ICMR Study On Indian Diet: इंडियन थाली का जब जिक्र आता है तो चावल, रोटी, पराठें ये सब का ख्याल कैसे पीछे छोड़ा जा सकता है. ये सब ऐसी चीजें है जो हमारी डेली लाइफ से जुड़ चुकी हैं. एक अहम हिस्सा बन चुकी हैं. बचपन से ही हम अपनी थालियों में इन खानों को तो देख ही रहे हैं. इसी इंडियन थाली पर सरकारी स्टडी रिपोर्ट सामने आई है. ये रिपोर्ट बताती है कि क्या हम बैलंस्ड डाइट खा रहे हैं या नहीं.
जानकारी के लिए बता दें कि ये रिसर्च भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से की गई है. दरअसल ICMR की एक स्टडी पर जानकारी सामने आई कि भारत में अधिक्तर लोग ऐसे हैं जो अनाज का सेवन अधिक कर रहे हैं. लेकिन हमारे शरीर की मांग है प्रोटीन. हमारा शरीर मांगता है प्रोटीन. प्रोटीन हमें मिलता है. दाल, हरी सब्जियां, फल, दूध जैसे चीजों से. लेकिन भारतीय लोग अपनी डाइट में इन चीजों का ही सेवन सबसे कम कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक साल 2022 से 23 के घरेलू उपभोग सर्वे के आंकड़ों पर ये स्टडी आधारित है.
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
रिपोर्ट बताती है कि देश के कई राज्य ऐसे हैं जहां हर महीने में एक तय सीमा से भी कई अधिक अनाज का सेवन लोग कर रहे हैं. खासतौर पर गांव वाले इलाकें इनमें शामिल हैं. जहां पर चावल और गेहूं के सेवन की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है. यानी सब्जियां, दालों की खपत काफी कम है. अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि एक इंडियन थाली कितनी हेल्दी है. लेकिन सवाल आता है कि आखिर कितना अनाज का सेवन हमें करना चाहिए तो इसकी भी जानकारी इस रिपोर्ट में दी गई है.
कितने अनाज का करना चाहिए सेवन
एक व्यक्ति आखिर एक महीने में कितने अनाज का सेवन कर सकता है या फिर उसे इतने अनाज का सेवन करना चाहिए? तो इसका जवाब है कि लगभग हर महीने 7.5 किलो अनाज की जरूरत एक व्यक्ति को पड़ती है. लेकिन कई राज्यों का आंकड़ा चौंकाने वाला है. इस लीमिट से कई अधिक है. जानकारी के मुताबिक कई राज्यों में आंकड़ा 10 से 11 किलो तक पहुंच गया है. इनमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, त्रिपुरा जैसे राज्यों में गांव वाले इलाकों में अनाज का सेवन सबसे अधिक किया जाता है.
कैसा खाना खा रहे है लोग?
शरीर मांग रहा है हेल्दी खाना. लोग खा रहे हैं जल्दी बनने वाला खाना, जो केवल पेट भर देता है और मन को खुश कर देता है. इसके पीछे का कारण है कि भागदौड़ बहुत होने लगी है. किसी के पास भी समय नहीं है. सुबह जल्दी ऑफिस जाना है, बच्चों को जल्दी में ही स्कूल भेजना है. अब उन्हें लंच में देने का क्या ऑप्शन बचता है रोटी और चावल. क्योंकि ये सबसे जल्दी भी बन जाता है और आसान भी है.
इतना ही नहीं आप भी मानेंगे कि लोग प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड, रेस्तरां में खाना भी बंद नहीं करते. इसका भी एक अलग ट्रेंड देखने को मिलता है. ऐसे खाने हमारे शरीर को पोषण नहीं दे पाते उल्टा बीमारियां मिलती है जैसे मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर. इस तरह की बीमारियां जकड़ लेती है. धीरे-धीरे ये हर उम्र वाले लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. इसलिए खाना हमारी बीमारी तय कर रहा है.
सब्जियों का सेवन बेहद कम
अब क्या सिर्फ गांव में ही लोग अनाज का सेवन अधिक कर रहे हैं, तो ऐसा नहीं है. गांव और शहर दोनों ही बराबर है. ICMR ने बताया कि एक व्यक्ति को हर महीने 12 किलो सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है. आप सोचिए कि क्या आप इतनी सब्जियां खा रहे हैं? हालांकि सबसे अधिक सब्जियां खाने वाला राज्य छत्तीसगढ़ है. जहां ग्रामीण इलाकों में 6.7 किलो और शहरी इलाकों में 8.3 किलो के आंकड़ों की जानकारी दर्ज है. यानी फिर भी एक तय लिमीट से कितनी दूर है. ICMR बताता है कि एक शाकाहारी व्यक्ति को हर मीहने लगभग 2.6 किलो दाल और मांसाहारी व्यक्ति को 1.7 किलो दाल का सेवन तो करना ही चाहिए. लेकिन 28 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़े बताते हैं कि लोग हर मीहने सिर्फ 1 किलो से भी कम दाल का सेवन कर रहे हैं. खासतौर पर उन्हें ध्यान रखना चाहिए जो शाकाहारी व्यक्ति हैं. क्योंकि दाल में सबसे अधिक प्रोटीन होता है. यही प्रोटीन का सबसे बड़ा सोर्स भी मानी जाती है. लेकिन पर्याप्त मात्रा में हम प्रोटीन का सेवन नहीं कर रहे तो कमजोरी, थकान और मसल्स से जुड़ी समस्याएं ही मिल सकती हैं.
ऐसी होनी चाहिए डाइट
आप पूछेंगे कि आखिर फिर हमारी डाइट कैसी होनी चाहिए? तो इसका जवाब है हेल्दी और हेल्दी डाइट के लिए अपनी डाइट में सिर्फ अनाज को शामिल मत कीजिए. हरी सब्जियां खाएं, मौसमी फल का सेवन करें, दूध और प्रोटीन से भरपूर चीजों का सेवन करें. रोज सलाद खाएं. जंक फूड बंद करें. दाल सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं. इससे लंबे समय तक आप हेल्दी रह सकते हैं.
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