FSSAI Notice on Misleading Food Claims: सोशल मीडिया हो या फिर टीवी ऐड मार्केटिंग के लिए अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए कई कंपनियां उस प्रोडक्ट पर नेचुरल या फिर प्योर जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर देती हैं. लेकिन असल में ऐसा है या फिर नहीं ये कोई नहीं जानता. कस्टमर्स के पास यही जानकारी लिखे प्रोडक्ट्स आते हैं और वो उसे खरीद भी लेते हैं.
नतीजा अधिकतर प्रोडक्ट्स ऐसे होते हैं जो आपकी हेल्थ के साथ खिलवाड़ कर रहे हो. अब ऐसे मामलों पर कंट्रोल पाने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI और कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी यानी CCPA साथ मिल चुका है और ऐसी कंपनियां जो भ्रामक दावों के साथ ऐसे प्रोडक्ट्स को बेच रही हैं उनपर शिकंजा कस रही हैं. हाल ही में दो अलग मामले सामने आए हैं. जिसमें कार्रवाई देखने को मिली है.
रिश्ते नमकीन को जारी किया गया नोटिस
एक मामला सामने आया है. जहां ग्राहकों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की और इस शिकायत के बाद FSSAI ने रिश्ते नमकीन नाम की कंपनी को नोटिस जारी किया है. ग्राहकों की ये शिकायत थी कि उनके दो पॉपुलर प्रोडक्ट्स फरसान स्ट्रीट मसाला पत्ता और फरसान स्ट्रीट रोस्टेड मिलेट भेल. इनके पाकेट पर सिर्फ एडिबल वेजीटेबल ऑयल ही लिखा हुआ था.
इतनी जानकारी ये बताने के लिए काफी नहीं थी कि आखिर ये कौन सा तेल है. जिसपर FSSAI ने इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस एक्ट 2020 का उल्लंघन माना है. ये नियम कहता है कि कंपनियों को ये जानकारी देनी ही होगी कि आखिर उनके प्रोडक्ट में कौन से तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है. अगर पाम ऑयल है, मूंगफली का तेल है या फिर राइस ब्रैन ऑयल है तो उसे प्रोडक्ट पर लिखना ही होगा कि आखिर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. यानी सिर्फ वेजिटेबल ऑयल लिखा इतना काफी नहीं माना जाएगा.
कंपनी को नोटिस भेज मांगा जवाब
क्योंकि कंपनी ने इस नियम का पालन नहीं किया था. जिसके तहत कंपनी को नोटिस जारी किया गया है और ये जानकारी देने को कहा है कि आखिर उस लेबल पर तेल का नाम क्यों नहीं लिखा गया था. वो ये बताए कि उन्होंने 2020 के लेबलिंग नियम नहीं तोड़ा है. इसकी एक रिपोर्ट जारी की जाए उसमें बताया जाए कि आखिर गलती सुधारने के लिए या फिर फ्यूचर में ऐसी गलती दोबारा न हो इसके लिए कंपनी क्या कदम उठा रही है.
दूसरी कंपनी को क्यों भेजा गया नोटिस
वहीं न सिर्फ रिश्ते नमकीन को नोटिस जारी किया गया बल्कि दूसरी कंपनी स्टोरिया फूड्स और मिसेज बेक्टर्स को भी नोटिस जारी किया गया है. साथ ही उनपर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया गया है. दरअसल इन कंपनियों ने पैकेज पर 100 प्रतिशत शब्द का इस्तेमाल किया था. सीसीपीए ने साफ कहा कि 100% वाले दावा मतलब एब्सोल्यूट न्यूमेरिकल क्लेम की कैटेगरी में ये आता है. मतलब ये कि अगर आप 100% लिख रहे हैं तो आपकी कही हुई बात प्रोडक्ट में होनी ही चाहिए.
दरअसल स्टोरिया ने अपने प्रोडक्ट्स को
- 100 प्रतिशत नारियल पानी
- 100 प्रतिशत जूस
- 100 प्रतिशत अनार
- 100 प्रतिशत मिक्स फ्रूट जूस
- 100 प्रतिशत आम का जूस
इस तरह प्रोडक्ट को एडवर्टाइज किया है. अथॉरिटी को इसके उलट प्रोडक्ट में चीजें मिलीं. ऐसा ही मामला मिसेज बेक्टर्स का था. इन्होंने 100% आटा ब्रेड, 100% साबुत गेहूं की ब्रेड जैसे फर्जी दावे किए हुए थे, जिस पर सीसीपीए ने सख्त कदम उठाते हुए आदेश दिए कि कंपनी अपनी पैकेजिंग, वेबसाइट और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से इन झूठे दावों को तुरंत हटाएं.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

