Fitness After 40: बढ़ती उम्र में शरीर बीमारियों की चपेट में आसानी से आ जाता है. क्योंकि बढ़ती उम्र में शरीर की इम्यूनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है. ऐसे में शरीर बीमारियों से लड़ने की ताकत खो देता है. इस वजह से ही शरीर धीरे-धीरे बीमारियों की चपेट में आने लगता है. इनमें हार्ट का कमजोर होना, हड्डियों का टूटना, और आंखों से लेकर कानों तक क्षमता प्रभावित होती है. इसलिए फिट और सेहतमंद रहने के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट कराने के सलाह देते हैं जिससे बीमारियों के शुरूआती संकेतों की पहचान की जा सके और समय रहते गंभीर जोखिम से बचा जा सके. आज के आर्टिकल में हम जानेंगे कि हार्ट की बीमारियों से बचने के लिए आपको कौन-कौन से टेस्ट कराने चाहिए.
दरअसल बढ़ती उम्र में ब्लड वेसल्स के सख्त होने, आर्टरीज में प्लाक जमने और दिल की मांसपेशियों के मोटा होने से दिल की कार्यक्षमता काफी हद तक प्रभावित हो जाती है. इसलिए समय रहते कुछ जरूरी टेस्ट जरूर करवा लेने चाहिए.
40 के बाद हार्ट से जुड़े कौन से टेस्ट जरूर कराने चाहिए?
ब्लड प्रेशर मेजरमेंट
दिल की सेहत दुरुस्त रहे इसके लिए ब्लड प्रेशर मेजरमेंट टेस्ट जरूर कराना चाहिए. इस टेस्ट से ये पता चलेगा कि शरीर में बहने वाला ब्लड धमिनियों पर कितना दबाव डालेगा. इस टेस्ट में दो रीडिंग मापी जाती हैं, सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (जब दिल धड़ककर रक्त पंप करता है) और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (जब दिल धड़कनों के बीच आराम की स्थिति में होता है). इसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति का ब्लड प्रेशर सामान्य है, बढ़ा हुआ है या हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) की स्थिति में है। यह टेस्ट हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन करने में भी मदद करता है. नियमित ब्लड प्रेशर जांच से हृदय स्वास्थ्य पर नजर रखी जा सकती है और समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है.
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाने से शरीर में वसा (फैट) और कोलेस्ट्रॉल लेवल का पता चलता है. इस टेस्ट में मुख्य रूप से टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल), HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल), ट्राइग्लिसराइड्स और कभी-कभी VLDL की जांच की जाती है. इस टेस्ट की मदद से दिल की बीमारियां, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के बारे में पता चलता है.
इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG)
इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) टेस्ट से दिल की धड़कन (Heart Rhythm), हृदय की गति (Heart Rate) और दिल की विद्युत गतिविधि के बारे में पता चलता है. इसके जरिए अनियमित धड़कन (Arrhythmia), हार्ट अटैक के संकेत, हार्ट में ब्लड सर्कुलेशन की समस्या और दिल से जुड़ी कुछ अन्य असामान्यताओं का पता लगाया जा सकता है. इसलिए आपको ये टेस्ट करवना जरूरी है.
इकोकार्डियोग्राम
इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) टेस्ट से दिल की संरचना और कार्यप्रणाली की जानकारी मिलती है. इस टेस्ट में डॉक्टर्स हार्ट की लाइव इमेज देख पाते हैं. इसके जरिए हृदय की पंपिंग क्षमता, हार्ट वाल्व की स्थिति, हृदय के कक्षों (Chambers) का आकार, जन्मजात हृदय दोष, रक्त प्रवाह और दिल की मांसपेशियों की कार्यक्षमता का पता लगाया जा सकता है. यह टेस्ट अल्ट्रासाउंड तकनीक से किया जाता है. जिन लोगों को बढ़ती उम्र में हाई बीपी या सांस फूलने जैसी समस्या होती है उनके लिए यह फायदेमंद है.
स्ट्रेस टेस्ट या ट्रेडमिल टेस्ट
स्ट्रेस टेस्ट (TMT) या ट्रेडमिल टेस्ट से यह पता चलता है कि शारीरिक गतिविधि या व्यायाम के दौरान आपका दिल कितना बेहतर काम कर रहा है. इस टेस्ट के जरिए दिल तक ब्लड की आपूर्ति में कमी, कोरोनरी आर्टरी डिजीज (ब्लॉकेज), अनियमित धड़कन (Arrhythmia), व्यायाम सहन करने की क्षमता और व्यायाम के दौरान होने वाले सीने के दर्द या सांस फूलने के कारणों का पता लगाया जा सकता है.
हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट (hs-CRP Test)
हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP) टेस्ट से शरीर में मौजूद सूजन (Inflammation) के स्तर का पता चलता है. यह टेस्ट विशेष रूप से हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम का आकलन करने में मदद करता है. यदि hs-CRP का स्तर बढ़ा हुआ हो, तो यह धमनियों में सूजन और भविष्य में हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़े हुए खतरे का संकेत हो सकता है.
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FAQs
सवाल: दिल की बीमारी का पता लगाने के लिए सबसे सामान्य टेस्ट कौन-से हैं?
जवाब: ब्लड प्रेशर टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, ECG (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम), इकोकार्डियोग्राम और स्ट्रेस/ट्रेडमिल टेस्ट सबसे सामान्य जांचें हैं.
सवाल:कोलेस्ट्रॉल और हार्ट अटैक के जोखिम का पता किस टेस्ट से चलता है?
जवाब: लिपिड प्रोफाइल टेस्ट से टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर पता चलता है, जबकि hs-CRP टेस्ट शरीर में सूजन और हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने में मदद करता है.
सवाल:दिल की पंपिंग क्षमता और ब्लॉकेज की जांच कैसे की जाती है?
जवाब: इकोकार्डियोग्राम से दिल की पंपिंग क्षमता और वाल्व की स्थिति का पता चलता है, जबकि स्ट्रेस (TMT) टेस्ट और जरूरत पड़ने पर एंजियोग्राफी से हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज का पता लगाया जाता है.
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