माने जाते हैं.
इस समय अधिक बनती है गैस
दिन के समय के हिसाब से भी गैस बनने में फर्क देखा गया. पूरे दिन में यह प्रक्रिया समान नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती जाती है और शाम के समय, खासकर 6 बजे से 10 बजे के बीच, इसका स्तर सबसे अधिक देखा गया। इसका सीधा संबंध दिनभर खाए गए भोजन के पाचन और आंतों में होने वाली गतिविधियों से होता है. कुल मिलाकर, यह अध्ययन यह बताता है कि दिन में कुछ बार गैस पास करना पूरी तरह सामान्य है और यह शरीर के स्वस्थ पाचन तंत्र का संकेत हो सकता है। चिंता तब करनी चाहिए जब इसके साथ पेट दर्द, बहुत ज्यादा सूजन, या लगातार असहजता जैसी समस्याएं महसूस हों. इस तरह देखा जाए तो गैस बनना कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे सही तरीके से समझना ज़रूरी है ताकि लोग अनावश्यक चिंता से बच सकें.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

