Greater Noida Gims Hospital Protest: कासना स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) में आउटसोर्स कर्मचारियों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुए बवाल मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है. बता दें कि आउटसोर्स कर्मचारी 15 जून से स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. बुधवार को प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी. वहीं कर्मचारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की कई घटनाएं सामने आईं, जिनकी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. अब इस मामले पर FIR दर्ज की गई है.
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने अस्पताल की सेवाओं में बाधा पहुंचाने, सरकारी कार्य में रुकावट डालने और संस्थान की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं. इन्हीं आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और जांच की जा रही है. वहीं, प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिससे कुछ लोगों को चोटें भी आईं.
मामले में अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
GIMS प्रशासन का कहना है कि 15 जून से जारी आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल से अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. कर्मचारियों से कई दौर की बातचीत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान ओपीडी क्षेत्र में बाधा पहुंचाई गई और अस्पताल की संपत्ति को नुकसान हुआ. वहीं, संस्थान ने दावा किया कि मरीजों का इलाज और आपातकालीन सेवाएं लगातार जारी हैं तथा कर्मचारियों से जल्द काम पर लौटने की अपील की गई है.
क्यों हो रहा प्रदर्शन?
आउटसोर्स कर्मचारी 15 जून से स्थायी नौकरी की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से संस्थान में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमित नियुक्ति नहीं मिली है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि धरने के कारण अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो रही थीं. प्रशासन ने कर्मचारियों से कई बार बातचीत कर प्रदर्शन खत्म करने की अपील की है. अधिकारियों के अनुसार बुधवार को भी कई घंटों तक बातचीत का सिलसिला चला, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला.
कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील
GIMS प्रशासन ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से मरीजों और आमजन के हित में जल्द से जल्द अपनी ड्यूटी पर लौटने की अपील की है. संस्थान का कहना है कि वह अपने कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति पूरी सहानुभूति रखता है और उनकी सभी मांगों को विचार के लिए संबंधित उच्च अधिकारियों तक भेजा जाएगा.
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया के बावजूद मौजूदा कर्मचारियों की नौकरियां पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जाएगी. संस्थान ने कर्मचारियों से अस्पताल की सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में सहयोग देने का अनुरोध किया है.
क्या है पूरा मामला?
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की 15 जून से जारी हड़ताल और धरना-प्रदर्शन के कारण अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. संस्थान प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों की मांग बिना परीक्षा के सेवाओं को नियमित करने की है. प्रशासन के अनुसार, जिला प्रशासन और पुलिस के साथ कई दौर की वार्ता के बावजूद समाधान नहीं निकल सका.
प्रबंधन का आरोप है कि प्रदर्शनकारी ओपीडी के पंजीकरण क्षेत्र में धरने पर बैठ गए, जिससे मरीजों को परेशानी हुई और अस्पताल के कामकाज में बाधा आई. 24 जून को पुलिस और प्रशासन ने कर्मचारियों से धरना स्थल बदलने का अनुरोध किया, जिसके बाद कुछ लोग उग्र हो गए और अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. संस्थान ने दावा किया कि कुछ नर्सिंग स्टाफ के कार्य न करने से 12 गंभीर मरीजों की सेहत पर असर पड़ा. हालांकि अस्पताल में ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं जारी हैं. प्रशासन ने कर्मचारियों से मरीजों के हित में जल्द काम पर लौटने की अपील की है.
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