Fire Safety Week: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 4 मई से 10 मई 2026 तक पूरे देश में Fire Safety Week की शुरुआत की है. इसका मकसद अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को आग जैसी आपात स्थिति के लिए ज्यादा सुरक्षित और तैयार बनाना है. इस अभियान में सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और कई केंद्रीय विभाग मिलकर काम कर रहे हैं.
इस कार्यक्रम की शुरुआत एक राष्ट्रीय शपथ के साथ हुई, जिसका नेतृत्व स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने किया. इस दौरान “Fire Safety in Health Facilities” यानी स्वास्थ्य संस्थानों में आग से सुरक्षा को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया.
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि इस साल की थीम “Safe Schools, Safe Hospitals, and a Fire-Safety Aware Society” है.
हेल्थ वर्कर्स को दी जाएगी ट्रेनिंग
इसका मतलब है कि सुरक्षा सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की साझा जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि यह सप्ताह अस्पतालों की मौजूदा व्यवस्था की जांच करने, कमियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का एक अच्छा मौका है. साथ ही उन्होंने हेल्थ वर्कर्स को आग से जुड़ी इमरजेंसी से निपटने के लिए ट्रेनिंग देने पर भी जोर दिया.
इस मौके पर NDMA के अधिकारी कृष्णा एस. वत्सा ने कहा कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी के लिए एक मजबूत और पहले से तैयार सिस्टम होना जरूरी है. उन्होंने बताया कि इसके लिए देशभर में जागरूकता अभियान और ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे, ताकि हर अस्पताल में स्टाफ आपात स्थिति को संभालने के लिए तैयार रहे.
छोटी गलती बन सकती बड़ी दुर्घटना
फायर सर्विसेज के महानिदेशक सुनील कुमार झा ने भी कहा कि अस्पताल बहुत संवेदनशील जगह होते हैं, जहां छोटी सी गलती भी बड़ी दुर्घटना बन सकती है. इसलिए नियमित जांच, सही ट्रेनिंग और सतर्कता बहुत जरूरी है. इस दौरान मंत्रालय ने National Guidelines on Fire and Life Safety in Healthcare Facilities (2026) भी जारी की. इन गाइडलाइंस में अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर पूरी व्यवस्था बताई गई है, जैसे रिस्क का आकलन, इमरजेंसी सिस्टम, स्टाफ की ट्रेनिंग और सुरक्षा नियमों का पालन. खास तौर पर ICU, NICU, PICU और ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं.
क्या होगा फायर सेफ्टी वीक में खास?
Fire Safety Week के दौरान देशभर में कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जैसे फायर सेफ्टी ऑडिट, मॉक ड्रिल, मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रैक्टिस, डेमो और वेबिनार। इनका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और अस्पतालों को हर स्थिति के लिए तैयार बनाना है. मंत्रालय ने सभी राज्यों और अस्पतालों से कहा है कि वे इन गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन करें और सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाएं, ताकि मरीजों, डॉक्टरों और स्टाफ के लिए अस्पताल एक सुरक्षित जगह बन सके.
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