How to stop thinking at night: कई लोग अक्सर दिनभर की थकान के बाद जब बिस्तर पर नींद के लिए जाते हैं तो सुकून भरी नींद के बजाए मन और दिमाग में बुरे ख्याल चलते हैं. उन्हें पूरे दिन के घटना क्रम परेशान करता है. ऐसे में व्यक्ति सही ढ़ग से सो नहीं पाता. दिनभर के खुशी-दुखी पलों के बीच उलझा रहता है. इन्हीं ख्यालों में अक्सर पूरी रात बीत जाती है. और रात थकान उतारने के बजाए वह ओवर थिंकिंग में निकाल देता है. बता दें कि अगर नींद पर किसी तरह का प्रभाव पड़ता है तो इसका सीधा असर सेहत पर भी दिखाई देता है. गौरतलब है कि अगर नींद के घंटों में कमी आई तो अगले दिन दिमाग सही तरह से काम नहीं कर सकता. ऐसे में सेहत के साथ-साथ काम पर भी इसका असर दिखाई देता है.
अगर आपके साथ भी ऐसी समस्या होती है तो जान लीजिए कि ये समस्या किस ओर इशारा कर रहे हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि इस तरह के संकेत किसी-न-किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है. दरअसल लगातार ओवरथिंकिंग से नींद की कमी, मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन, फोकस करने में परेशानी, तनाव और एंग्जायटी बढ़ जाती है. समय के साथ यह डिप्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकती है.
रात ओवर थिंकिंग किस बीमारी का संकेत है?
अगर आपको भी रात में नींद आने में परेशानी होती है तो सावधान हो जाएं. इस तरह के लोगों में एंग्जायटी डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है. एंग्जायटी डिसऑर्डर एक मेंटल समस्या है, जिसमें व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा और लगातार चिंता, डर या घबराहट महसूस होती है. इस कारण नींद, काम और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है.
डिप्रेशन की बीमारी होना
डिप्रेशन (अवसाद) भी एक प्रकार की मेंटल समस्या है, जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक उदासी, निराशा और किसी भी काम में रुचि की कमी महसूस करता है. इस स्थिति में व्यक्ति को नींद, भूख, एनर्जी और यहां तक की डेली रूटीन तक प्रभावित रहता है. जिन लोगों में डिप्रेशन की समस्या होती है उन्हें अक्सर रात के समय बुरे ख्याल आते हैं.
इंसोम्निया
इंसोम्निया (Insomnia) एक नींद से जुड़ी समस्या है, जिसमें व्यक्ति को सोने में कठिनाई होती है, बार-बार नींद टूटती है और भरपूर मात्रा में नींद नहीं मिल पाती. इंसोम्निया सामान्य बोलचाल में ‘अनिद्रा’ भी कहा जाता है, एक नींद से जुड़ी आम समस्या है. इसमें व्यक्ति को रात में सोने में कठिनाई होती है, नींद बीच में बार-बार टूटती है, या फिर सुबह बहुत जल्दी आंख खुल जाती है और दोबारा नींद नहीं आती. इंसोम्निया से पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद नहीं मिल पाती है, जिससे वह दिनभर थकान, सुस्ती और चिड़चिड़ेपन का अनुभव करता है.
उपचार और बचाव
- सोने और जागने का समय नियमित रखें. सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाएं.
- योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की तकनीकों का अभ्यास करें.
- कैफीन और अत्यधिक चीनी का सेवन कम करें.
- अपनी चिंताओं को डायरी में लिखने की आदत डालें.
- अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें.
- समय पर पहचान और सही मदद से ओवरथिंकिंग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

