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शारीरिक ही नहीं…मेंटल हेल्थ भी है जरूरी, ऐसे मैनेज करें बच्चों में Mental Health Disorders

Mental Health Disorders: एक व्यक्ति तभी फिट रह सकता है. जब वह फिजिकली फिट रहने के साथ-साथ मेंटली भी फिट रहे.

Mental Health Disorders: एक व्यक्ति तभी फिट रह सकता है. जब वह फिजिकली फिट रहने के साथ-साथ मेंटली भी फिट रहे. इसलिए फिट रहना सिर्फ फिजिकली फिट रहना नहीं होता, बल्कि मेंटली फिट रहना भी होता है. अक्सर कामकाज का प्रेशर और घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच बच्चों की मेंटल हेल्थ पर अक्सर ध्यान ही नहीं जाता, ऐसे में बच्चे स्ट्रेस और डिप्रेशन का शिकार बन जाते हैं. और किसी को पता ही नहीं चल पाता. लेकिन कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखकर आप मेंटली फिट रह सकते हैं.

वहीं आज के समय में बड़े ही नहीं बच्चे भी डिप्रेशन और स्ट्रेस का शिकार बन रहे हैं. बच्चों के विकास के लिए जरूर है कि वह शारीरिक रुप से फिट रहने के साथ-साथ मेंटली रुप से भी स्वस्थ रहे. इसलिए पैरेंट्स होने के नाते आपकी ये जिम्मेदारी बनती है, कि आप अपने बच्चे के मेंटली हेल्थ का भी ध्यान रखें. ऐसे में आप कुछ लक्षणों की पहचान करके बच्चों को मेंटली रुप से स्वस्थ रहने में मदद कर सकते हैं. चलिए जानते हैं.

बच्चों में ऐसे पहचानें मेंटल हेल्थ के संकेत | Mental Health Disorders

  • उदासी, चिड़चिड़ापन, बेकार महसूस करना
  • व्यवहार में बदलाव
  • नींद और भूख की समस्याएं
  • पढ़ाई में मन न लगना
  • बिना वजह शरीर में दर्द होना
  • लोगों से कटने लगा

कैसे मैनेज करें टीनएज बच्चों में मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर

अगर आपके बच्चों में उदासी, चिड़चिड़ापन और व्यवहार में बदलाव देखने को मिलता है. तो आप बच्चों से बात करने की कोशिश करें. उनसे बात करने के तरीके खोजें. माना आज की बदलती लाइफस्टाइल में इतना समय नहीं कि आप बच्चे पर इतना ध्यान दे पाएं. लेकिन दिन में एक बार अपने बच्चों से जरूर पूछें कि उनका दिन कैसा रहा और वे क्या कर रहे हैं. आगे का क्या प्लान है. जैसे सवाल अपने बच्चों से अक्सर करते रहें. जिसेस बच्चे को अकेलापन न लगें. अगर आप उनसे इस तरह के सवाल करेंगे तो उन्हें अकेलापन महसूस नहीं होगा. और उन्हें लगेगा कि उनका हालचाल पूछने वाला कोई है. उन्हें इस तरह के सवालों से ये एहसास होगा कि आप उनके लिए हैं, चाहे कुछ भी हो जाए, आप उनके साथ है.

वहीं बच्चे टीनएज का मतलबा आजादी समझते हैं. खुज को किशोर मानते हैं, और हर फैसले खुद लेते है. जिसके बाद वह कभी-कभार कुछ ऐसे फैसले ले लेते हैं. जिनके बाद उन्हें पछताना पड़ता है. इसलिए अपने टीनएज बच्चों को जितना हो सके समय दें. और राह दिखाने की कोशिश करें. जिससे उन्हें किसी भी फैसले के बाद पछताना न पड़ें.

कुछ ऐसे तरीके खोजें जिनसे आप अपने बच्चे को अन्य कामों के साथ-साथ एंजेंज रख सकें. जिससे उनका दिमाग फ्रेश रहे.

वहीं अगर आपका बच्चा कभी डिप्रेशन में दिखता है, तो उसका हालचाल पूछें. अगर वह उस समय कुछ नहीं बताना चाहता तो उससे बाद में भी हालचाल ले सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि आप उसे निराश देखकर खुद इतना परेशान न हो जाएं जिससे आप उन पर हावी हो जाएं. ध्यान से बच्चों को संभाले. उन्हें यह न बताएं कि उन्हें क्या करना है. शांत होकर अपने बच्चों की परेशानी सुनें और उनकी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें.

अनदेखा न करें मेंटल हेल्थ

हम अक्सर शारीरिक हेल्थ को ही महत्व देते हैं. वहीं मानसिक स्वास्थ यानि मेंटल हेल्थ को नजरअंदाज कर देते हैं. यह समस्या आज वैश्विक तौर पर उभर कर सामने आ रही है. एक स्टडी के मुताबिक आज के समय मानसिक स्वास्थ्य गंभीर और बड़ी चुनौती बनकर उभर कर सामने आ रही है. जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है। युवाओं और छात्रों में ये परेशानी खासतौर पर देखी जाती है. शोध बताते हैं कि भारत समेत दुनिया भर में 16-30 साल की उम्र के लोग सबसे ज्यादा मानसिक दबाव महसूस करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है बदलती जीवनशैली, पढ़ाई और करियर का दबाव, सोशल मीडिया की आदत और असफलता के डर को माना जा रहा है. इसलिए अपने बच्चों में मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर के लक्षणों की पहचान कर, उन्हें मानसिक रुप से फिट रखने में उनकी मदद करें.

यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri 2026: सात्विक भोजन से खुद को रखें Fit, एनर्जी से भरपूर रहेगी बॉडी

(Disclaimer: यहां दी गई सलाह और ये कॉन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए पेश किया गया है. यानी ये जानकारी किसी भी तरह से डॉक्टर्स राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट्स या फिर जिस समस्या से जूझ रहे हैं, उस क्षेत्र के डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही उस एडवाइस पर अमल करें. Fit Rahe India इस जानकारी के लिए किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)


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