Innovation and Inclusivity Summit 2026: नई दिल्ली में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय “Innovation and Inclusivity” नेशनल समिट का सफलतापूर्वक समापन हो गया. इस समिट का उद्देश्य देश के स्वास्थ्य तंत्र को और अधिक मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बनाना था.
पहले दिन विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने-अपने क्षेत्र में किए गए बेहतरीन कार्यों और नवाचारों को साझा किया, जिससे एक-दूसरे से सीखने का अवसर मिला. इन प्रस्तुतियों में खासतौर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया गया.
CRM रिपोर्ट पर फोकस
समिट के दूसरे और अंतिम दिन की चर्चा मुख्य रूप से National Health Mission (NHM) के तहत की गई 17वीं Common Review Mission (CRM) की रिपोर्ट पर केंद्रित रही. इस रिपोर्ट में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, कार्यप्रणाली और सुधारों का विस्तृत आकलन किया गया.
कौन-कौन से सुधार हुए
रिपोर्ट के अनुसार, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है और डिजिटल हेल्थ सेवाओं को अपनाने में भी तेजी आई है. इसके साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार देखा गया है और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की जांच और इलाज पहले से बेहतर हुआ है. टेलीमेडिसिन के माध्यम से दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं, जिससे इलाज अब अधिक सुलभ हो गया है.
किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत
हालांकि, चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ क्षेत्रों में अभी और सुधार की आवश्यकता है. विशेष रूप से स्वास्थ्य कर्मियों की बेहतर तैनाती, दवाइयों और जांच सुविधाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और दूरस्थ व पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना जरूरी है. इसके अलावा डेटा की गुणवत्ता को सुधारने और डिजिटल प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग कर सही समय पर सही निर्णय लेने पर भी जोर दिया गया.
सरकार की प्राथमिकताएं
समापन सत्र में अधिकारियों ने इस बात पर बल दिया कि डिजिटल हेल्थ के विस्तार के साथ यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि कोई भी व्यक्ति, खासकर गरीब और कमजोर वर्ग, इससे वंचित या परेशान न हो. इसके लिए फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को लगातार प्रशिक्षण देने और सिस्टम को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की आवश्यकता बताई गई. साथ ही, 2030 तक Sustainable Development Goals (SDGs) को हासिल करने के लिए योजनाओं को उसी दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया.
राज्यों के सफल उदाहरण
समिट के दौरान विभिन्न राज्यों द्वारा प्रस्तुत किए गए सफल मॉडल जैसे गुजरात में टीबी से मौत कम करने की पहल, तमिलनाडु में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष व्यवस्था, केरल में एंटीबायोटिक के सही उपयोग पर काम, और छत्तीसगढ़ में मलेरिया उन्मूलन अभियान यह दिखाते हैं कि राज्य स्तर पर किए जा रहे नवाचार राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
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